अयोध्या विवाद ; राम मंदिर पर अध्यादेश का विकल्प हमेशा खुला है: राम माधव

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नई दिल्ली। अयोध्या विवाद को लेकर चल रहा सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।आये दिन कोई न कोई बयान सामने आता रहता है।इसी कड़ी में भाजपा महासचिव राम माधव का एक बयान सामने आया है।बुधवार को राम माधव ने कहा कि राम मंदिर पर अध्यादेश का विकल्प हमेशा खुला है। उन्होंने कहा कि अभी यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है। अदालत ने इसकी सुनवाई के लिए 4 जनवरी तय की है। हमें आशा है कि अदालत इस मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट की तरह सुनवाई करेगा और जल्द फैसला सुनाएगा। अगर ऐसा नहीं होता है, तो हम दूसरा रास्ता अपनाएंगे। इससे पहले केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी सुप्रीम कोर्ट से राम जन्मभूमि मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट की तरह करने की मांग की।

साथ ही रविशंकर प्रसाद मंगलवार को अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद की 15वीं नेशनल कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। जिसमे उन्होंने कहा कि जब सबरीमाला मामले में जल्द फैसला आ सकता है, तो सालों से अटके इस मामले में क्यों नहीं? प्रसाद ने कहा कि मैं कानून मंत्री के नाते नहीं, बल्कि एक आम नागरिक के तौर पर सुप्रीम कोर्ट से मामले पर जल्द फैसला देने की अपील करता हूं। कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमआर शाह, इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस गोविन्द माथुर और जस्टिस एआर मसूदी भी मौजूद थे।उन्होंने आगे कहा, “इस मामले में इतने सबूत हैं कि अच्छी बात हो सकती है। लेकिन लोग मेरे पास आते हैं और पूछते हैं कि समलैंगिकता पर 6 महीने में, सबरीमाला पर 5-6 महीने में, अर्बन नक्सल पर 2 महीने में फैसला हो जाता है। हमारे रामलला का विवाद 70 सालों से कोर्ट में अटका है। 10 साल से सुप्रीम कोर्ट के पास है, इसमें सुनवाई क्यों नहीं होती?”

इसके बाद कानून मंत्री ने कहा , ”हम बाबर को क्यों पूजें, उसकी इबादत नहीं होनी चाहिए।” उन्होंने संविधान की प्रति को दिखाते हुए कहा कि इसमें राम, कृष्ण और अकबर का भी जिक्र है, लेकिन बाबर का नहीं। उन्होंने कहा कि भारत में इस तरह की बात कर दो तो नया विवाद खड़ा हो जाता है।

साथ ही सुप्रीम कोर्ट अयोध्या में राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद पर 4 जनवरी को सुनवाई करेगा। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में 3 जजों की बेंच इस मामले में सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर में इस मामले से जुड़ी याचिकाओं पर जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया था।

बता दें राम माधव ने कांग्रेस और महागठबंधन के नेतृत्व पर कहा, ”राहुल गांधी कांग्रेस के नेता हैं। इसका फैसला कांग्रेस को करना चाहिए कि क्या उनका नेतृत्व पार्टी के लिए फायदेमंद है या नहीं। मैं इस पर कैसे टिप्पणी कर सकता हूं? उन्होंने हाल के चुनावों में मेहनत की और कुछ राज्यों में जीत हासिल की। इन्हीं के बाद राहुल को प्रधानमंत्री पद का दावेदार कहा गया। अगर ऐसा है तो महागठबंधन की जरूरत नहीं। स्टालिन को छोड़कर कोई भी दल महागठबंधन के नेता के नाम की पुष्टि नहीं कर रहा है। वहां करीब छह नेता प्रधानमंत्री पद की दौड़ में हैं।”उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में भाजपा किसी भी गठबंधन का सामना करने के लिए तैयार है। पिछले दिनों उपेंद्र कुशवाहा जैसे कुछ छोटे सहयोगी एनडीए से अलग हुए हैं, लेकिन हम दक्षिण और पूर्वी भारत में नए सहयोगियों को जोड़ने के लिए काम कर रहे हैं।

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