Navratri

Navratri 2020 : नवरात्रि में कलश स्थापना का जानें सही विधि

1735 0

नई दिल्ली। शारदीय नवरात्रि (Navratri)  17 अक्टूबर शुरू हो रहा है। हिन्दू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व होता है। नवरात्रि  इस बार अधिक मास लगने के कारण नवरात्रि 25 दिन देरी से शुरू हो रही है। इस बार नवरात्रि 17 अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक रहेगी। इस बार अष्टमी और नवमी तिथि एक ही दिन पड़ेगी, जिसके कारण नवरात्र में देवी आराधना के लिए पूरे 9 दिन मिलेंगे।

प्रतिपदा तिथि को माता के प्रथम स्वरूप शैल पुत्री के साथ ही कलश स्थापना के लिए भी अति महत्त्वपूर्ण दिन होता है। कलश स्थापना या कोई भी शुभ कार्य शुभ समय व तिथि में किया जाना शुभ माना जाता है। इसलिए इस दिन कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त पर विचार किया जाना अत्यावश्यक है।

फिल्म ‘द व्हाइट टाइगर’ का First Look प्रियंका चोपड़ा ने किया शेयर

नवरात्रि के 9 दिनों में मां भगवती के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। हर स्वरूप सौभाग्य का प्रतीक होता है। इन शुभ दिनों में मां की हर रोज पूजा की जाती है। ज्यादातर लोग 9 दिन का व्रत भी रखते हैं। वैसे तो मां को श्रद्धा भाव से लगाए गए हर भोग को ग्रहण करती हैं, लेकिन नवरात्रि के दिनों में मां के हर स्वरूप का अलग भोग लगता है।

जानिए किस दिन होती है किस देवी की पूजा?

नवरात्रि के पहले दिन शैलपुत्री, दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन चंद्रघंटा, चौथे दिन कुष्मांडा, पांचवें दिन स्कंदमाता, छठे दिन कात्यानी, सातवें दिन कालरात्रि, आठवें दिन महागौरी, नवें दिन सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।

जानिए कैसे करें नवरात्रि पर कलश पूजन?

सभी प्राचीन ग्रंथों में पूजन के समय कलश स्थापना का विशेष महत्व बताया गया है। सभी मांगलिक कार्यों में कलश अनिवार्य पात्र है। दुर्गा पूजन में कलश की स्थापना करने के लिए कलश पर रोली से स्वास्तिक और त्रिशूल अंकित करना चाहिए और फिर कलश के गले पर मौली लपेट दें। जिस स्थान पर कलश स्थापित किया जाता है। पहले उस स्थान पर रोली और कुमकुम से अष्टदल कमल बनाकर पृथ्वी का स्पर्श करते हुए निम्न मंत्र का उच्चारण करना चाहिए।

ओम भूरसि रस्यादितिरसि विश्वधाया विश्वस्य भुवनस्य धात्रीं।

पृथिवीं यच्छ पृथिवी दृह पृथ्वीं माहिसीः।।

ओम आ जिघ्र कलशं मह्या त्वा विशन्तिवन्दवः।

पुनरूर्जानि वर्तस्व सा नः सहस्रं धुक्ष्वोरुधारा

पयस्वती पुनर्मा विशताद्रयिः।।

जानें कलश स्थापना की विधि

सुबह नहाकर साफ कपड़े पहने, इसके बाद एक पात्र लें। उसमें मिट्टी की एक मोटी परत बिछाएं। फिर जौ के बीज डालकर उसमें मिट्टी डालें। इस पात्र को मिट्टी से भरें। इसमें इतनी जगह जरूर रखें कि पानी डाला जा सके। फिर इसमें थोड़े-से पानी का छिड़काव करें।

Related Post

संजय मांजरेकर कमेंटरी पैनल से आउट

पूर्व क्रिकेटर संजय मांजरेकर को कमेंटरी पैनल से आउट, नाखुश थी BCCI

Posted by - March 14, 2020 0
नई दिल्ली। कोरोनावायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए बीसीसीआई ने आईपीएल को स्थगित व भारत-दक्षिण अफ्रीका वनडे सीरीज को…
Amit Shah

नये उत्तराखंड की अनन्त संभावनाओं को तलाशने की शुरूआत

Posted by - December 9, 2023 0
देहरादून। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने देहरादून में आयोजित उत्तराखंड ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के समापन…