केरल मे ‘श्रीराम’ की शरण में वामपंथी पार्टियां

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जानकारी के मुताबिक इस ऑनलाइन सीरीज को ‘रामायण एंड इंडियन हेरिटेज’ नाम दिया गया था। जिसका प्रसारण जिला समिति के फेसबुक पेज पर किया गया। वक्ता के तौर पर इसमें राज्य स्तरीय भाकपा नेता हैं।  मलप्पुरम सीपीआई जिला सचिव पी के कृष्णदास ने मीडिया से कहा “वर्तमान में, सांप्रदायिक और फासीवादी ताकतें हिंदू धर्म से जुड़ी हर चीज पर अपना विशेष दावा कर रही हैं। रामायण जैसे महाकाव्य देश की साझा परंपरा और संस्कृति का हिस्सा हैं।

उन्होंने कहा कि रामायण पर एक टॉक सीरीज आयोजित करके पार्टी यह देखना चाहती थी कि प्रगतिशील समय में महाकाव्य को कैसे पढ़ा और समझा जाना चाहिए। पी कृष्णदास ने कहा कि जिन विषयों पर चर्चा की गई है, वे विविध हैं, जैसे भाकपा नेता मुलक्कारा रत्नाकरन की लिखी किताब “रामायण के युग के लोग और अन्य देशों के साथ राजनीतिक संबंध”,  एम केशवन नायर की किताब ‘रामायण में समकालीन राजनीति’ पर चर्च की गई।

आम आदमी अपना पेट पालने का संघर्ष कर रहा, उसे पेगासस की शायद ही कोई परवाह- SC पूर्व जज

उन्होंने बताया कि ‘रामायण में समकालीन राजनीति” पर अपने किताब में नायर ने कहा है कि रामायण में निहित राजनीति संघ परिवार की प्रचलित राजनीति से बहुत अलग थी। वहीं इस बारे में कवि लीलाकृष्णन का कहना है कि यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी कम्युनिस्टों की है कि रामायण को सांप्रदायिक ताकतों के हाथों का एक उपकरण न बनाए। उन्होंने कहा हम महाकाव्य के विविध संस्करणों को उजागर करके रामायण की फासीवादी व्याख्याओं का विरोध कर सकते हैं।

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