Geetanjali Shri Ret Samadhi

रेत-समाधि : बधाई लेकिन…?

594 0

गीताजंलि श्री के उपन्यास ‘रेत-समाधि’ के अंग्रेजी अनुवाद ‘टूम्ब ऑफ सेन्ड’ (Tomb of Sand) को बुकर सम्मान मिलने पर हिंदी जगत का गदगद होना स्वाभाविक है। मेरी भी बधाई। मूल अंग्रेजी में लिखे गए कुछ भारतीय उपन्यासों को पहले भी यह सम्मान मिला है। लेकिन किसी भी भारतीय भाषा के उपन्यास को मिलनेवाला यह पहला सम्मान है। लगभग 50 लाख रुपये की यह सम्मान राशि उसकी लेखिका और अनुवादिका डेजी राॅकवेल के बीच आधी-आधी बटेगी। इतनी बड़ी राशिवाला कोई सम्मान भारत में तो नहीं है। इसलिए भी इसका महत्व काफी है।

वैसे हिंदी तथा अन्य भारतीय भाषाओं में इतने उत्कृष्ट उपन्यास लिखे जाते रहे हैं कि वे दुनिया की किसी भी भाषा की कृतियों से कम नहीं हैं लेकिन उनका अनुवाद अपनी भाषाओं में ही नहीं होता तो विदेशी भाषाओं में कैसे होगा? भारतीय भाषाओं में कुल मिलाकर जितनी रचनाएं प्रकाशित होती हैं, उतनी दुनिया के किसी भी देश की भाषा में नहीं होतीं। इसीलिए पहले तो भारत में एक राष्ट्रीय अनुवाद अकादमी स्थापित की जानी चाहिए, जिसका काम भारतीय भाषाओं के श्रेष्ठ ग्रंथों का सिर्फ आपसी अनुवाद प्रकाशित करना हो। इस तरह के कुछ उल्लेखनीय अनुवाद-कार्य साहित्य अकादमी, ज्ञानपीठ और कुछ प्रादेशिक संस्थाएं करती जरूर हैं। उस अकादमी का दूसरा बड़ा काम विदेशी भाषाओं की श्रेष्ठ कृतियों को भारतीय भाषाओं में और भारतीय भाषाओं की रचनाओं का विदेशी भाषाओं में अनुवाद करना हो।

राष्‍ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को दिया जा रहा निशुल्‍क प्रशिक्षण

यह कार्य भारत की सांस्कृतिक एकता को सुदृढ़ बनाने में सहायक तो होगा ही, विश्व भर की संस्कृतियों से भारत का परिचय बढ़ाने में भी यह अपनी भूमिका अदा करेगा। अभी तो हम सिर्फ अंग्रेजी से हिंदी और हिंदी से अंग्रेजी में अनुवाद पर सीमित हैं, जो कि गलत नहीं है लेकिन यह हमारी गुलाम मनोवृत्ति का प्रतिफल है। आज भी हम भारतीयों को पता ही नहीं है कि रूस, चीन, फ्रांस, जापान, ईरान, अरब देशों और लातीनी अमेरिका में साहित्यिक और बौद्धिक क्षेत्रों में कौन-कौन से नए आयाम खुल रहे हैं।

अंग्रेजी की गुलामी का यह दुष्परिणाम तो है ही, इसके अलावा यह भी है कि अंग्रेजी में छपे साधारण लेखों और पुस्तकों को हम जरूरत से ज्यादा महत्व दे देते हैं। हमारे लिए बुकर सम्मान और नोबेल प्राइज हमारे भारत रत्न और ज्ञानपीठ पुरस्कार से भी अधिक सम्मानित और चर्चित हो जाते हैं। गीताजंलि का उपन्यास ‘रेत-समाधि’ भारत-पाकिस्तान विभाजन की विभीषिका और उससे जुड़ी एक हिंदू और मुसलमान की अमर प्रेम-कथा पर केंद्रित है।

वह भारत के अत्यंत प्रतिष्ठित प्रकाशन गृह राजकमल ने छापा है तो वह उत्कृष्ट कोटि का तो होगा ही लेकिन सारे देश का ध्यान उस पर अब इसलिए जाएगा कि उसे हमारे पूर्व स्वामियों और पूर्व गुरुजन (अंग्रेजों) ने मान्यता दी है। भारत अपनी इस बौद्धिक दासता से मुक्त हो जाए तो उसे पता चलेगा कि उसने जैसे दार्शनिक, विचारक, राजनीतिक चिंतक, साहित्यकार और पत्रकार पैदा किए हैं, वैसे दुनिया के अन्य देशों में मिलने दुर्लभ हैं।

-डॉ. वेदप्रताप वैदिक

Related Post

लोकसभा की कार्यवाही लगातार बाधित होने पर बरसे स्‍पीकर, बोले- ये नारेबाजी की प्रतियोगिता नहीं

Posted by - July 27, 2021 0
संसद के मॉनसून सत्र के दौरान पेगासस मुद्दे पर विपक्षी दलों का हंगामा लोकसभा और राज्यसभा में मंगलवार को भी…
CM Dhami

मुख्यमंत्री ने बहुप्रतीक्षित जमरानी बांध परियोजना का किया लोकार्पण

Posted by - October 15, 2024 0
हल्द्वानी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (CM Dhami) ने मंगलवार को बहुप्रतीक्षित जमरानी बांध परियोजना का लोकार्पण करने के साथ 17218.57…
CM Dhami released the book "New Political History of Uttarakhand State"

AI कितना भी उन्नत हो जाए, किताबों का कोई विकल्प नहीं: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

Posted by - November 22, 2025 0
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (CM Dhami) ने आज मुख्यमंत्री आवास में वरिष्ठ पत्रकार एवं प्रतिष्ठित लेखक जय सिंह रावत द्वारा…
CM Dhami

सीएम धामी का भ्रष्टाचार पर बड़ा एक्शन, अवकाश के दिन सचिवालय खुलवाकर जारी किये जांच के आदेश

Posted by - June 23, 2024 0
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (CM Dhami) ने भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे चीफ टाउन प्लानर को हटाते हुए जांच…
आगरा में कोविड-19 से निपटने के लिए कार्यों की समीक्षा

कोरोना से बचाव के लिए नगरीय निकायों में चलेगा विशेष अभियान : आशुतोष टंडन

Posted by - March 15, 2020 0
लखनऊ। कोरोना वायरस के नियंत्रण व संक्रमण से बचाव हेतु सभी नगरीय निकायों में विशेष अभियान चलाया जाएगा। यह निर्देश…