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भारतीय सैनिकों का बढ़ता मनोबल

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पिछले दिनों खबर आई थी कि चीन ने अपने सैनिकों के लिए हड्डियों से निर्मित वर्दी तैयार की है। जो लेह-लद्दाख जैसे बर्फीले इलाकों में उन्हें ठंड के प्रकोप से बचाएगी। बल्कि लड़ने और भारी सामान लेकर पहाड़ों पर चढ़ने में भी उनकी मदद करेगी। जाहिर है, इस खबर से चीनी सैनिकों की बांछें खिली होंगी, लेकिन उनकी परेशानी बढ़ाने वाली खबरें भारत से हैं। भारत सरकार ने अपने सैनिकों का मनोबल बढ़ाने और उन्हें मजबूती प्रदान करने के अनेक उपाय किए हैं। खुद प्रधानमंत्री और रक्षामंत्री भी सीमा पर तैनात जवानों से मिलते और उनकी हौसलाअफजाई करते रहे हैं।

लद्दाख सीमा पर चीन से चल रहे तनाव के बीच भारत सरकार ने तीनों सेनाओं को 15 दिन की जंग के हिसाब से गोला-बारूद और हथियार जमा करने की छूट दे दी है। अब तक सेनाएं 10 दिन की जंग के हिसाब से हथियार जुटाती थीं। सरकार के इस कदम के बाद सेना अपनी जरूरत के हिसाब से सैन्य वस्तुओं का स्टॉक और आकस्मिक वित्तीय अधिकारों का प्रयोग कर सकेगी। इसके अलावा सरकार विदेश से 50 हजार करोड़ के हथियार खरीदने की योजना भी बना रही है।

सेना के सूत्रों पर भरोसा करें तो सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि अगर चीन और पाकिस्तान के साथ एक साथ युद्ध के हालात बनें तो हम कितने तैयार हैं। हालांकि वायुसेना प्रमुख ने यह कहकर देश की चिंता घटाई है कि भारतीय वायुसेना दोनों देशों के साथ एक साथ युद्ध लड़ने में सक्षम है। जिस तरह की पाक और चीन के बीच रणनीतिक समझ है, उसे देखते हुए दोनों की गतिविधियों पर नजर रखना लाजिमी भी है। यह वजह है कि सेना अपने सभी प्रमुख युद्धक ठिकानों पर दुश्मनों के साथ 15 दिन का वेपन सिस्टम और गोला-बारूद जमा कर रही है। उ़ी हमले के बाद से ही सरकार और सेना के स्तर पर इस बात को महसूस भी किया जा रहा था। कुछ साल पहले तक सेना के पास 40 दिन की लड़ाई के लिए संसाधनों की मौजूदगी सुनिश्चित भी की गई थी लेकिन हथियारों और गोला-बारूद के भंडारण की चुनौतियों और बदलते हालात के चलते इसे 10 दिन का कर दिया गया था।

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उड़ी हमले के बाद तत्कालीन रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने तीनों सेनाओं के प्रमुखों के सैन्य साजो सामान खरीदने के अधिकार बढ़ाकर 100 करोड़ से 500 करोड़ रुपये कर दिए थे यही नहीं तीनों सेनाओं के प्रमुखों को 300 करोड़ रुपये के आकस्मिक वित्तीय अधिकार भी दिए गए थे जिससे कि वक्त जरूरत पर वे खुद गोला-बारूद और हथियारों की खरीद सकें और उन्हें सरकार का मुंह न ताकना पड़े। यह तो सेना को मजबूती देने के प्रयासों का एक पक्ष है। दूसरा पक्ष यह है कि सेना ने देश में बनी सुपरसोनिक मिसाइल ब्रह्मोस के लैंड अटैक वर्जन का सफल परीक्षण किया है। एयरफोर्स और नेवी भी ब्रह्मोस के हवा और समुद्र से फायर किए जाने वाले वर्जन का परीक्षण करने वाली हैं।

 

इस सुपरसोनिक मिसाइल की खासियत यह है कि ब्रह्मोस मिसाइल सुपरसोनिक स्पीड से टारगेट पर सटीक हमला करने के लिए जानी जाती है। ब्रह्मोस के लैंड अटैक वर्जन की रेंज 290 किलोमीटर से बढ़ाकर 400 किलोमीटर कर दी गई है। लेकिन, इसकी स्पीड 2.8 मैक ही रखी गई है। यह आवाज की रफ्तार से तीन गुना तेज मिसाइल है। विकथ्य है कि ढाई माह में भारत ने एंटी रेडिएशन मिसाइल रुद्र-1 समेत कई मिसाइलों के परीक्षण किए हैं। रुद्र-1 को 2022 में सेना में शामिल करने की तैयारी है।

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भारत ने एलएसी के अलावा, चीन से सटे अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख के कई इलाकों में ब्रह्मोस की तैनाती की है। सरकार की तैयारी 40 से अधिक सुखोई जेट विमान में ब्रह्मोस मिसाइल फिट करने की है। नेवी ने गत माह जंगी जहाज आईएनएस चेन्नई से ब्रह्मोस मिसाइल का सफल परीक्षण किया था। गहरे समुद्र में 400 किलोमीटर तक की दूरी पर मौजूद टारगेट को निशाना बनाया था। इसके अतिरिक्त भारतीय सेना और डीआरडीओ ने संयुक्त रूप से पोकरण में एक बार फिर देश में बने उन्नत युद्धक टैंक अर्जुन मार्क-1 ए का परीक्षण किया है।

सेना की मांग पर डीआरडीओ ने इस टैंक में 14 और नए फीचर्स भी शामिल किए हैं। इस टैंक का परीक्षण भी सभी मानकों पर खरा उतरा है। इसी के साथ अर्जुन टैंक मार्क 1-ए का सेना में शामिल होना सुनिश्चित हो गया है। वैसे तो वर्ष 2004 में सेना में देश में बने अर्जुन टैंक को शामिल किया गया था। बाद में सेना ने इसके उन्नत वर्जन के लिए कुल 72 तरह के सुधारों की अपेक्षा की थी। इसके बाद डीआरडीओ ने इसमें सुधार कर 4 नए टैंक तैयार किए हैं। इस हंटर किलर टैंक की खासियत यह है कि यह रणक्षेत्र में बिछाई गई माइंस को साफ करते हुए आसानी से आगे बढ़ सकता है। कंधे से छोड़ी जाने वाले एंटी टैंक ग्रेनेड और मिसाइल का इस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

केमिकल अटैक से बचाने के लिए इसमें विशेष तरह के सेंसर लगे हैं। केमिकल या परमाणु बम के विस्फोट की स्थिति में इसमें लगा अलार्म बज उठेगा। साथ ही टैंक के अंदर हवा का दबाव बढ़ जाएगा ताकि बाहर की हवा अंदर प्रवेश न कर सके। क्रू मेंबर के लिए ऑक्सीजन के लिए बेहतरीन फिल्टर लगाए गए हैं। इसके अलावा इसमें कई नए फीचर्स शामिल किए गए हैं, जो इस टैंक को बेहद मजबूत बनाते हैं। सटीक प्रहार करने में इसका कोई जोड़ नहीं है। वैसे भी मोदी सरकार में जिस तरह राफेल आदि युद्धक विमान खरीदे और सीमा पर तैनात किए गए हैं, उसे देखते हुए किसी भी शत्रु देश की हिम्मत भारत की ओर बुरी नजर से देखने की तो नहीं होगी। भारतीय सेना का मनोबल बढ़ा हुआ है। सरकार उनकी हिफाजत के हर संभव कदम उठा रही है। अब यह 1962 का भारत नहीं था जब सेना के पास युद्ध के लिए आवश्यक संसाधन नहीं है। आज का भारत दुनिया के साथ कदमताल कर रहा है।

 

वह किसी भी परिस्थिति से अपने बलबूते लड़ सकने में सक्षम है। भारतीय सेना जिस तरह मजबूत हो रही है। सैन्य साजो सामान बढ़ाए जा रहे हैं। उसका मनोबल बढ़ाने के लिए उच्चाधिकारी जिस तरह उनके बीच पहुंच रहे हैं, उससे पता चलता है कि आत्मबल से भरी भारतीय सेना किसी भी चुनौती से लड़ने का मद्दा रखती है। चीन अपने सैनिकों को हड्डी की वर्दी पहनाए या लोहे की, वह उनके भीतर भारतीयों जैसा आत्मविश्वास पैदा नहीं कर सकता। इन्हीं सर्दियों में चीन के जवान सीमा छोड़ने लगे थे, जबकि भारतीय सैनिक पूरी शिद्दत के साथ लेह-लद्दाख की सीमा पर डटे रहे। जिस देशस के सैनिकों का अपने देश की सरकार और जनता का साथ मिलता है,वह मौसम की चुनौतियों का वैसे भी सहजता से सामना कर लेता है।

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