साउथ चाइना सी में चीनी जहाजों की घुसपैठ से नाराज मलेशिया, चीन के राजदूत को भेजा समन

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नई दिल्ली। मलेशिया और चीन के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। मलेशिया के विदेश मंत्रालय की तरफ से पिछले दिनों चीन के राजदूत आउंग यूजिन को तलब किया गया। इस वर्ष जून के बाद से ये दूसरा मौका था जब मलेशिया ने इस तरह से चीन के राजदूत को समन किया है।

बताया जा रहा है कि मलेशिया की तरफ से साउथ चाइना सी में उसके हिस्‍से वाले विशेष आर्थिक क्षेत्र में चीनी जहाज की मौजूदगी के बाद से मलेशिया भड़का हुआ है। इस घटना पर विरोध दर्ज कराने के मकसद से ही मलेशिया ने यह कदम उठाया है। मलेशिया पिछले कई दिनों से अपने सबसे बड़े ट्रेड पार्टनर के साथ रिश्‍ते सामान्‍य रखने की कोशिशें कर रहा है। विशेष क्षेत्र में स्थित साबा और सरावक में हुई तनावपूर्ण घटना के बाद भी कुआलालंपुर संयम बरत रहा है।

चीन ने तोड़े कानून- मलेशिया

साउथ चाइना सी में स्थित बर्नियो द्वीप पर मलेशिया अपना दावा करता है। यह क्षेत्र उसके एक्‍सक्‍लूसिव इकोनॉमिक जोन में आता है। यहां पर कुछ समय पहले चीन के जहाज की गतिविधियां देखी गई थीं। चीनी जहाज जिसमें एक सर्वे बोट भी शामिल है, वो साबा और सरावक में देखा गया था।

मलेशिया की मानें तो ऐसा करके चीन ने साल 1982 में हुई यूनाइटेड नेशंस के समुद्रों पर बने कानून को तोड़ा है। मलेशिया के विदेश विभाग की तरफ से ताजा घटना पर बयान जारी किया गया है। हालांकि इस बात की कोई जानकारी नहीं दी गई है कि जिस समय घटना हुई, उस समय कितने चीनी जहाज मौजूद थे।

पहले भी चीन पर लगा घुसपैठ का आरोप

इस वर्ष जून में चीन और मलेशिया के बीच उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी जब चीन पर मलेशिया ने उसके एयरस्‍पेस में घुसपैठ का आरोप लगाया था। मलेशिया की तरफ से कहा गया था कि उसने चीनी एयरफोर्स ट्रांसपोर्ट विमानों को इंटरसेप्ट करने के बाद अपने फाइटर जेट को रवाना किया था।

इस घटना के बाद चीन को सफाई देनी पड़ी थी। चीन ने कहा था कि उसके विमान रूटीन ट्रेनिंग कर थे। मलेशिया की तरफ से कहा गया था कि बॉर्नियो के ऊपर चीनी जेट्स को इंटरसेप्‍ट किया गया है।

16 फाइटर जेट्स सीमा में हुए थे दाखिल

मलेशिया के विदेश मंत्री का आरोप था कि चीन के 16 फाइटर जेट्स उनके देश की सीमा में दाखिल हुए हैं। उन्होंने कहा था कि सरकार ने चीन के पास शिकायत दर्ज कराई है और चीनी राजदूत को समन किया है। उस समय चीनी दूतावास की तरफ से कहा गया था कि ये गतिविधियां चीनी एयरफोर्स की रूटीन फ्लाइट का हिस्सा थीं और इनके जरिए किसी देश को निशाना बनाने की कोशिश नहीं की गई थी।

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