Chandrashekhar Upadhyay

अपनी शक्ति को पहचानें और उसका आह्वान करें : चंद्रशेखर उपाध्याय

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भाजपा से इस्तीफा देने वाले वरिष्ठ नेताओं ने शनिवार को हल्द्वानी से सारथी नामक  प्रदेश-स्तरीय सामाजिक-आन्दोलन आरंभ किया। ‘हिन्दी से न्याय ‘ इस देशव्यापी अभियान के नेतृत्व-पुरुष न्यायविद चन्द्रशेखर पण्डित भुवनेश्वर दयाल उपाध्याय (Chandrashekhar Upadhyay) ने  दीप प्रज्ज्वलन कर  इस आंदोलन की शुरुआत की।

श्री चन्द्रशेखर  (Chandrashekhar Upadhyay) उत्तराखंड के पूर्व  मुख्यमंत्री हरीश रावत के सलाहकार हैं। ‘सारथी ‘ (Sarthi) आंदोलन का नाम  तीन ‘ई ‘पर केंद्रित  है। पर्यावरण शिक्षा,  रोजगार और वातावरण।  इस अवसर पर आन्दोलन का ‘एप’  लांच किया है।

इस अवसर पर ‘हिन्दी से न्याय ‘ इस देशव्यापी अभियान के नेतृत्व-पुरुष न्यायविद चन्द्रशेखर पण्डित भुवनेश्वर दयाल उपाध्याय ने  कहा कि यहां बड़ी संख्या में नौजवान मौजूद है नवीन जी की, ज्ञानेंद्र जी से प्रेरणा लेकर कविता का मार्ग चुनें,  दुखी दिनों में न लतीफा सुनें, सुनाएं  और न ही जहर गटकें,  अपनी शक्ति को पहचानें, उसका आह्वान करें।  यह गिर्दा की धरती है।

कुशासन के खिलाफ शासकीय अराजकता, भ्रष्टाचार, महंगाई और  सामाजिक विषमता के खिलाफ गिर्दा ने ही देश को कौसानी से ललकारा था अब तख्त उखाड़े जाएंगे और ताज उछाले जाएंगे।

उन्होंने कहा कि यह गौरा पंत शिवानी की धरती है, यह सुमित्रानंदन पंत की भूमि है,  रामसिंह  की धरती है जिन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज के गीत ‘कदम कदम मिलाए जा, खुशी के गीत गाए जा’ की धुन बजाई थी । हम सुंदरलाल बहुगुणा को कैसे भूल सकते हैं , वह वह हर पेड़ को अपनी संतान मानते थे ।

वे उनसे ही मिलते हैं बतियाते हैं, जिनका विवेक, मन -बुद्धि,  संस्कार समय की उम्र में जंग खाकर संज्ञाशून्य हो गया है। जो उनकी हां में हां मिलाते हुए चले । शेष लोग उनके लिए फालतू होते हैं , उससे वह कभी सरोकार नहीं रखा करते।

श्री उपाध्याय ने कहा कि वे राजवंशों और शब्दवंशीयों  का अंतर भूल जाते हैं और अपने अंत की शुरुआत का ऐलान कर बैठते हैं। राजवंशी राजा दशरथ थे, जिन्होंने एक रानी की अन्नपूर्णा अन्याय पूर्ण अमर्यादित अभिलेख पूर्ण राजनीतिक अराजक इच्छा के समक्ष समर्पण करते हुए।

राज सिंहासन पर आरूढ़ होने जा रहे अपने ज्येष्ठ राजकुमार को 14 वर्षों तक वन  में घूमने को विवश कर दिया था।  शब्द वंशी बाबा तुलसी थे। काशी के गंगा घाट पर बैठे उस गरीब परंतु विद्वान ब्राह्मण ने उन्हीं वनवासी राम को एक-एक  हिंदू घर में प्रतिष्ठित कर दिया।

हर घाट काशी है। हर घाट पर तुलसी मिल जाएंगे और किसी वनवासी को प्रतिष्ठित कर देंगे। सारथी आंदोलन से आज  विश्वविख्यात कलाविद्  एवं कला मर्मज्ञ पी .सी.उपाध्याय भी जुड़े। इस  आन्दोलन के योजनाकार हैं नवीन पन्त  एवं ज्ञानेन्द्र जोशी। अभी हाल ही में दोनों ने भाजपा से इस्तीफा  दिया है।

वरिष्ठ समाजसेविका तथा जिला-पंचायत अध्यक्ष रहीं दलित-नेत्री सुमित्रा प्रसाद बनीं अभियान की संस्थापक-अध्यक्षा बनीं। भाजपा महिला मोर्चा की वरिष्ठ नेत्रियां रहीं दीप्ति चुफाल ,प्रेमलता पाठक संग बड़ी संख्या में महिलाओं ने हिंन्दी से न्याय अभियान का समर्थन किया। ये सभी भाजपा से इस्तीफा दे चुकी हैं।

शिक्षकों पर बाजारवाद से लड़ने की नई चुनौती: शिक्षक दिवस विशेष

भाजपा युवा-मोर्चा के दिशान्त टण्डन समेत बड़ी संख्या में युवा आन्दोलन को गति देंगे।  उमेश सैनी,महेश जोशी, नन्द लाल आर्य को मिली महत्वपूर्ण जिम्मेदारी  दी गई है।  सभी भाजपा से इस्तीफा  दे चुके हैं।

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