देहरादून। सरकारी भूमि पर हो रहे अवैध अतिक्रमण (Encroachment ) के मामलों को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। प्रशासन की ओर से अतिक्रमण (Encroachment ) हटाने की कार्रवाई करते हुए अवैध कब्जों को ध्वस्त किया गया। यह कार्रवाई जिलाधिकारी सोनिका के निर्देशों पर संयुक्त रूप से राजस्व एवं वन विभाग द्वारा की गई।
सरकारी भूमि को अतिक्रमण (Encroachment ) मुक्त कराने का अभियान
जिले में सरकारी भूमि पर किए जा रहे अतिक्रमण (Encroachment ) , अवैध प्लॉटिंग तथा भूमि पर कब्जों के खिलाफ जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए निरंतर एवं प्रभावी प्रवर्तन अभियान शुरू कर दिया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि सरकारी एवं वन भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराया जा सके।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा, निर्माण अथवा उपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अतिक्रमण हटाने के लिए नियमित ड्राइव चलाई जा रही है, जो आगे भी निरंतर जारी रहेगी। अतिक्रमण पाए जाने पर यदि किसी अधिकारी/कर्मचारी अथवा किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका पाई जाती है, तो उनके विरुद्ध कड़ी विभागीय एवं विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
अवैध प्लॉटिंग पर कड़ा शिकंजा-
बिना स्वीकृत लेआउट एवं नियमों के की जा रही अवैध प्लॉटिंग के विरुद्ध भी जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए अवैध प्लॉटिंग पर रोक लगाने के लिए सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है। स्पष्ट किया गया है कि नियमों के विरुद्ध की गई प्लॉटिंग का ध्वस्तीकरण के साथ ही दोषियों पर नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
वन भूमि से अतिक्रमण (Encroachment ) हटाने पर विशेष जोर-
वन विभाग की शिकायत के चलते वन भूमि पर हुए अतिक्रमण के मामलों को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने ध्वस्तीकरण ड्राइव प्रारंभ की है। यह अभियान निरंतर गति में रहेगा और वन भूमि तथा विभागीय सरकारी सम्पत्तियों को अतिक्रमणमुक्त कराने के लिए सभी आवश्यक प्रशासनिक एवं विधिक कदम उठाए जाएंगे।
राजस्व अभिलेखों में दर्ज भूमि का विवरण-
प्रशासन द्वारा स्पष्ट किया गया कि संबंधित भूमि राजस्व अभिलेखों में खाता-खतौनी संख्या 254, खसरा संख्या 949(क), कुल रकबा 1.3700 हेक्टेयर के रूप में दर्ज है, जो कि वन विभाग के नाम अंकित एवं संरक्षित भूमि है। उक्त भूमि पर किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य, अवैध अध्यास अथवा उपयोग पूर्णतः प्रतिबंधित है।
अवैध निर्माण और रास्ते ध्वस्त-
इसके बावजूद कुछ व्यक्तियों द्वारा नियमों की अवहेलना करते हुए भूमि को खुद-बुद कर अवैध निर्माण व रास्ता निर्माण किया गया, जिसे प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से ध्वस्त कर दिया। इसके अतिरिक्त फोगे, घंघोड़ा, मौजा विष्ट गांव, परगना पछवादून, तहसील व जिला देहरादून में स्थित भूमि खसरा संख्या 986, रकबा 0.1700 हेक्टेयर, जो कि जंगल-झाड़ी के खाते में दर्ज है, तथा भूमि खसरा संख्या 949(क), रकबा 0.3700 हेक्टेयर, जो कि वन विभाग के खाते में अंकित है।
विभागों के बीच समन्वय से कार्रवाई-
अभियान के दौरान राजस्व, वन, नगर निगम/नगर पालिका एवं पुलिस विभाग के बीच समन्वय स्थापित कर प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। जिला प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे अवैध कब्जों एवं प्लॉटिंग से संबंधित सूचनाएं प्रशासन को उपलब्ध कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
जिलाधिकारी ने कहा कि जानकारी में आया कि कुछ व्यक्तियों द्वारा इन निजी भूमियों पर अवैध प्लॉटिंग कर विक्रय की तैयारी की जा रही थी। जांच में यह भी सामने आया कि प्लॉटिंग की जा रही भूमि तक किसी भी दिशा से अवैध आवागमन मार्ग उपलब्ध नहीं था। इसके बाद संबंधित व्यक्तियों द्वारा वन विभाग की भूमि खसरा संख्या 949(क) पर अवैध रूप से कब्जा कर पक्के रास्ते का निर्माण कर दिया गया, जो कि स्पष्ट रूप से कानून का उल्लंघन है।
कानून उल्लंघन पर सख्त चेतावनी-
जिला प्रशासन द्वारा इस अवैध रास्ते को भी ध्वस्त कर वन भूमि को मुक्त कराया गया। जिला प्रशासन ने दो टूक कहा है कि कानून का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई होगी। सार्वजनिक हित, पर्यावरण संरक्षण एवं शासकीय संपत्तियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस दिशा में किसी भी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वन विभाग, जंगल-झाड़ी एवं अन्य सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण, अवैध प्लॉटिंग या निर्माण कार्य स्वीकार्य नहीं होगा। यदि कोई व्यक्ति ऐसे प्रयास करता पाया जाता है, तो संबंधित के विरुद्ध कठोर दंडात्मक एवं विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। साथ ही प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि भूमि क्रय-विक्रय से पूर्व राजस्व अभिलेखों की विधिवत जांच अवश्य करें तथा किसी भी अवैध गतिविधि की सूचना तत्काल प्रशासन को दें, ताकि सरकारी भूमि एवं वन क्षेत्र का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

