बेटे के 18 साल के होने पर भी पिता को उठाना पड़ेगा पढ़ाई का खर्च- दिल्ली हाईकोर्ट

399 0

यदि बेटे की उम्र 18 साल हो जाती है, तब भी पिता का उसके प्रति दायित्व खत्म नहीं होता। बेटे के बालिग होने के बाद उसकी एजुकेशन और अन्य तमाम खर्चे अकेले मां पर ही नहीं डाले जा सकते। पिता को भी उसकी जिम्मेदारियां अदा करनी चाहिए। दिल्ली हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए यह बात कही। इसके साथ ही कोर्ट ने लड़के के पिता को हर महीने उसकी मां को 15,000 रुपये मासिक खर्च देने को कहा है, जिससे उसने तलाक ले लिया है। अदालत ने कहा है कि लड़के के ग्रैजुएशन पूरी करने तक या फिर उसके कमाई शुरू करने तक पिता को यह भत्ता देना होगा।

अदालत ने कहा कि पिता इस बात से आंखें बंद नहीं कर सकता कि अब लिविंग कॉस्ट बढ़ती जा रही है।ऐसे में बेटे की पढ़ाई और खुद के खर्च का जिम्मा अकेले मां पर ही डालना गलत होगा। इससे पहले 2018 में ट्रायल कोर्ट ने महिला की अर्जी को खारिज कर दिया था और बेटे की पढ़ाई के लिए पिता की ओर से खर्च दिए जाने की बात से इनकार किया था। हालांकि अदालत ने नाबालिग बेटी के लिए पिता को खर्च देने का आदेश दिया था। हाई कोर्ट के जस्टिस सुब्रमण्यन प्रसाद ने कहा कि लड़के के बालिग होने पर मां को उसकी जिम्मेदारी संभालनी चाहिए, लेकिन उसके पढ़ाई समेत अन्य तमाम खर्चों के लिए आय नहीं है। ऐसे में पिता को अपनी आय से लड़के के कमाने योग्य होने तक या फिर ग्रैजुएशन कंप्लीट करने तक जरूरी खर्च देना चाहिए।

बता दें कि कपल ने नवंबर, 1997 में शादी की थी और दोनों के दो बच्चे हुए। इसके बाद नवंबर 2011 में दोनों अलग हो गए थे। अब बेटे की उम्र 20 साल हो गई है, जबकि बेटी 18 साल की है। फैमिली कोर्ट के आदेश के मुताबिक बेटा तब तक पिता से मेंटनेंस का हकदार है, जब तक वह 18 साल का नहीं हो जाता। इसके अलावा बेटी तब तक हकदार है, जब तक उसे कोई रोजगार न मिल जाए या फिर उसकी शादी न हो जाए। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि दोनों बच्चे अपनी मां के साथ रहते हैं। ऐसे में मेंटनेंस देने का यह मकसद है कि उन्हें खाने-पीने और जरूरी खर्चों की किल्लत न हो।

जज ने कहा कि अदालत इस बात को लेकर आंखें बंद नहीं कर सकती कि कोई लड़का 18 साल की उम्र में ही अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो सकता। इतनी उम्र में वह 12वीं ही पास हो पाता है और फिर उसका खर्च मां को ही वहन करना होगा। इसलिए हम यह नहीं कह सकते कि 18 साल की उम्र पूरी कर लेने के बाद बेटे के प्रति पिता का दायित्व समाप्त हो जाता है। इस उम्र के बाद बेटे की पढ़ाई और अन्य खर्चों का बोझ अकेले मां पर ही नहीं डाला जा सकता।

Divyansh Singh

मिट्टी का तन, मस्ती का मन; छड़ भर जीवन, मेरा परिचय।

Related Post

राहुल गांधी

राहुल गांधी बोले- ‘यस नहीं, नो बैंक’, मोदी के विचारों ने अर्थव्यवस्था को किया चौपट

Posted by - March 6, 2020 0
नई दिल्ली। वित्तीय संकट से जूझ रहे Yes Bank पर भारतीय रिजर्व बैंक ने पैसे निकालने की ऊपरी सीमा निर्धारित…
Nitin Gadkari

गडकरी ने माना देश में है ऑक्सीजन की कमी, बोले- संकट गहरा है, डॉक्टर-राजनेता संवेदनशील होकर करें मदद

Posted by - April 27, 2021 0
ऩई दिल्ली। कोरोना संक्रमण के चलते देश इस वक्त मुश्किल हालात से गुजर रहा है। रोजाना कोरोना के आ रहे…