योगासन

ये 5 योगासन आपके डिप्रेशन को करेंगे छूमंतर, हमेशा रहेंगे खुश

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नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को मनाया जाएगा। कोरोना संक्रमण के फैलाव को देखते हुए किसी एक स्थान पर जन समूह को एकत्र नहीं होने के आदेश हैं, इसलिए लोग अपने- अपने घरों में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाएंगे।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को मनाया जाता है। ये दिन साल का सबसे लंबा दिन होता है। पहली बार अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2015 को मनाया गया था।

जानें क्या कहता है रिसर्च?

दक्षिण ऑस्ट्रेलिया विश्वविद्यालय के प्रो. डॉक्टर जैकिंटा ब्रिंसली ने शोध में पाया कि अवसाद अक्सर मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों से जुड़ा होता है। उन्होंने बताया कि अवसाद की भावनाओं से जूझ रहे लोगों के लिए व्यायाम हमेशा एक अच्छी रणनीति रही है क्योंकि यह दिमाग और स्वास्थ्य दोनों को बढ़ाता है। ब्रिसली ने कहा कि दुनिया के सिज़ोफ्रेनिया से पीड़ित 20 से 40 फीसदी लोग, आजीवन चिंता से पीड़ित 72 फीसदी लोग अवसादग्रस्त हैं।

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लॉकडाउन की वजह से इन दिनों जिम और सभी प्रकार के व्यायाम कक्षाएं अब बंद हैं। ऐसे में लोग इसका विकल्प की तलाश कर रहे हैं। ब्रिसली ने बताया कि योग ऐसा ही विकल्प है, जो तनाव को कम करता है। ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन में प्रकाशित एक विश्लेषण के अनुसार संयुक्त राज्य अमेरिका, भारत, जापान, चीन, जर्मनी और स्वीडन में किए गए अनुसंधान में पता चलता है कि योग मानसिक तनाव (डिप्रेशन) को कम करने में सहायक है।

आज हम आपको तनाव दूर करने के लिए कुछ खास तरह के योगासन के बारे में बता रहे हैं, जिनको करने से आप खुद को तनावमुक्त और तरोताजा महसूस करेंगे। तो आइए आज आपको बताते है ये पांच खास योगासन ।

पद्मासन

यह योगासन करने के लिए सबसे पहले एकाग्र होना पड़ेगा। आज की तनाव भरी जिंदगी में मनुष्य के मन में ऑफिस और घर की समस्याओं के अलावा दिन में हुई छोटी बड़ी बातें गूंजती रहती हैं। इसकी वजह से दिमाग में तनाव रहता है। इसके लिए आपको पद्मासन करना होगा।

कैसे करें
पद्मासन में सबसे पहले बाएं पैर को दाईं जांघ पर रखें और फिर दाएं पैर को बाईं जांघ पर रखें। अगर आप इस पोज़िशन में सहज न महसूस करें तो पैरों को हल्का मोड़कर भी बैठ सकते हैं, लेकिन पीठ सीधी रखें, ताकि आपका दिमाग़ सचेत रहे। आंखें मूंदकर अपनी सांस पर ध्यान लगाने की कोशिश करें। नाक से सांस लें और नैसर्गिक सांस लेने की क्रिया को अपनाएं। अगर ध्यान लगाने में अब भी मुश्क़िल हो तो रिलैक्सेशन म्यूजिक लगा लें। यह योग कहीं भी और कभी भी किया जा सकता है।

वज्रासन
यह मुद्रा आपकी गर्दन, सिर और कंधों के तनाव को ख़त्म करेगी। यह अपचन, एसिडिटी, सुस्ती जैसी समस्याओं को दुरुस्त करता है, जिससे दिमाग़ शांत होता है। यह शरीर में रक्तप्रवाह को बढ़ाता है और मन को शांति प्रदान करता है।

कैसे करें
वज्रासन में बैठें यानी दोनों पैरों को पीछे की ओर मोड़कर बैठ जाएं। दाएं हाथ को ज़मीन पर रखें और बाएं हाथ को सिर के ऊपर से विपरीत दिशा में ले जाकर हल्का स्ट्रेच करें। अब बाएं हाथ को ज़मीन पर रखें और दाएं हाथ को सिर के ऊपर से विपरीत दिशा में स्ट्रेच करें। यह प्रक्रिया 10-15 बार दोहराएं।

प्रसारिता पादोत्तासन
इस आसान से दिमाग़ तक अतिरिक्त रक्तप्रवाह होता है, जिससे उसकी कोशिकाएं सक्रिय हो जाती हैं। तनाव और ऐंग्ज़ाइटी को मिनटों में भगाने के लिए यह मुद्रा सबसे उपयुक्त है। यह एक अलग स्तर की शांति प्रदान करता है, जिससे आपका मन रिलैक्स हो जाता है।

कैसे करें
इस आसन में पैरों को बराबर में फैला लें और हाथों को कूल्हों पर रखें। सांस लेते हुए हाथों को ऊपर उठाएं और सांस छोड़ते हुए सामने की ओर कमर से झुकें। अब कुहनियों को ज़मीन पर टिकाएं, कंधों को सीधा रखें और उंगलियों को आपस में अटका लें। अब सिर को ज़मीन पर रखें। यदि सिर ज़मीन तक पहुंच नहीं पा रहा तो योग ब्लॉक का इस्तेमाल कर उस पर सिर टिका सकते हैं। इसी मुद्रा में 10 बार सांस लें और छोड़ें। अब सांस लेते हुए सीधे खड़े हो जाएं और हाथों को कमर पर रखें।

उत्तानासन
दिमाग़ को मिनटों में शांत और एकाग्र करने में यह आसन मददगार है। यदि हाल ही में आप डिप्रेशन की गिरफ़्त में आए हैं, तो भी यह आसन नियमित रूप से करने से जल्द ही राहत मिलेगी।

कैसे करें
पैरों को एक साथ ले आएं और उन्हें सीधा रखें। सांस लेते हुए हाथों को ऊपर करें और सांस छोड़ते समय हाथों को नीचे की ओर ले जाएं। हथेलियों को ज़मीन पर रखें। यदि हथेलियां ज़मीन तक नहीं पहुंच रही हों तो एड़ियों को भी पकड़ सकते हैं या उन्हें स्पर्श कर सकते हैं। इस पूरी मुद्रा के दौरान पैरों को मोड़ें या झुकाए नहीं। कुछ सेकेंड्स या 10 बार सांस लेने और छोड़ने तक पोज़िशन को बनाए रखें। लंबी सांस लें और हाथों को ऊपर उठाएं और रिलैक्स हो जाएं।

सुप्त बध्द कोणासन
यह आसन नर्वस सिस्टम को शांति प्रदान करता है। यह कूल्हों के आसपास के हिस्सों और पूरे शरीर की अच्छी स्ट्रेचिंग कराता है। लेकिन यह आसन स्ट्रेचिंग के बारे में न होकर अंदरूनी शांति प्रदान करने और अपने लक्ष्यों के प्रति एकाग्र होने में मदद करता है। यह दिल को स्टिम्युलेट कर रक्तप्रवाह को बढ़ाता है। यह मांसपेशियों में तनाव को कम करता है, जिससे अच्छी नींद आती है और शरीर को सुकून मिलता है और पूरे शरीर में ऊर्जा का प्रवाह होता है।

कैसे करें
ज़मीन पर सीधे लेट जाएं। इसके बाद धीरे से अपने घुटनों को मोड़ें, जिससे तलवे नमस्ते करने की मुद्रा में आपस में जुड़ जाएं। एड़ियां ग्रॉइन को स्पर्श करती हुई या ग्रॉइन (पेट के नीचे और जांघों के ऊपर का हिस्सा) के जितने क़रीब हो सके, उतने क़रीब ले जाने की कोशिश करें। अब बाईं हथेली को दिल पर रखें और दाईं को पेट पर। सांस छोड़ते समय ध्यान रखें कि शरीर के निचले हिस्से की मांसपेशियां सिकुड़न महसूस करें, क्योंकि इस दौरान टेलबोन, प्यूबिक बोन के क़रीब जाएगा। पीठ और पेल्विक एरिया में स्थिरता महसूस होगी। अब तुरंत सांस लें और सांस छोड़ते समय घुटने उठाएं, ताकि थाईज़ के अंदरूनी हिस्सों और ग्रॉइन्स में खिंचाव महसूस हो।

ध्यान रहे कि निचली रीढ़ की हड्डी पर बहुत ज़्यादा दबाव न पड़ने पाए। गर्दन पर बहुत दबाव न बनाते हुए कंधे चौड़े रहें। अब इसी मुद्रा में एक मिनट तक बने रहते हुए धीरे-धीरे गहरी सांस लें और छोड़ें। सांस छोड़ें और पोज़ से बाहर आएं। लेकिन ऐसा करने से पहले शरीर के निचले हिस्से और घुटनों को ज़मीन पर दबाएं। उसके बाद घुटनों को गले लगाएं और फिर बाहें फैलाकर पोज़िशन रिलीज़ करें।

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