किताबों में पढ़ी जानें वाली कहानियों को इस महिला ने कर दिखाया सच

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नई दिल्ली। संघर्ष और गरीबी की कहानियां आप लोगों ने सिर्फ किताबों में ही पढ़ी होंगी लेकिन ऐसी ही एक कहानी तेलंगाना के एक बेहद गरीब परिवार में जन्मी ज्योति रेड्डी की भी है ज्योति का जीवन संघर्षों से भरा हुआ है चार बहनें थी। सभी बहनों में ज्योति सबसे छोटी थीं। गरीबी के कारण ज्योति को कभी स्कूल जाने का मौका नहीं मिला।

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आपको बता दें गरीबी की वजह से जब बेटियां बोझ बनने लगीं, तो परिवार ने उन्हें अनाथालय भेज दिया। अनाथालय के बाद मात्र सोलह साल की उम्र में ज्योति की शादी कर दी गई। इतनी कम उम्र में शादी के बाद ज्योति घबरा गईं। उनके ससुराल की माली हालत भी बहुत अच्छी नहीं थी। बच्चों की परवरिश के लिए उन्होंने मजदूरी शुरू किया। इसी बीच वह नेहरू युवा केंद्र से जुड़ीं।

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जानकारी के मुताबिक यहां आकर ज्योति ने फिर से अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना शुरू और टाइपिंग भी सीख ली। इसके बाद एक स्कूल में पढ़ाना शुरू किया, जहां उन्हें 398 रुपए महीने के मिलने लगे। ज्योति को घर से स्कूल जाने में करीब 2 घंटे लगते थे। आने-जाने में लगने वाले 4 घंटों का सही इस्तेमाल करने के लिए ज्योति साड़ियां बेचने लगी। इस दौरान अमेरिका में रहने वाले उनके कजिन ने उन्हें अमेरिका चलने का ऑफर दिया।

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वहीँ कुछ प्रयासों से वह अपना काम खोलने में सफल रहीं। हैरानी की बात ये थी कि उनका काम चल निकला। अपने बिजनेस को और बढ़ाने के लिए उन्होंने एक साफ्टवेयर बनाया और अपने काम को एक कंपनी में बदल दिया। ज्योति की बनाई इस कंपनी सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस की रिलायंस समेत कई बड़ी कंपनी क्लाइंट हैं। उनकी कंपनी की वैल्यू 100 करोड़ रुपए से भी ज्यादा है।

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