TEERATH SINGH RAWAT

उत्तराखंडः मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने प्रदेशवासियों को दी कईं सौगातें

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मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत (Chief Minister Tirath Singh Rawat) के निर्देशों के बाद पुलिस क्षेत्रों के चौकीदारों की भांति राजस्व ग्राम प्रहरियों को भी अब 1200 के बजाय 2000 रुपये मानदेय मिलेगा। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री ने विभिन्न विकास कार्यों के लिए वित्तीय स्वीकृतियों को मंजूरी दी है।

मोटर मार्गों को सौगात 

मुख्यमंत्री (Chief Minister Tirath Singh Rawat)ने लोक निर्माण विभाग के जरिये विधानसभा क्षेत्र कर्णप्रयाग में तीन मोटर मार्गों के निर्माण कार्य के प्रथम चरण के लिए 166.64 लाख रुपये, पिथौरागढ़ की धारचूला विधानसभा क्षेत्र में तीन कार्यों के लिए 2084.48 लाख रुपये, विधानसभा क्षेत्र नैनीताल के बेतालघाट में बिडारी से पोखरा घाट के नवनिर्माण कार्य के लिए 264.75 लाख रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है।

हल्दिया के 12 आपदा प्रभावित परिवारों को 51 लाख रुपये 

मुख्यमंत्री (Chief Minister Tirath Singh Rawat) ने आपदा प्रबंधन पुनर्वास के तहत चमोली के तहसील थराली में ग्राम हल्दिया गांव के 12 आपदा प्रभावित परिवारों के विस्थापन एवं पुनर्वास के लिए 51 लाख रुपये तथा गैरसैण में ग्राम सनेड लगा जिनगोडा के एक आपदा प्रभावित परिवार के विस्थापन एवं पुनर्वास के लिए 44.50 लाख रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है।

सूचना प्रौद्योगिकी के नेटवर्क विस्तार को 381 लाख

मुख्यमंत्री (Chief Minister Tirath Singh Rawat)  ने सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के जरिये क्षेत्र विस्तार नेटवर्क योजना के लिए 381.14 लाख रुपये, नेशनल ई-गर्वनेंस योजना मद में स्टेट डाटा सेंटर का आरएएम उच्चीकरण के लिए 186 लाख रुपये, विधानसभा भवन तक फाइबर बिछाकर कनेक्टिविटी देने के लिए 70 लाख रुपये को स्वीकृति प्रदान की।

डीडीहाट में हेलीपैड बनेगा

मुख्यमंत्री (Chief Minister Tirath Singh Rawat) ने पिथौरागढ़ के डीडीहाट (ग्रमानन पापो) में हेलीपैड के निर्माण के लिए 30.85 लाख रुपये व उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण के गेस्ट हाउस रेनोवेशन के लिए 13.82 लाख रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की। वहीं, अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों में अवस्थापना सुविधाओं का विकास के निर्माण कार्यों के लिए 65.36 लाख रुपये, अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्रों अवस्थापना सुविधाओं के विकास के लिए 30.10 लाख रुपये तथा वृद्धा पेंशन, विधवा पेंशन, दिव्यांग पेंशन, राज्य आकस्मिक निधि से धनराशि स्वीकृति विषयक 5961.04 लाख रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है।

आठ शहरों की पेयजल योजनाओं को 1148 लाख

मुख्यमंत्री (Chief Minister Tirath Singh Rawat)  ने जल संस्थान की आठ चालू निर्माणाधीन नगरीय पेयजल एवं जलोत्सारण योजनाओं के लिए 1148.588 लाख रुपये, पेयजल निगम की डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी अर्बन मिशन कार्यक्रम के अंतर्गत स्वीकृत चार चालू योजनाओं के लिए 672.47 लाख रुपये की वित्तीय मंजूरी दी है।

इन विभागों की योजनाओं को भी दी गई वित्तीय स्वीकृति 

मुख्यमंत्री (Chief Minister Tirath Singh Rawat) ने केंद्र पोषित योजना इंटीग्रेटिड वाल्डलाइफ हेवीटेंड योजना के तहत 207.35 लाख रुपये, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के लिए 38 करोड़ रुपये, पलायन रोकथाम के लिए 18 करोड़, नगर निगम हरिद्वार की अपशिष्ट प्रबंधन परियोजना के लिए 1934.18 लाख रुपये, डीनापानी में मिनी स्टेडियम के निर्माण के लिए 99.56 लाख रुपये, पिटकुल के अंतर्गत संचालित आरईसी और पीएफसी वित्त पोषित विभिन्न योजनाओं के लिए 64 करोड़ रुपये, नगर पंचायत लालकुआं के अंतर्गत स्लाटर हाउस के निर्माण के लिए 43.87 लाख रुपये, नगर पंचायत नंदप्रयाग के अंतर्गत पशु शरणालय/गोसदन निर्माण के लिए 11.66 लाख रुपये और जिला पंचायत के लिए धनराशि अवमुक्त कराए जाने के लिए 51 करोड़ पांच लाख रुपये को भी वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है।

जनहित के काम नहीं रुकने चाहिए : मुख्यमंत्री

कोरोना पॉजिटिव आने के बाद एकांतवास में रह रहे मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत (Chief Minister Tirath Singh Rawat) ने मंगलवार को अधिकारियों के साथ वर्चुअल संवाद किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनहित के काम किसी भी सूरत में रुकने नहीं चाहिए। उन्होंने विकास योजनाओं से संबंधित कई प्रस्तावों पर वर्चुअल मंजूरी भी दी।

बीजापुर सेफ हाउस से उन्होंने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से विकास कार्यों की प्रगति का ब्योरा लियाष विश्व मौसम विज्ञान दिवस पर आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से आयोजित बैठक में उन्होंने केंद्र सरकार की मौसम की पूर्व चेतावनी संबंधित परियोजनाओं को यथाशीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए।

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एक अन्य वर्चुअल बैठक में वन भूमि हस्तांतरण के लंबित प्रकरणों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने मामलों की नियमित समीक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।उनका मानना है कि संक्रमण की स्थितियों में एहतियात बरतना जरूरी है। लेकिन यदि संभव है तो आइसोलेशन में रहते हुए भी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया जाना चाहिए।

प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए उत्तराखंड में पूर्व चेतावनी प्रणाली सयंत्र स्थापित किए जाने चाहिए। आपदा प्रबंधन सिंह रावत ने कहा कि हमारा राज्य समय रहते हुए जन समुदाय को चेतावनी प्रदान करने पर शीघ्रता से काम कर रहा है। इसी क्रम में मुक्तेश्वर में डॉप्लर राडार संचालित हो चुका है तथा सुरकंडा मसूरी व लैंसडौन पौड़ी में शीघ्र ही डॉप्लर का कार्य शुरू किया जाएगा।

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सचिव आपदा प्रबंधन एसए मुरुगेशन ने बताया कि उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन एवं मौसम विभाग उत्तराखंड के सौजन्य से राज्य के संवेदनशील इलाकों में 176 अर्ली वार्निंग वेदर स्टेशन लगाए गए हैं। जिनमें 107 ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन, 25 सरफेस फील्ड ऑब्जर्वेटरी, 28 रेन गेज, 16 स्नो गेज शामिल हैं।

इनके माध्यम से रियल टाइम डाटा प्राप्त हो रहा है। बैठक में  सदस्य सचिव उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एसपी सुबुद्धि,  अपर सचिव(वन) नेहा वर्मा, डॉ. ओम प्रकाश सिंह नेगी, कुलपति, उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय आनंद श्रीवास्तव, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण डॉ. पीयूष रौतेला भी उपस्थित थे।

फारेस्ट क्लीयरेंस में ढील बरती तो होगी कार्रवाई 

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत (Chief Minister Tirath Singh Rawat) ने मोटर मार्गों व अन्य विकास योजनाओं के लिए वनीय मंजूरी की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया में ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

प्रदेश में करीब 312 मोटर मार्गों के लिए भूमि हस्तांतरण के प्रस्ताव वन विभाग और केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की हरी झंडी का इंतजार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वन भूमि हस्तांतरण के मामलों को निपटाने में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जिलाधिकारियों को शीघ्र लैंड बैंक तैयार करने के निर्देश दिए।

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कोरोना संक्रमित होने के बावजूद मुख्यमंत्री ने मंगलवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अधिकारियों की बैठक ली। वन भूमि हस्तांतरण के लंबित मामलों की समीक्षा के दौरान उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों को प्रस्ताव को मंजूरी दिलाने के लिए अतिरिक्त तेजी दिखाने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर जिलाधिकारी नियमित बैठकें करें। शासन में प्रमुख सचिव वन को भी उन्होंने अपने स्तर पर बैठक करने को कहा। उन्होंने ताकीद किया कि ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।

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