स्वाइन फ्लू से मेरठ में नौ मौत
मेरठ। यूपी के मेरठ जिले में स्वाइन फ्लू का सबसे ज्यादा असर देखने को मिल रहा है। मेरठ मेडिकल कॉलेज में अब तक स्वाइन फ्लू से नौ लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें जिले के छह लोग शामिल है। यही नहीं, अब तक 52 मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है, जो कि प्रदेश में सबसे अधिक है।
इसके अलावा मेरठ के लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज में हापुड़, मुजफ्फरनगर और शामली के तीन लोगों की मौत भी स्वाइन फ्लू से हुई है। वहीं बीती रात पीएसी के दो जवानों को भी स्वाइन फ्लू ने अपनी गिरफ्त में ले लिया है, जिन्हें आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है।
सीएमओ ने दिया ये निर्देश
मेरठ के सीएमओ डॉ. राजकुमार ने समस्त अस्पतालों को निर्देश दिए हैं कि स्वाइन फ्लू के मरीजों को अलग वार्ड में रखें। सीएमओ ने खुद भी अस्पतालों का निरीक्षण किया और जहां भी स्वाइन फ्लू के मरीज को अन्य मरीजों के साथ रखा गया था। उन अस्पतालों को नोटिस भी जारी किया है। इसके अलावा तत्काल स्वाइन फ्लू को लेकर अलग से वार्ड बनाने का निर्देश दिया गया है। सीएमओ ने कहा कि दवाओं की कमी बिलकुल नहीं होने दी जाएगी। इसके साथ ही लोगों से सीएमओ ने अपील की है कि स्वाइन फ्लू को देखते हुए लोग अपना ख्याल खुद भी रखें। आजकल हाथ मिलाने की बजाए हाथ जोड़कर ही लोगों का अभिवादन स्वीकार करें।
पीएसी जवान भी स्वाइन फ्लू से पीड़ित
इससे पहले स्वाइन फ्लू को लेकर स्वास्थ्य विभाग में उस वक्त और हड़कंप मच गया। जब मेरठ में पीएसी छठी बटालियन के 14 जवानों को स्वाइन फ्लू का अंदेशा देखते हुए मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में भर्ती कराए गए सभी जवान बुखार, खांसी एवं जुकाम से ग्रस्त थे। इमरजेंसी स्टाफ ने बताया कि दो जवानों में गुरुवार को एच1एन1 पॉजीटिव पाया गया था। इनके साथ ट्रेनिंग करने वाले अन्य दर्जनभर साथियों में भी लक्षण उभरने लगे थे। उन्हें पीएसी के वाहन से एकसाथ मेडिकल कॉलेज लाया गया और आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया है। सभी जवानों के सैंपल सुबह जांच के लिए मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी लैब में भेजे जाएंगे। यही नहीं, स्वास्थ्य विभाग ने पीएसी बटालियन में एक कैम्प भी लगाकर जवानों की जांच की है।
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एच1एन1 से संक्रमित मरीजों को आईसीयू में भर्ती करने से अन्य मरीजों में भी वायरस पहुंचा
इससे पहले जनपद के अस्पतालों में स्वाइन फ्लू के इलाज में लापरवाही बरती गई। एच1एन1 से संक्रमित मरीजों को आईसीयू में भर्ती करने से अन्य मरीजों में भी वायरस पहुंच गया। मेरठ-सहारनपुर की संयुक्त टीम ने मेरठ के आधा दर्जन अस्पतालों की पड़ताल की, जिसमें न आइसोलेशन वार्ड मिला, और न ही एन-95 मास्क। सीएमओ डॉ. राजकुमार ने इसे अस्पतालों की घोर लापरवाही बता नोटिस जारी किया है। स्वास्थ्य विभाग को आशंका है कि कई मरीजों की मौत मल्टीआर्गन फेल्योर से हुई। जबकि बगल के बेड पर भर्ती रहने की वजह से जांच रिपोर्ट में एच1एन1 वायरस मिला। सीएमओ ने बताया कि छह से अधिक अस्पतालों में पड़ताल की गई, जहां एन-95 मास्क व पीपीईटी किट भी उपलब्ध नहीं थी।
मल्टीआर्गन फेल्योर की वजह से जान गंवा बैठी, लेकिन मरने के बाद रिपोर्ट में एच1एन1 पॉजिटिव आ गया
अस्पतालों ने आइसीयू में स्वाइन फ्लू के मरीजों को भर्ती कर लिया, बगल के बेड पर भर्ती सांस, किडनी, चेस्ट, कैंसर, हार्ट, शुगर एवं अन्य बीमारियों के मरीजों की जान पर आफत आ गई। प्रतिरोधक क्षमता गिरने से कई रोगियों में स्वाइन फ्लू का संक्रमण मिला। बीते दिनों मेडिकल कालेज की इमरजेंसी में भर्ती 12 साल की एक बच्ची के आंत का दो बार ऑपरेशन हुआ था और फिर वो मल्टीआर्गन फेल्योर की वजह से जान गंवा बैठी, लेकिन मरने के बाद रिपोर्ट में एच1एन1 पॉजिटिव आ गया।
बहरहाल, सीएमओ ने मेरठ के जसवंत राय सुपरस्पेशियलिटी, लोकप्रिय अस्पताल, होप हास्पिटल, अपोलो, चौरसिया नर्सिग होम, न्यूटीमा अस्पताल, युग अस्पताल, शिव शक्ति नर्सिग होम, आनंद अस्पताल, केएमसी अस्पताल समेत कई अन्य को वार्ता के लिए भी बुलाया है। इसके बाद सभी अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड सुनिश्चित कराने की व्यवस्था की जाएगी।
