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Mann Ki Baat भारतीय स्टार्ट-अप लगा रहे लंबी छलांग : PM Modi

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नई दिल्ली। Mann Ki Baat : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Modi) ने देश में तेजी से विकसित हो रही स्टार्टअप इंडस्ट्री (Startup Industry) की उपलब्धि साझा करते हुए रविवार को बताया कि भारत में यूनिकॉर्न की संख्या 100 के आंकड़े तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी (Covid-19) के दौर में भी देश के स्टार्टअप (Startup) धन और मूल्य सृजित कर रहे हैं। उनकी यह उपलब्धि भारत के सामर्थ्य के प्रति एक नया विश्वास जगाती है। यूनिकॉर्न (Unicorn) उन कंपनियों को कहा जाता है जिनका वार्षिक टर्नओवर साढ़े सात हजार करोड़ रुपये से अधिक का होता है

प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ (Mann Ki Baat) के 89वें संस्करण में स्टार्टअप, स्वयं सहायता समूह, तीर्थक्षेत्रों की स्वच्छता, विश्व पर्यावरण दिवस, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस और भारतीय भाषाओं सहित समाज से जुड़े अनेक विषयों पर अपने विचार लोगों से साझा किए।

प्रधानमंत्री ने यूनिकॉर्न से जुड़ी उपलब्धि की तुलना किक्रेट के मैदान में भारतीय खिलाड़ियों की ओर से लगाए गए शतक से की। उन्होंने कहा कि भारत ने एक और मैदान में शतक लगाया है। इस माह की पांच तारीख को भारत ने 100 यूनिकॉर्न का आंकड़ा छू लिया है। यह देश के लिए गर्व का विषय है। एक यूनीकॉर्न कम-से-कम साढ़े सात हजार करोड़ रूपये का स्टार्टअप होता है। यह यूनीकॉर्न का कुल 25 लाख करोड़ रुपयों से भी ज्यादा के है।

उन्होंने कहा कि ये हर भारतीय के लिए गर्व की बात है। हमारे कुल यूनिकॉर्न में से 44 पिछले साल बने थे। इतना ही नहीं इस वर्ष के 3-4 महीने में ही 14 और नए यूनिकॉर्न बन गए। इसका मतलब यह हुआ कि वैश्विक महामारी के इस दौर में भी हमारे स्टार्ट-अप, संपत्ति और कीमत सृजित करते रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की यूनिकॉर्न इको-सिस्टम की सालाना विकास दर अमेरिका और ब्रिटेन सहित कई देशों से ज्यादा है। विश्लेषकों की मानें तो आने वाले वर्षों में इस संख्या में तेज उछाल देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि हमारे यूनीकॉर्न ई-कॉमर्स, फिन-टेक, एड-टेक, बायो-टेक जैसे विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। स्टार्टअप की दुनिया नये भारत की गति को दर्शाती है। आज भारत का स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी तंत्र सिर्फ बड़े शहरों तक ही सीमित नहीं है, छोटे-छोटे शहरों और कस्बों से भी इंटरप्रिन्योर (उद्यमी) सामने आ रहे हैं।

प्रधानमंत्री का तीर्थस्थलों को स्वच्छ रखने का आह्वान

प्रधानमंत्री मोदी ने श्रद्धालुओं से तीर्थस्थलों को स्वच्छ बनाए रखने में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने पर्यावरण दिवस के मद्देनजर लोगों से स्वच्छता के साथ वृक्षारोपण का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि हमें तीर्थ स्थलों की गरिमा बनाए रखनी चाहिए। सुचिता, साफ-सफाई और एक पवित्र वातावरण बनाए रखें। इसके लिए हमें स्वच्छता के संकल्प को याद रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस समय हमारे देश में उत्तराखंड के ‘चार-धाम’ की पवित्र यात्रा चल रही है। ‘चार-धाम’ और खासकर केदारनाथ में हर दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। लोग अपनी चार-धाम यात्रा के सुखद अनुभव के साथ यात्रियों की ओर से फैलाई जा रही गन्दगी पर दुख जता रहे हैं। हम पवित्र यात्रा पर जायें और वहां गन्दगी का ढेर हो ये ठीक नहीं है।

प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि कुछ दिन बाद ही 5 जून को ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ है। पर्यावरण को लेकर हमें अपने आस-पास सकारात्मक अभियान चलाना चाहिए और ये निरंतर करने वाला काम है। आप इस बार सब को साथ जोड़ कर स्वच्छता और वृक्षारोपण के लिए कुछ प्रयास जरूर करें। खुद भी पेड़ लगाइये और दूसरों को भी प्रेरित करिए।

21 जून को ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ के लिए चुनें विशेष स्थान

प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से 21 जून को आठवें ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का आह्वान करते हुए कहा कि वह इसके लिए अपने शहर के विशेष स्थान का चयन करें। इसमें प्राचीन मंदिर और पर्यटन केंद्र, प्रसिद्ध नदी, झील या तालाब का किनारा भी हो सकता है। इस बार के योग दिवस की थीम ‘मानवता के लिए योग’ है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में इस बार ‘अमृत महोत्सव’ को ध्यान में रखते हुए देश के 75 प्रमुख स्थानों पर ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ का आयोजन होगा। इस अवसर पर कई संगठन और देशवासी अपने-अपने स्तर पर अपने-अपने क्षेत्र की खास जगहों पर कुछ न कुछ नवाचार करने की तैयारी कर रहे हैं।

जापान यात्रा और भारतीय संस्कृति से प्रभावित व्यक्तियों का जिक्र

प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी हाल की जापान यात्रा को याद किया जिसमें उन्होंने भारतीय संस्कृति के बारे में भावुक तीन दिलचस्प व्यक्तियों से मुलाकात की। इनमें केंजी योशी, अत्सुशी मात्सुओ और हिरोशी कोइके शामिल हैं। उन्होंने आत्सुशि मात्सुओ और केन्जी योशी के बारे में बताया। दोनों ही टीईएम निर्देशन कंपनी से जुड़े हैं। इस कंपनी का संबंध 1993 में रिलिज हुई रामायण की जापानी एनिमेशन फिल्म से है। यह परियोजना जापान के बहुत ही मशहूर फिल्म निर्देशक युगो साको से जुड़ी हुई थी। करीब 40 साल पहले, 1983 में, उन्हें पहली बार रामायण के बारे में पता चला था। ‘रामायण’ उनके हृदय को छू गयी, जिसके बाद उन्होंने इस पर गहराई से शोध किया। इतना ही नहीं, उन्होंने, जापानी भाषा में रामायण के 10 वर्जन पढ़े और इसे भारतीय एनिमेटर की मदद से फिल्म बनाई। उन्होंने बताया कि अब इस फिल्म को 4के रिजोल्यूशन में तैयार किया जा रहा है।

रेत-समाधि : बधाई लेकिन…?

उन्होंने बताया कि एक जाने-माने आर्ट निर्देशक हिरोशि कोड़के हैं। हिरोशि ने महाभारत परियोजना का निर्देशन किया है। इस परियोजना की शुरुआत कंबोडिया में हुई थी और पिछले 9 सालों से ये निरंतर जारी है। हिरोशि कोड़के हर काम बहुत ही अलग तरीके से करते हैं। वे हर साल एशिया के किसी देश की यात्रा करते हैं और वहां स्थानीय कलाकार और संगीतकार के साथ महाभारत के कुछ हिस्सों को निर्देशित करते हैं।

स्वयं सहायता समूह को सशक्त बनाने पर जोर

प्रधानमंत्री ने स्वयं सहायता समूह को सशक्त बनाने पर जोर देते हुए कहा कि इस समूह के उत्पादों का अधिक से अधिक इस्तेमाल करना चाहिए। इससे आत्मनिर्भर अभियान को गति मिलेगी।

उन्होंने कहा कि स्व से ऊपर उठकर समाज की सेवा का मंत्र हमारे संस्कारों का हिस्सा है। देश में अनगिनत लोग इस मंत्र को अपना जीवन ध्येय बनाये हुए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि हम कर्त्तव्य पथ पर चलते हुए ही समाज को सशक्त कर सकते हैं, देश को सशक्त कर सकते हैं। आजादी के इस ‘अमृत महोत्सव’ में यही हमारा संकल्प होना चाहिए और यही हमारी साधना भी होनी चाहिए और जिसका एक ही मार्ग कर्तव्य है।

इसमें उन्होंने आन्ध्र प्रदेश में मर्कापुरम निवासी राम भूपाल रेड्डी का जिक्र किया। रामभूपाल ने सेवानिवृति के बाद मिलने वाली अपनी सारी कमाई करीब 25 लाख रुपये से अधिक 100 लड़कियों के लिए ‘सुकन्या समृद्धि योजना’ के तहत खाते खुलवा कर उसमें जमा करवा दी।

प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश में आगरा के कचौरा गांव में मीठे पानी की समस्या को दूर करने वाले किसान कुंवर सिंह का भी उल्लेख किया। उन्होंने गांव तक पानी पहुंचाने के लिए 30-32 लाख रुपये खर्च किये।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे देश में कई सारी भाषाएं और लिपियां और बोलियों का समृद्ध खजाना है। अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग पहनावा, खानपान और संस्कृति ये हमारी पहचान है।

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