यह नाक की नहीं, नाश की लड़ाई है…जिंदगी की जंग है- भारतीय किसान यूनियन

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कृषि कानूनों पर केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच पिछले सात महीनों से तनातनी जारी है। दोनों पक्ष अपने शर्तों के साथ अड़े हुए हैं। इस बीच भाकियू के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि यह नाक की लड़ाई नहीं है, बल्कि नाश की लड़ाई है। जिन्दा रहने की लड़ाई है। उन्होंने आगे कहा- यह जिंदगी की जंग है। जिस हिसाब से बाजार बढ़े हैं, उसी हिसाब से हमारी भी कीमतें बढ़नी चाहिए।

गौरतलब है कि मानसून सत्र के दौरान किसानों ने संसद कूच का ऐलान किया है। इससे पहले टिकैत ने कहा था कि किसान था है और रहेगा लेकिन सरकार का कुछ अता पता नहीं है। केंद्र सरकार द्वारा लागू तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत का कहना है कि अब उनके निशाने पर उत्तर प्रदेश की सरकार है और उनका संगठन राज्य के आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा को कुर्सी से उतार कर ही दम लेगा।

टिकैत ने कहा कि उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार अब भारतीय किसान यूनियन के निशाने पर है। संगठन आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोलेगा और इस सरकार को हटा करके ही दम लेगा। टिकैत ने कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय किसान यूनियन भाजपा के खिलाफ माहौल बनाने में कामयाब रही थी, परिणाम स्वरूप पार्टी को शिकस्त का सामना करना पड़ा था। ठीक उसी तरह उत्तर प्रदेश में भी किया जाएगा।

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टिकैत ने स्पष्ट किया कि भारतीय किसान यूनियन न तो चुनाव लड़ेगी और न ही किसी दूसरी पार्टी का समर्थन करेगी, लेकिन सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ माहौल बनाने का काम अवश्य करेगी। नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए टिकैत ने कहा कि केंद्र सरकार के पास अब भी वक्त है। वह तीनों कानून वापस ले ले। उन्होंने बताया कि आगामी पांच सितंबर को मुजफ्फरनगर में किसान मोर्चा की महापंचायत में किसान आंदोलन की आगे की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

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