असम-मिजोरम संघर्ष: अपनों की मौतों का प्रतिशोध लेना होगा, पुलिस- सरकार की भी नहीं सुनेंगे- बोले BJP नेता

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49 साल पुराने सीमा विवाद को लेकर मिजोरम और असम के बीच तनाव की स्थिति है, इसी बीच असम से भाजपा विधायक कौशिक राय ने बात बढ़ाने वाले बयान दिए हैं। राय ने कहा- अगर उनका राज्य जरूरी सामान-चीज की आवाजाही पड़ोसी सूबे में जाने से रोक दे, तो वहां के लोग भूखे मरने के कगार पर भी आ सकते हैं। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने अपने सूबे के लोगों से इस बात पर भी जोर देने के लिए कहा कि असम वालों को अपनों की मौतों का प्रतिशोध लेना चाहिए।उन्होंने कहा- हम सरकार या फिर पुलिस की नहीं सुनेंगे। हमें पूरी तरह से “आर्थिक नाकाबंदी” सुनिश्चित कर देनी चाहिए। बता दें कि बीते दिन असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने लोगों को मिजोरम की यात्रा से बचने का परामर्श दिया था।

मिजोरम के गृहमंत्री लालचमलियाना ने असम पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि असम पुलिस ने वैरेंगटे ऑटो-रिक्शा स्टैंड पर CRPF कर्मियों के ड्यूटी पोस्ट को जबरन पार किया और मिजोरम पुलिस के एक ड्यूटी पोस्ट को पलट दिया. उन्होंने कहा कि असम पुलिस ने मिजोरम पुलिस पर आंसू गैस के गोले दागे, और मिजोरम पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की।

इससे पहले, जोरमथांगा ने ट्विटर पर लिखा था कि असम पुलिस ने मिजोरम में नागरिकों पर लाठीचार्ज किया और आंसू गैस का इस्तेमाल किया. दोनों मुख्यमंत्रियों ने बातचीत के जरिये इसका हल निकालने को कहा था। असम और मिजोरम के बीच 165 किलोमीटर की सीमा है. एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ये विवाद सदियों पुराना है जब मिजोरम को असम के एक जिले लुशाई हिल्स के रूप में जाना जाता था।

विवाद 1875 की एक अधिसूचना से उपजा है, जो लुशाई पहाड़ियों को कछार के मैदानी इलाकों से अलग करता है, और दूसरा 1933 में, जो लुशाई पहाड़ियों और मणिपुर के बीच की सीमा का सीमांकन करता है। मिजोरम के एक मंत्री ने पिछले साल द इंडियन एक्सप्रेस को बताया था कि मिजोरम का मानना है कि सीमा का सीमांकन 1875 की अधिसूचना के आधार पर किया जाना चाहिए, जो बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन (BEFR) एक्ट, 1873 से लिया गया है।

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मिजो नेताओं ने इससे पहले, 1933 अधिसूचना के तहत सीमांकन के खिलाफ तर्क दिया है, क्योंकि इसमें मिजो समाज से सलाह नहीं ली गई थी।  रिपोर्ट के मुताबिक, असम सरकार 1933 के सीमांकन का पालन करती है, और यही संघर्ष का मुद्दा था।

Divyansh Singh

मिट्टी का तन, मस्ती का मन; छड़ भर जीवन, मेरा परिचय।

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