उत्तर प्रदेश की बेहतरी के साढ़े चार साल

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सियाराम पांडेय ‘शांत’

 

सरकार किसी भी दल की हो, उसके पास व्यवस्था को जानने और समझने के लिए केवल पांच साल ही होते हैं। यह अच्छी बात है कि उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की योगी आदित्यनाथ सरकार समय-समय पर अपने काम का रिपोर्ट कॉर्ड प्रस्तुत करती रही है। यह और बात है कि विपक्ष उसकी आलोचना करता रहा है। इसबार भी बसपा प्रमुख मायावती और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी के साढ़े चार साल में हुए विकास कार्यों के दावों को झूठा करार दिया है।

अखिलेश यादव ने तो सरकार द्वारा प्रकाशित बुकलेट को अंतरराष्ट्रीय झूठ प्रशिक्षण केंद्र की पाठ्य पुस्तिका करार दिया है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी योगी आदित्यनाथ के संभाषण में पांच झूठ तलाशने की कोशिश की है लेकिन इन सबसे इतर योगी आदित्यनाथ ने 2007 से 2017 तक के विकास कार्यों और 2017 से सितंबर 2021 तक हुए विकास कार्यों की तुलनात्मक रिपोर्ट पेश कर विपक्ष की पेशानियों पर एकबार फिर बल ला दिया है। सच तो यह है कि विपक्ष योगी सरकार के कार्यकाल के एक-एक दिन तो गिन ही रहा है, अपने पराभव के दिन भी गिन रहा है लेकिन योगी सरकार जिस द्रुत गति से काम कर रही है, उसकी आलोचना के लिए भी उसे सटीक शब्द नहीं मिल रहे हैं। अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने आज 16 पेज का 16 आने झूठ प्रकाशित किया है। यह तो उन्हें भी पता है कि थोड़ा बहुत झूठ तो चलता है लेकिन शत-प्रतिशत झूठ नहीं चलता। रफूगर पैबंद नहीं लगाया करते।

19 सितंबर को उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार के कार्यकाल के साढ़े चार साल पूरे हुए हैं तब भी उसने अपने अब तक के काम का ब्यौरा दिया है। साढ़े चार साल का समय बहुत नहीं होता लेकिन अगर उसका सही नियोजन किया जाए तो बहुत कुछ असाधारण किया जा सकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जहां साढ़े चार साल के अपने कार्यकाल में साढ़े चार लाख युवाओं को रोजगार देने का दावा किया है, वहीं यह भी बताया है कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में उत्तर प्रदेश देश में अगर दूसरे स्थान पर है तो 44 योजनाओं में वह अव्वल है। उन्होंने जाति और धर्म का विचार किए बगैर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने ,उनकी 1866 करोड़ की संपत्ति को ध्वस्त और जब्त करने की बात की है। प्रदेश की जनता को वे यह बताना और जताना भी नहीं भूले कि उनसे पहले के मुख्यमंत्री अपने लिए बड़ी-बड़ी हवेली बनाते थे और इस बाबत प्रतिस्पर्धा करते थे, लेकिन हमने अपने कार्यकाल में 42 लाख जरूरतमंदों के लिए आवास बनाए हैं। उन्होंने कहा है कि वर्ष 2007 से 2017 तक दस साल में महज 95 हजार करोड़ रुपए का गन्ना मूल्य का भुगतान किया गया था जबकि बीते 4.5 साल में 1.44 लाख करोड़ रुपए का गन्ना मूल्य का रिकॉर्ड भुगतान हुआ है। 66 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद सीधे किसानों से की गई है। पिछली सरकार में मात्र 6 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद हुई थी, वह भी किसानों से नहीं, आढ़तियों से।

विपक्ष के चुनावी वादे पूरे न करने के आरोपों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने सुस्पष्ट किया है कि भाजपा ने 2017 में जो वादे किए थे, उन सभी को पूरा किया है। योग्यता के आधार पर भर्तियां की गई हैं। सभी नियुक्तियां वर्षों से लंबित थीं, क्योंकि पिछली सरकारों में ईमानदारी का अभाव था। भर्ती निकलती थी तो पूरा खानदान वसूली के लिए निकल पड़ता था। पहले ट्रांसफर पोस्टिंग एक उद्योग बन चुका था। हमने प्रशासनिक स्थिरता दी। सुरक्षा का माहौल बना तो प्रदेश निवेश भी आया। वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश को देश में रुकावट पैदा करने वाला प्रदेश माना जाता था लेकिन आज उत्तर प्रदेश को लेकर लोगों का नजरिया बदला है। किसान कर्जमाफी से लेकर किसान कल्याण की योजना आगे बढ़ी है।

उत्तर प्रदेश में भरपूर जल संसाधन होने के बाद योजनाओं के क्रियान्वयन के अभाव में किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता था, लेकिन आज हालात बदल गए हैं। किसान जल संसाधनों का भरपूर लाभ उठा रहे हैं। पहले चीनी मिलें लगातार बंद होती गईं। किसान आत्महत्या कर रहे थे। हमने उन चीनी मिलों को लगातार चलाया। कोरोना काल में भी वे चलती रहीं। प्रयागराज कुंभ, बनारस में प्रवासी भारतीय सम्मेलन, अयोध्या दीपोत्सव, बरसाना रंगोत्सव का आयोजन कर हमने धार्मिक पर्यटन, भारतीय संस्कृति और सभ्यता को भी बल दिया। एक दर्जन से अधिक सिंचाई परियोजनाएं सिर्फ बुंदेलखंड में पूर्ण हुईं। पिछली सरकारें तो वहां झांकने तक नहीं गईं।

पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे, बलिया लिंक एक्सप्रेस-वे और गंगा एक्सप्रेस-वे बन रहे हैं। जेवर, कुशीनगर और अयोध्या में अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट का चल रहा निर्माण कार्य अपने अंतिम चरण में है।

सीएए के विरोध प्रदर्शन में सरकारी संपत्तियों को क्षति पहुंचाने वालों से वसूली,बेहतर पुलिसिंग के लिए लखनऊ, नोएडा, कानपुर नगर एवं वाराणसी में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू की गई। जबरन धर्म परिवर्तन पर रोक के लिए उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक की मंजूरी दी गई।

महिलाओं की सुरक्षा के लिए सेफ सिटी परियोजना एंटी रोमियो स्क्वायड का गठन किया गया। पुलिस अधीक्षक कार्यालयों में एफआईआई काउंटर खोले गए। 214 नए थाने बनाए गए। लखनऊ में पुलिस फॉरेंसिक यूनिवर्सिटी का निर्माण शुरू हुआ। महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन एवं एसडीआरएफ और स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स गठित की गई। हर जनपद में साइबर सेल एवं जोन में साइबर पुलिस थाने की स्थापना हुई। आतंकी गतिविधियों पर रोक के लिए स्पेशल पुलिस ऑपरेशन टीम का गठन किया गया। एक लाख 43 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों की भर्ती एवं 76 हजार अराजपत्रित पुलिसकर्मियों की पदोन्नति की गई।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मानें तो प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उत्तर प्रदेश में 42 लाख आवास बने। 2007 से 2016 तक इंदिरा आवास योजना के तहत मायावती सरकार में 16 लाख और अखिलेश सरकार में 13 लाख और योगी सरकार में 42 लाख से अधिक आवासों का निर्माण हुआ। मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में एक लाख 8 हजार 495 आवासों का निर्माण हुआ। मुसहर, वनटांगिया वर्ग व कुष्ठ रोग से प्रभावित परिवारों को 50,602 आवास दिए गए।

वनटांगिया गांवों को राजस्व गांव का दर्जा पहली बार दिया गया। उज्ज्वला योजना के तहत अखिलेश सरकार ने 55.31 लाख और योगी सरकार ने एक करोड़ 67 लाख एलपीजी कनेक्शन दिए। योगी सरकार ने 86 लाख किसानों के 36 हजार करोड़ के ऋण माफ किया। गन्ना किसानों को 1.44 लाख करोड़ से अधिक गन्ना मूल्य का भुगतान किया। 476 लाख मीट्रिक टन चीनी का रिकॉर्ड उत्पादन किया। खांडसारी इकाइयों को नि:शुल्क लाइसेंस दिया। एमएसपी में दोगुना तक वृद्धि की।435 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न की सरकारी खरीद की। किसानों को 79 हजार करोड़ का भुगतान किया।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में दो करोड़ 53 लाख 98 हजार किसानों को 37,388 करोड़ हस्तांतरित किए। 2399 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न उत्पादन किया। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों को 2376 करोड़ की क्षतिपूर्ति की। किसानों को 4 लाख 72 हजार करोड़ फसली ऋण का भुगतान किया। 45 कृषि उत्पादों को मंडी शुल्क से मुक्त किया। मंडी शुल्क एक प्रतिशत कम किया। 220 मंडियों का आधुनिकीकरण और 291 ई नाम मंडी की स्थापना की।

बालिकाओं को स्नातक स्तर तक निशुल्क शिक्षा, एक करोड़ 67 लाख मातृशक्तियों को उज्ज्वला योजना में मुफ्त गैस कनेक्शन, सीएम कन्या सुमंगला योजना से 9 लाख 36 हजार बेटियों को लाभ, मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में 1.52 लाख से अधिक निर्धन कन्याओं का विवाह, पीएम मातृ वंदना योजना में 40 लाख माताएं लाभान्वित हुईं। प्रदेश के सभी 1535 थानों में पहली बार महिला हेल्प डेस्क बनी। महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाने के लिए 218 नए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित हुए। 81 मजिस्ट्रेट स्तरीय न्यायालय व 81 अपर सत्र की स्थापना हुई। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना में एक करोड़ 80 लाख बच्चियों को लाभ मिला। करीब 56 हजार महिलाएं बैंकिंग सखी के रूप में कार्य कर रही हैं।

प्रदेश में फिलहाल 5 इंटरनेशनल एयरपोर्ट, 8 एयरपोर्ट चल रहे हैं। 13 अन्य एयरपोर्ट एवं 7 हवाईपट्टी का विकास हुआ है। 341 किमी लंबे पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का निर्माण पूरा हो रहा है। 297 किमी लंबा बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे का निर्माण कार्य प्रगति पर है। 594 किमी लंबे गंगा एक्सप्रेस वे लिए हुआ भूमि अधिग्रहण हो चुका है।91 किमी लंबे गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस वे का कार्य प्रगति पर है। बलिया लिंक एक्सप्रेस वे को मंजूरी मिल चुकी है। 15,286 किमी नई सड़कों का व 925 छोटे-बड़े पुलों का निर्माण हो चुका है। 124 लांग ब्रिज, 54 रेल फ्लाइओवर का अप्रोच मार्ग पूरा हुआ है जबकि 355 छोटे पुलों का निर्माण प्रगति पर है।

कुल मिलाकर देखा जाए तो योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश के विकास पर दिन-रात एक किए हैं। मंत्रिमंडल की इतनी बैठकें किसी भी सरकार में नहीं हुईं। उत्तर प्रदेश के एक-एक जिलों का मुख्यमंत्री कई-कई बार दौरा कर चुके हैं। जिस तरह उत्तर प्रदेश आत्मनिर्भरता और श्रेष्ठ प्रदेश बनने की ओर आगे बढ़ रहा है, उसमें राजनीतिक आलोचनाओं की, वह भी बिना किसी ठोस आधार के वैसे भी कोई जगह नहीं बचती। उम्मीद है कि योगी आदित्यनाथ सरकार के शेष 6 माह भी प्रदेश को अग्रणी बनाने में परम सार्थक और सहयोगी सिद्ध होंगे।

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