क्या हो देश का नाम भारत (Bharat), इंडिया या फिर हिंदुस्तान ?

879 0

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) में देश का नाम में इंडिया (India) शब्द को हटाकर भारत करने पर कोर्ट ने याचिकाकर्ता की अपील पर संबंधित मंत्रालय को इस याचिका (PIL) को ज्ञापन की तरह देखने और इस पर विचार करने के निर्देश दिए हैं ।

आज हम भारतीय देश के लिए अंग्रेजी नाम का प्रयोग कर रहे हैं जबकि अंग्रेजी बोलने वालो की संख्या सिर्फ 2% ही है , परिणामतः बाकी बचे लोग पीछे छूट जाते हैं ।

भूगोल के एक निश्चित आयाम की परिभाषा से ही देश बनता हैं, भारत दुनिया का सबसे पुराना देश है, आज लोग जिसे एक देश की परिभाषा में गड़ते है या एक देश मानते हैं ये उससे बिल्कुल अलग हैं ।

आज लोग देशों को बना रहे हैं भाषा, धर्म, जाति तथा नस्ल आदि के आधार पर , मूल रूप से लोगो के समानता से देश बनता हैं, लेकिन हम इस देश को पिछले चार से पांच हजार सालो से भारत के नाम से जानते आ रहे हैं। हमने कभी खुद को एक जैसा होने की वजह से, एक नहीं माना। अगर आप पचास किलोमीटर जाए, तो आपको अलग लोग , अलग पहनावे , भोजन , भाषाएं, और रहन सहन मिलेगा । असमानता में समानता , भारत की सनातन उपलब्धि है।

तो ऐसा क्या है जो इसे एक देश बनाता है ?

जब यूरोपियन यहां आए तो कहने लगे हमने जिस देश के बारे में सुना था उसका वजूद ही नहीं है, क्योकि यहां ऐसा कुछ नहीं है जो इसे बांधे रखता हो । वे इसे देश कैसे कह सकते हैं ।

पर पिछले चार से पांच हजार सालों तक , उपमहाद्वीप तथा उस समय की ज्ञात दुनिया में हर जगह हमारे देश को एक राष्ट्र ही माना जाता था । चाहे कुछ समय तक हमारे देश में दो सौ से अधिक राजनीतिक सत्ताएं थी ।

तो ये एक देश क्यों कहलाता है ? क्युकी ये सिर्फ किसी धर्म , जाति की बात नहीं है क्युकी हमारी राष्ट्रीयता सारे धर्मों के उदय से पहले की है । ये देश तब भी था जब हम इसे हिंदुस्तान कहते थे इसका मतलब ये नही था की ये किसी धर्म विशेष मानने वालो का देश था अर्थात हिंदुओं का निवास स्थान । हिंदुस्तान एक भौगोलिक वर्णन है जिसका मतलब है हिमालय और इंदु सरोवर के बीच की भूमि ।

भारत हमेशा से खोजियों और जिज्ञासुओं की भूमि रहा है। भारत का अर्थ है ,

भा – भाव या अनुभूति

र – राग या सुर

त- ताल या लय ,

जिसका मतलब ऐसी संस्कृति के निर्माण से है जहा हर कोई सही राग, ताल मिला के चल सके जिससे जीवन की सही भाव/अनुभूति हो सके । अतीत के एक महान सम्राट का नाम भी भरत था, लेकिन उनका नाम देश से पड़ा न कि उनसे देश का नाम । जहां हिंदुस्तान एक भूगोल का वर्णन करता है , भारत एक प्राचीन , सनातन संस्कृति का । हमें हमेशा संस्कृति पर जोर देना चाहिए क्युकी संस्कृति का अर्थ है मिलन जो लोगों को आपस में जोड़ती है ।

अगर हम इंडिया शब्द की बात करें इसका कोई अर्थ ही नहीं है , यूनानी लोग जो सिंधु नदी को सही उच्चारित ना कर पाने के कारण इंदु नदी कहने लगे । तत्पश्चात अंग्रेज भारत आए तब भारत को हिंदुस्तान कहा जाता था , और जब अंग्रेजों को भारत की प्राचीनता की जानकारी हुई , अंग्रेजों को यूनानियों द्वारा दिए गए नाम इंडस का पता चला जिसे लैटिन भाषा में इंडिया कहा जाता है तो उन्होंने ने भारत को इंडिया कहना शुरू किया । और एक कारण ये था कि अंग्रेजों को भी हिंदुस्तान के उच्चारण में काफी मुश्किलात होती थी ।

भारत दुनिया की अकेली ऐसी संस्कृति है जिसमें लगभग पांच हजार से अभी तक की परंपरागत जुड़ाव के साक्ष्य मिलते हैं, जैसे शादी शुदा महिलाओं का सिंदूर प्रयोग करना , मूर्ति पूजा जो हड़प्पा कालीन समाज में व्याप्त थे , और आज भी हैं ।

हमें अपने वतन को भारत ही कहना चाहिए क्योंकि एक राष्ट्र की सोच को सबके मन में बसना चाहिए , देश बस सोच है , जब ये सोच आपके मन में जगेगी और दिल में उतरेगी और इसके लिए आपने एक जुनून पैदा होगा , तब ही हम असली देश बन पाएंगे । वरना देश बस कागजों पर होगा , और उसके लिए समर्पण और त्याग की भावना , कभी उस हद तक परवान ना चढ़ सकेगी ।

प्रयोग और खोजियों की भूमि होने के कारण आप खुद इसकी सार्थकता की जांच कर सकते हैं अगले दो मिनट अपने मन में इंडिया इंडिया बोलिए और उसके अगले दो मिनिट भारत भारत , आपको भारत के उच्चारण में एक गंभीरता , सांस्कृतिक , और परंपरागत जुड़ाव महसूस होगा । जैसा की हमने अधिकतर राष्ट्रीय पहचानों को मौर्य कालीन या वैदिक कालीन चिन्हों से जोड़ा है ।

आजादी के समय का एक प्रसंग है जिनमें तिरंगे के बीच में बने अशोक चक्र को लेकर बहस चल रही थी जिसमें ज्यादातर का मानना था कि तिरंगे के बीच में चरखा को जगह मिलनी चाहिए क्योंकि तात्कालिक समय का , आत्मनिर्भरता का प्रतीक था ।

लेकिन जवाहर लाल नेहरू जी ने सुझाव दिया कि चरखा दाई और बाई ओर से देखने से उल्टा प्रतीत होता है , और सुझाव दिया कि हमें अशोक चक्र को इस स्वाधीनता के प्रतीक तिरंगे पर अंकित करना चाहिए जिससे हम अपने देश के सनातन संस्कृति को इसमें शामिल और अशोक और भगवान बुद्ध के अहिंसा के संदेश को देश और दुनिया को दे सकें। क्योंकि भारत ने दुनिया को युद्ध नहीं बुद्ध दिया ।

भारत का उच्चारण करते ही आप खुद को हजारों साल प्राचीन जड़ों से जुड़ा हुआ पाते हैं , जो आपको ऐसी मजबूत नींव प्रदान करते हैं , कि आप अपने सपनो के भारत को गड़ने और ऊंची उड़ान भरने में किसी रुकावट को आत्मविश्वास से पार करने में सक्षम हो सके।

 

Related Post

pm modi

कल्याणी में प्रधानमंत्री मोदी की रैली- कूचबिहार हिंसा दीदी के मास्टरप्लान का हिस्सा

Posted by - April 12, 2021 0
कोलकाता। बंगाल में पांचवें चरण के चुनाव के लिए पीएम मोदी (PM Modi) आज कई इलाकों में चुनावी रैली कर…
TVSN Prasad

जे- फॉर्म कटने के 72 घंटे के अंदर किसानों की पेमेंट सुनिश्चित की जाए : मुख्य सचिव

Posted by - April 20, 2024 0
चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्य सचिव टीवीएसएन प्रसाद (TVSN Prasad) ने उपायुक्तों को निर्देश कि ओलावृष्टि से खराब हुई फसलों का…
GEP

मानव वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए सुनियोजित और प्रभारी नीति बनाएं : मुख्यमंत्री

Posted by - July 19, 2024 0
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (CM Dhami)  ने कहा कि मानव वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए वन विभाग…