yoga

बदल रहा है मौसम तो करें ये योगासन, बीमारियों से रहेंगे दूर

1039 0

नई दिल्ली। बदलते मौसम में बीमारियों का खतरा रहता है। ऐसे में योगासन (yoga) करने से शरीर स्‍वस्‍थ रहता है। इम्‍यून सिस्‍टम मजबूत बना रहता है और कई अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍य लाभ मिलते हैं।

इसलिए योग को अपनी दिनचर्या का हिस्‍सा बना लें, ताकि आगे चल कर किसी तरह की शारीरिक समस्‍या का सामना न करना पड़े। ताकि आप सर्वाइकल पेन, कमर दर्द जैसी समस्‍याओं से निजात पा सकें। इसके अलावा योग करने से तनाव से भी मुक्ति मिलती है, तो आइए योग करें और स्‍वस्‍थ जीवन की ओर एक कदम और बढ़ाएं।

मार्जरी आसन

मार्जरी आसन को अंग्रेजी में कैट पोज के नाम से बुलाया जाता है। इसे कैट खिंचाव मुद्रा के रूप में भी जाना जाता है। इस आसन को करने से रीढ़ और पीठ की मांसपेशियों का लचीलापन बना रहता है। मार्जरी आसन एक आगे की ओर झुकने और पीछे मुड़ने वाला योग आसन है। कैट वॉक दुनिया भर में प्रसिद्ध है, लेकिन हम योग आसन वर्ग में कैट पोज के बारे में चर्चा करते हैं। यह आसन आपके शरीर के लिए अनके प्रकार से लाभदायक है। यह आसन रीढ़ की हड्डी को एक अच्छा खिंचाव देता है। इसके साथ यह पीठ दर्द और गर्दन दर्द में राहत दिलाता है।

राजकुमार राव की फिल्म ‘छलांग’ का ट्रेलर रिलीज, ट्रेलर ने मचाई धूम

मार्जरी आसन के फायदे

  1. रीढ़ की हड्डी को अधिक लचीला बनने में मदद करता है।
  2. पाचन क्रिया में सुधार करने में मदद करती है।
  3. रक्त परिसंचरण में सुधार करती है।
  4. पेट से अनावश्यक वसा को कम करने में मदद करता है।
  5. पेट को टोन करने में मदद करता है।
  6. तनाव को दूर करने में बहुत मदद करता है।
  7. मन को शांत करके मानसिक शांति प्रदान करता है।
  8. कंधे और कलाई दोनों को मजबूत बनाता है।

बटरफ्लाई आसन

बटरफ्लाई आसन को तितली आसन भी कहते हैं। महिलाओं के लिए ये आसन विशेष रूप से लाभकारी है। बटरफ्लाई आसन करने के लिए पैरों को सामने की ओर फैलाते हुए बैठ जाएं,रीढ़ की हड्डी सीधी रखें। घुटनो को मोड़ें और दोनों पैरों को श्रोणि की ओर लाएं। दोनों हाथों से अपने दोनों पांव को कस कर पकड़ लें। सहारे के लिए अपने हाथों को पांव के नीचे रख सकते हैं। एड़ी को जननांगों के जितना करीब हो सके लाने का प्रयास करें। लंबी,गहरी सांस लें, सांस छोड़ते हुए घटनों एवं जांघों को जमीन की तरफ दबाव डालें। तितली के पंखों की तरह दोनों पैरों को ऊपर नीचे हिलाना शुरू करें। धीरे धीरे तेज करें। सांसें लें और सांसे छोड़ें। शुरुआत में इसे जितना हो सके उतना ही करें। धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाएं।

सर्वांग पुष्टि आसन

सर्वांग पुष्टि आसन के लिए मैट पर दोनों पैर फैलाकर सीधे खड़े हो जाएं। मुट्ठी इस तरह बंद करें कि अंगूठा दिखाई न दे। अब दोनों हाथों को नीचे झुकाकर बाएं टखने के पास बायां हाथ नीचे और दायां हाथ कलाई के ऊपर रखें। सांस भरते हुए धीरे-धीरे दोनों हाथों से ऊपर की ओर बाएं कन्धे के बाजू से सिर तक ले जाएं और दाएं टखने की तरफ सांस छोड़े। दाहिना हाथ नीचे और बायां हाथ ऊपर रखें। दोबारा सांस लेकर दोनों हाथों के नीचे से ऊपर दाएं कन्धे तक लाते हुए सिर के ऊपर तक ले जाएं। अब बाईं ओर मुड़ते हुए दोनों हाथों को बाएं कन्धे से नीचे की ओर बाएं टखने तक लाएं। सांस छोड़े, हाथ को बदल-बदलकर बायां नीचे और दाहिना ऊपर रखें। इसे दो बार दोहराएं। हर अंग की चर्बी घटाने के लिए करें ‘सर्वांग पुष्टि आसन’ बेहतरीन है, लेकिन जो लोग लोअर बैक पेन की समस्या से परेशान हैं वे इस आसन को ना करें।

सर्वांग पुष्टि आसन के फायदे

  • फैट को कम करता है।
  • कमर को लचीला बनाता है।
  • मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।
  • मोटापा कम करता है।

शवासन

मैट पर पीठ के बल सीधे लेट जाएं और आंखें मूंद लीजिए। पैरों को आराम की मुद्रा में हल्का खोल कर रखें। पैर के तलवे और उंगलियां ऊपर की तरफ होनी चाहिए। हाथों को बगल में रखकर हथेलियों को ऊपर की तरफ खोलकर रखें। पैर से लेकर शरीर के हर भाग पर ध्यान केंद्रित करते हुए धीरे-धीरे सांस अन्दर बाहर करें। धीरे धीरे इसे कम करें। जब शरीर में राहत महसूस हो तो आंखों को बंद करके ही थोड़ी देर उसी मुद्रा में आराम करें।

Loading...
loading...

Related Post

Krishna Janmashtami

कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी 11 और 12 अगस्त, जानिए कितने मिनट का है शुभ मुहूर्त

Posted by - August 9, 2020 0
पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास में अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। पंचांग…