जस्टिस मुरलीधर

जस्टिस एस मुरलीधर विदाई समारोह में बोले- सच्चाई के साथ रहें, न्याय होगा

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नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस एस मुरलीधर को गुरुवार को फेयरवेल दी गई। बता दें कि दिल्ली हिंसा की सुनवाई के दौरान भड़काऊ भाषणों को लेकर सख्त रुख अपनाने और दिल्ली पुलिस को फटकार लगाने वाले जस्टिस मुरलीधर को वकीलों और अन्य न्यायिक कर्मचारियों ने एक समारोह में भावपूर्ण विदाई दी।

जस्टिस मुरलीधर का तबादला पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में कर दिया गया

बता दें कि जस्टिस मुरलीधर का तबादला पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में कर दिया गया था। जस्टिस मुरलीधर को फेयरवेल देने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में कार्यक्रम रखा गया था। इस दौरान प्रैक्टिस कर रहे तमाम वकीलों की उमड़ी। कार्यक्रम में इतने लोग पहुंचे थे कि बैठने की जगह तक नहीं बची और लोग सीढ़ियों पर ही खड़े हो गए। सोशल मीडिया पर इस फेयरवेल की तस्वीरें साझा की जा रही हैं।

एस मुरलीधर ने कहा कि जब न्याय की विजय होगी, तो जीत होगी… सच्चाई के साथ रहें – न्याय होगा

वहीं अपने विदाई समारोह में जस्टिस एस मुरलीधर ने कहा कि जब न्याय की विजय होगी, तो जीत होगी… सच्चाई के साथ रहें – न्याय होगा। जस्टिस मुरलीधर ने कहा कि मुझे बतौर न्यायाधीश भी कभी-कभी बहस की जरूरत महसूस होती थी। उन्होंने कहा कि कई बार कानून से जुड़े विषयों पर वह वकीलों के साथ बौद्धिक चर्चा करते थे। जस्टिस मुरलीधर ने युवा वकीलों को सलाह देते हुए कहा कि मैं चाहता हूं कि जूनियर वकील बहस करने के अवसर मिलें।

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जस्टिस मुरलीधर बोले- वह दुर्घटना के चलते वकील बने

मुरलीधर ने बताया कि वह दुर्घटना के चलते वकील बने। उन्होंने बताया कि उन्हें अपने दोस्त के वकील पिता की बाइंड की हुई मोटी रपट काफी प्रभावित करती थीं। ऐसे में जब उनके दोस्त ने बताया कि वह लॉ करने जा रहा है तो उन्होंने भी एमएससी की जगह लॉ करने का फैसला किया।

वकील प्रशांत भूषण  ने ट्वीट में लिखा कि हाईकोर्ट ने कभी किसी जज के साथ इतनी शान से विदाई नहीं देखी

वहीं कार्यक्रम से जुड़ी तस्वीरें वहां मौजूद वकीलों के अलावा सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने भी सोशल मीडिया पर शेयर की हैं।जज एस मुरलीधर की विदाई की फोटो को शेयर करते हुए उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि हाईकोर्ट ने कभी किसी जज के साथ इतनी शान से विदाई नहीं देखी। उन्होंने दिखाया कि उनके नमक और शपथ के प्रति एक न्यायाधीश संविधान को बनाए रखने और अधिकारों की रक्षा करने के लिए क्या कर सकता है।

बता दें कि दिल्ली हिंसा पर सुनवाई वाले दिन ही देररात जस्टिस मुरलीधर का पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में तबादला किए जाने की खबर आई थी। इसे लेकर विपक्षी पार्टियों ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला था। हालांकि केंद्र सरकार ने बचाव करते हुए कहा था कि जस्टिस मुरलीधर के तबादले की सिफारिश कॉलेजियम की बैठक में हुई थी। यह बैठक 12 फरवरी को हुई थी।

जबकि दिल्ली में 23 से 25 फरवरी के बीच हिंसा की छिटपुट घटनाओं ने बढ़ते-बढ़ते विकराल रूप ले लिया था। बता दें कि जस्टिस मुरलीधर ने दिल्ली हिंसा से जुड़े मामले की सुनवाई की थी और भाजपा नेता कपिल मिश्रा समेत अन्य बीजेपी नेताओं के खिलाफ एफआईआर के आदेश दिए थे। इस दौरान कोर्ट में नेताओं के भड़काऊ भाषणों से जुड़े वीडियो भी चलाए गए थे।

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