रोजगार के क्षेत्र में महिलाओं की अनूठी पहल, खराब फूलों से कमा रही हैं हजारों

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लखनऊ डेस्क। मंदिर में चढ़ाए गये फूल से केवल देवी-देवता ही खुश नहीं होंगे। बल्कि फूल चढ़ाने के बाद सैंकड़ों महिलाओं की दुआएं भी मिलेंगी। क्योकि ये फूल अब कूड़ेदान में न फेंककर मंदिरों में अपने सुंगध से देवी-देवताओं को खुश कर रहे हैं। जानें कैसे –

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आपको बता दें अगरबत्तियां दूसरी अगरबत्तियों की अपेक्षा ज्यादा सुंगन्धित हैं। इसमें कोयले की मात्रा शून्य होती है। अधिक देर तक जलने में सक्षम होने के साथ ही रासानयिक पदार्थ से रहित है। समान अगरबत्तियों की अपेक्षा कम धुआं देने वाली ये अगरबत्तियां स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक नहीं है और चढ़ाए फूल से 50 हजार अगरबत्तियां बनाकर तीन सौ महिलाएं 10,000 रुपये प्रति माह से ज्यादा कमा रही हैं।

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जानकारी के मुताबिक डाक्टर रमेश श्रीवास्त्व ने बताया कि चढ़ावे फूल से भी अगरबत्ती बनेगी। यह कार्य 2018 में डीआरडीओ के माध्यम से शुरू किया गया था, लेकिन अभी यह पूर्णतया बाजार में बिकना शुरू नहीं हुआ है। जल्द ही वहां भी लोग इसके लिए आगे आएंगे और उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। उन्होंने बताया कि विन्ध्यांचल में 200 से 300 किलो प्रतिदिन फूल निकलता है। पूजा स्थलों पर चढ़े फूलों को सुखाकर उसका पाउडर बना दिया जाता है। इसके बाद इसे तीन भाग फूलों का पाउडर व एक भाग मैदा लकड़ी पाउडर मिलाने के पश्चात आटे जैसा गुथ लिया जाता है।इसके बाद लकड़ी की बनी हुई तिली पर फूलों के बने पेस्ट को हाथों से जैसा गुथ लिया जाता है। फिर समतल पटरे पर लपेटकर छाया में सूखाकर अगरबत्ती तैयार कर ली जाती है।

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