Jignesh Mevani

जमानत मिलते ही विधायक जिग्नेश मेवाणी बोले- झुकेगा नहीं

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बारपेटा: असम (Assam) के बारपेटा (Barpeta) जिले की एक अदालत ने गुजरात (Gujarat) के विधायक जिग्नेश मेवानी (MLA Jignesh Mevani) को एक महिला पुलिस अधिकारी के साथ कथित मारपीट के मामले में शुक्रवार को जमानत दे दी। जमानत मिलने के बाद जिग्नेश मेवानी (Jignesh Mevani) ने सुपरहिट फिल्म पुष्पा: द राइज’ से अल्लू अर्जुन (Allu Arjun) के प्रसिद्ध डायलॉग की तरह इशारा करते हुए कहा मैं नहीं ‘झुकूंगा (झुकेगा नहीं), इस मामले में गिरफ्तार होने से पहले मेवाणी ने कार में वही ‘झुकेगा नहीं’ इशारा किया, जब उन्हें पुलिस जेल ले जा रही थी।

Jignesh Mevani को निजी मुचलके पर मिली जमानत

Jignesh Mevani के खिलाफ मामले के अनुसार मेवानी ने उक्त महिला पुलिसकर्मी पर ‘‘हमला’’ उस समय किया, जब पुलिस दल उन्हें गुवाहाटी से कोकराझार ले जा रहा था। बारपेटा जिला एवं सत्र न्यायाधीश परेश चक्रवर्ती ने बारपेटा रोड पुलिस थाने में दर्ज मामले में मेवानी को एक हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी। अदालत ने बृहस्पतिवार को जमानत अर्जी पर मेवानी के वकील और लोक अभियोजक की दलीलें सुनी थीं और शुक्रवार के लिए आदेश सुरक्षित रख लिया था।

Jignesh Mevani का वीडियो

Jignesh Mevani ने किया था ट्वीट

मेवाणी को मारपीट के एक मामले में मंगलवार को बारपेटा जिले की एक स्थानीय अदालत ने पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। इससे पहले सोमवार को बारपेटा पुलिस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में उनके ट्वीट से जुड़े मामले में जमानत मिलने के तुरंत बाद एक पुलिसकर्मी के साथ मारपीट करने के आरोप में मेवाणी को फिर से गिरफ्तार कर लिया था। Jignesh Mevani को असम पुलिस की एक टीम ने गुजरात के पालनपुर शहर से उनके कुछ ट्वीट्स पर गिरफ्तार किया था।

जिग्नेश मेवाणी को कोर्ट से जमानत मिलते ही पुलिस ने किया गिरफ्तार

इन धाराओं में दर्ज हुआ था मामला

असम के भाजपा नेता अरूप कुमार डे द्वारा शिकायत दर्ज किए जाने के बाद उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मेवानी के खिलाफ धारा 120 बी (आपराधिक साजिश), धारा 153 (ए) (दो समुदायों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 295 (ए), और 504 (शांति भंग को भड़काने के इरादे से जानबूझकर अपमान), और की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। मेवानी के ट्विटर हैंडल पर कुछ ट्वीट्स उनके फीड पर दिखाई नहीं दे रहे हैं, जिसमें एक संदेश दिखाया गया है कि “कानूनी मांग” के आधार पर ट्वीट्स को भारत में रोक दिया गया है।

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