बिजली कंपनियों के कामकाज पर कैग ने उठाए सवाल !

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भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (कैग) ने प्रदेश में सरकार के नियंत्रण वाली बिजली कंपनियों के कामकाज पर सवाल उठाए हैं। बिजली कंपनियों के साल दर साल बढ़ रहे घाटे और निवेश के मुकाबले कमाई में कमी की ओर इशारा करते हुए कैग ने कहा है कि यह उनकी संभावित वित्तीय रुग्णता का संकेतक है। साथ ही कहा कि बिजली कंपनियों में लेखाओं की गुणवत्ता में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया है।

विधानमंडल में बृहस्पतिवार को 31 मार्च 2019 को समाप्त हुए वर्ष के लिए रखी गई कैग रिपोर्ट में बिजली कंपनियों की बदहाली का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में ऊर्जा क्षेत्र के 11 उपक्रमों में 31 मार्च 2019 तक कुल निवेश 1,97,352.73 करोड़ रुपये था। निवेश में पूंजी 59.75 प्रतिशत तथा दीर्घकालीन ऋण 40.25 प्रतिशत था। 2018-19 में बिजली कंपनियों को 14,398.96 करोड़ रुपये की हानि हुई।

रिपोर्ट के अनुसार ऊर्जा क्षेत्र के 11 उपक्रमों में निवेशित धनराशि का वर्तमान मूल्य 31 मार्च 2019 को 3,53,573.44 करोड़ आगणित होता है। 2000-2001 एवं 2018-19 के बीच की अवधि में इन उपक्रमों की कुल आय ऋणात्मक रही जो यह दर्शाता है कि निवेशित धनराशि से राजस्व जुटाने के स्थान पर ये उपक्रम सरकार के धन की लागत भी वसूल नहीं कर पाए। 2018-19 के दौरान राज्य सरकार के निवेश पर बिजली कंपनियों को कम से कम 21,579.60 करोड़ रुपये की कमाई करनी थी, लेकिन 14,398.96 करोड़ रुपये का घाटा उठाना पड़ा।

कैग रिपोर्ट के अनुसार उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना (उदय) के अंतर्गत सुधार के लिए तय किए गए लक्ष्यों को बिजली कंपनियां हासिल नहीं कर सकीं। उदय के प्रावधानों के तहत राज्य सरकार ने 9,783.44 करोड़ रुपये की पूंजी, 19,566.88 करोड़ अनुदान और 9,783.44 करोड़ ऋण उपलब्ध कराते हुए 2015-16 और 2016-17 के दौरान 39,133.76 करोड़ रुपये के कुल ऋण का जिम्मा अपने ऊपर ले लिया था।

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कैग ने यूपी पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन द्वारा गाजीपुर में एक ट्रांसमिशन लाइन के निर्माण की सही प्लानिंग न होने पर भी सवाल उठाया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसकी वजह से निर्माण की लागत एवं ऋण पर ब्याज के रूप में 2.08 करोड़ की हानि हुई और इसके लिए खरीदी गई सामग्री की वजह से 4.21 करोड़ की धनराशि फंस गई। सीएजी ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में ठेकेदार से ब्याजमुक्त मोबलाइजेशन अग्रिम की वसूली समयबद्ध तरीके से न किए जाने की वजह से हुई 99.27 करोड़ रुपये के नुकसान पर भी सवाल खड़ा किया है।

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