लखनऊ/गौतमबुद्ध नगर। उत्तर प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण ने वर्ष 2026 की अर्धवार्षिक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के रियल एस्टेट (Real Estate) क्षेत्र में लगातार अच्छी प्रगति देखने को मिल रही है। इस दौरान नई परियोजनाओं के पंजीकरण में वृद्धि हुई है, नए आवासों की संख्या बढ़ी है, निवेश में इजाफा हुआ है और घर खरीददारों के हितों की सुरक्षा के लिए विवादों का तेजी से समाधान और धनवापसी का काम भी प्रभावी ढंग से किया गया है।
रिपोर्ट से स्पष्ट है कि बेहतर नियम व्यवस्था, मजबूत बुनियादी ढांचे और निवेशकों के बढ़ते भरोसे के कारण उत्तर प्रदेश देश के सबसे तेजी से विकसित और पारदर्शी रियल एस्टेट बाजारों में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। जनवरी से जून 2026 के बीच उत्तर प्रदेश रेरा में 143 नई रियल एस्टेट परियोजनाएं पंजीकृत हुईं, जबकि वर्ष 2025 की इसी अवधि में 134 परियोजनाएं पंजीकृत हुई थीं। सबसे अधिक परियोजनाएं लखनऊ (37) में पंजीकृत हुईं। इसके बाद गौतम बुद्ध नगर (27), गाजियाबाद (19), आगरा (10), मथुरा (10), वाराणसी (7), झांसी (3), बाराबंकी (3), बरेली (3) और प्रयागराज (3) का स्थान रहा।
इन परियोजनाओं में 46,049 आवासीय इकाइयों के निर्माण का प्रस्ताव है, जिनमें लगभग 31,952 करोड़ रुपये का निवेश होगा। वर्ष 2025 की पहली छमाही में 35,082 आवासीय इकाइयों का प्रस्ताव था।
परियोजनाओं और आवासों की बढ़ती संख्या यह दर्शाती है कि उत्तर प्रदेश की नीतियों, रेरा की व्यवस्था और तेजी से विकसित हो रहे बुनियादी ढांचे पर डेवलपर्स और निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अब उत्तर प्रदेश का रियल एस्टेट विकास केवल एनसीआर तक सीमित नहीं है। जहां एनसीआर में विशेष रूप से प्रीमियम और लक्जरी परियोजनाओं में बड़े निवेश जारी हैं, वहीं एनसीआर के बाहर भी आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है।
प्रदेश की राजधानी लखनऊ वर्ष 2026 की पहली छमाही में 37 नई परियोजनाओं के साथ सबसे आगे रहा है। इससे स्पष्ट है कि लखनऊ डेवलपर्स और घर खरीदने वालों दोनों के लिए तेजी से पसंदीदा शहर बन रहा है। हालांकि गौतमबुद्ध नगर अब भी कुल निवेश और आवासीय इकाइयों की संख्या के मामले में सबसे आगे है, क्योंकि यहां बड़े पैमाने पर लक्जरी और सुपर लक्जरी परियोजनाएं विकसित हो रही हैं। गाजियाबाद में परियोजनाओं की संख्या अपेक्षाकृत कम होने के बावजूद निवेश और आवासीय इकाइयों की संख्या काफी अधिक रही, जिससे एनसीआर क्षेत्र में मांग बनी हुई है।
जनवरी-जून 2026 में परियोजनाओं की स्थिति
क्रमांक शहर परियोजनाएं निवेश (करोड़ रु.) आवासीय इकाइयां
1) लखनऊ 37- 3,834- 9,872
2) गौतमबुद्ध नगर 27- 15,678- 13,160
3) गाजियाबाद 19- 6989- 9,500
4) आगरा 10- 1,034- 3,567
5) मथुरा 10- 698- 1,807
6) वाराणसी 7- 715- 655
7) बाराबंकी 3- 428 – 815
8) प्रयागराज 3- 292- 410
9) झांसी 3- 105- 245
10) गोरखपुर 2- 71.5 – 474
पिछले तीन वर्षों में लगातार बढ़ा रियल एस्टेट क्षेत्र
अर्धवार्षिक रिपोर्ट के अनुसार पिछले तीन वर्षों में उत्तर प्रदेश का रियल एस्टेट क्षेत्र लगातार मजबूत हुआ है। वर्ष 2023 में 197, वर्ष 2024 में 259 और वर्ष 2025 में 308 परियोजनाएं पंजीकृत हुईं। वर्ष 2025 में परियोजनाओं की संख्या वर्ष 2024 की तुलना में 19 प्रतिशत अधिक रही। आवासीय इकाइयों की संख्या वर्ष 2023 में 55,297, वर्ष 2024 में 69,365 और वर्ष 2025 में 84,976 रही। वर्ष 2025 में यह संख्या वर्ष 2024 की तुलना में 22.5 प्रतिशत अधिक रही।
वर्ष 2026 की पहली छमाही में प्रस्तावित 46,049 आवासीय इकाइयों को जोड़ने पर वर्ष 2023 से अब तक कुल 2,55,687 आवासीय इकाइयां बाजार में लाई जा चुकी हैं।
पूंजी निवेश वर्ष 2023 में 28,411 करोड़ रुपये से बढ़कर वर्ष 2024 में 44,526 करोड़ रुपये और वर्ष 2025 में 68,328 करोड़ रुपये हो गया। वर्ष 2025 में निवेश में वर्ष 2024 की तुलना में 53.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह आंकड़े बताते हैं कि बेहतर नीतियों, मजबूत आधारभूत सुविधाओं और संस्थागत व निजी निवेशकों की बढ़ती भागीदारी से उत्तर प्रदेश का रियल एस्टेट क्षेत्र लगातार आगे बढ़ रहा है।
उत्तर प्रदेश रेरा लगातार घर खरीददारों को राहत दिलाने के लिए प्रभावी कार्यवाही कर रहा है। जिला प्रशासन की सहायता से 6,411 मामलों में 1,623.28 करोड़ रुपये की धनराशि घर खरीददारों के बैंक खातों में वापस कराई गई। रिकवरी सर्टिफिकेट जारी होने के बाद बिल्डरों से समझौते के माध्यम से 1,801 आवंटियों को 550.50 करोड़ रुपये दिलाए गए। इस प्रकार कुल 8,212 मामलों में 2,173.78 करोड़ रुपये घर खरीददारों को वापस दिलाए गए। इससे उन हजारों लोगों को बड़ी राहत मिली जिनका पैसा लंबे समय से रुकी हुई या विलंबित परियोजनाओं में फंसा हुआ था। उत्तर प्रदेश रेरा ने संपत्ति से जुड़े विवादों के त्वरित समाधान के माध्यम से लोगों का भरोसा और मजबूत किया है। रिपोर्ट अवधि में 11,558 मामलों में 6,032.42 करोड़ रुपये मूल्य के विवादों का निस्तारण किया गया।
इनमें शामिल हैं—
3,237 मामलों में रेरा पीठों के माध्यम से 1,958 करोड़ रुपये के विवादों का समाधान।
1,648 मामलों में सुलह मंच के माध्यम से 657 करोड़ रुपये के विवादों का समाधान।
6,673 आवंटियों के मामलों में ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आपसी सहमति से 3,417.42 करोड़ रुपये के विवादों का निस्तारण।
रेरा द्वारा सुलह और आपसी समझौते को बढ़ावा देने से विवादों का तेजी से समाधान हो रहा है और लंबी कानूनी प्रक्रिया से भी बचाव हो रहा है। मई 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू किया गया ‘रेरा संवाद’ अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हितधारकों से संवाद का प्रभावी मंच बन चुका है। अब तक 206 सत्र आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें घर खरीददारों, बिल्डरों और अन्य हितधारकों की 5,375 शिकायतों का समाधान किया गया है।
इस पहल से लोगों को आसानी से अपनी बात रखने, पारदर्शिता बढ़ाने और समय पर शिकायतों के समाधान में मदद मिल रही है। अर्धवार्षिक रिपोर्ट 2026 यह दर्शाती है कि उत्तर प्रदेश रेरा पारदर्शी, जवाबदेह और उपभोक्ता हितों पर आधारित रियल एस्टेट व्यवस्था विकसित करने के लिए लगातार काम कर रहा है।
उत्तर प्रदेश रेरा के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने रिपोर्ट पर कहा कि अर्धवार्षिक रिपोर्ट यह दिखाती है कि उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट क्षेत्र में घर खरीददारों और निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। परियोजनाओं के पंजीकरण, आवासीय इकाइयों और निवेश में लगातार हो रही वृद्धि राज्य सरकार की विकासोन्मुखी नीतियों व उत्तर प्रदेश रेरा की पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध परियोजना पूर्ण कराने की प्रतिबद्धता का परिणाम है।
