एक्ट्रेस कंगना रनौत बॉलीवुड में नेपोटिज्म और इनसाइडर्स-आउटसाइडर्स की बहस पर आगे बढ़कर अपना पक्ष रखा और करण जौहर सहित कई बड़े फिल्ममेकर्स को फिल्म माफिया बताया।
करण जोहर पे शायरी अर्ज़ है।
हमें नैशनलिज़म की दुकान चलानी है मगर देश भक्ति नहीं दिखानी है।पाकिस्तान से वार वाली फ़िल्म बहुत पैसा कमाती है, हम भी बनायेंगे मगर उसका विलेन भी हिंदुस्तानी है।अब थर्ड जेंडर भी आर्मी में आ गया है मगर करण जोहर तू कब समझेगा एक सेनानी सिर्फ़ सेनानी है😁🙏— Kangana Ranaut (@KanganaTeam) August 15, 2020
अब उन्होंने करण जौहर पर एक कविता लिखी है और उनकी प्रोडक्शन कंपनी में बनी ‘गुंजन सक्सेनाः द कारगिल’ गर्ल पर तंज कसा है। फिल्म को लेकर जान्हवी कपूर की तारीफें हो रही हैं, वहीं, भारतीय वायु सेना की छवि को खराब करने के मामले में फिल्म विवादों में घिर गई है।
कंगना रनैत टीम ने ट्विटर अकाउंट पर करण जौहर पर कविता लिखी,”करण जोहर पे शायरी अर्ज़ है। हमें नैशनलिज़म की दुकान चलानी है मगर देशभक्ति नहीं दिखानी है। पाकिस्तान से वॉर वाली फ़िल्म बहुत पैसा कमाती है, हम भी बनायेंगे मगर उसका विलेन भी हिंदुस्तानी है। अब थर्ड जेंडर भी आर्मी में आ गया है मगर करण जौहर तू कब समझेगा एक सेनानी सिर्फ़ सेनानी है।”
Also what is with reluctant desh bhakti, many times Gunjan says in the film’ I don’t love my nation I just want to fly the plane’there was no arc to show she fell in love with the country n how she understood the real meaning of uniform!! All she says,”papa won’t let you down.” https://t.co/rMJOUYFXho
— Kangana Ranaut (@KanganaTeam) August 15, 2020
कंगना रनौत टीम ने गुंजन सक्सेनाः द कारगिल गर्ल की भी आलोचना की है। टीम ने एक ट्वीट में कहा,”फिल्म में फर्जी देशभक्ति दिखाई गई है। फिल्म में गुंजन कई बार कहती है,’मैं अपने देश से प्रेम नहीं करती, मैं सिर्फ प्लेन उड़ाना चाहती हूं। इसमें कहीं पर भी देश के प्रति प्यार नहीं दिखता और वह यूनीफॉर्म का कितना मतलब समझती हैं।”
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वहीं एक और ट्वीट में कंगना रनौत टीम ने लिखा, “गुंजन संक्सेना फिल्म में एक छोटे से पहलू पर गौर किया जाए जिसमें एक सैनिक के जीवन की बड़ी तस्वीर और सार गायब है। इसमें गुंजन सक्सेना के विरोधियों को सही साबित किया गया है जो कहते हैं कि हम यहां भारत माता की रक्षा के लिए हैं, लेकिन आप यहां समान अवसर के लिए आई हैं। फिल्म यहीं जाकर खत्म भी होती है- गुंजन जीत जाती हैं, लेकिन भारत नहीं।’

