FCRA संशोधन बिल (FCRA Amendment Bill) को लेकर विपक्षी दलों के बीच एक राय नहीं बन पा रही है। कांग्रेस जहां बिल को पूरी तरह वापस लेने की मांग कर रही है, वहीं टीएमसी, डीएमके और बीजेडी इसे जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) के पास भेजने के पक्ष में हैं। एनसीपी (एसपी) ने भी बिल वापस लेने या जेपीसी जांच कराने की मांग की है। ऐसे में सरकार विपक्षी दलों के साथ सहमति बनाने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस ने खोला मोर्चा
एफसीआरए बिल पर कांग्रेस का रुख सबसे सख्त है। पार्टी का कहना है कि सरकार को इसे वापस लेना चाहिए। वहीं विपक्षी दलों के बीच हुई बातचीत में बिल को लेकर अलग-अलग राय सामने आई है।
टीएमसी ने राज्यसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में पहले बिल को जेपीसी के पास भेजने की मांग रखी थी। हालांकि, बाद में पार्टी की ओर से बिल वापस लेने की मांग भी सामने आई। डीएमके का कहना है कि बिल को या तो वापस लिया जाए या फिर इसकी विस्तृत जांच जेपीसी से कराई जाए।
JPC की मांग पर कई दल एक साथ
बीजेडी ने भी एफसीआरए संशोधन बिल को जेपीसी के पास भेजने की मांग की है। वहीं एनसीपी (एसपी) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने भी केंद्र से बिल वापस लेने या जेपीसी को सौंपने की अपील की है।
सुप्रिया सुले ने कहा कि विदेशी फंडिंग को हर बार संदेह की नजर से नहीं देखा जा सकता। इस बीच सरकार विपक्षी दलों से बातचीत के जरिए बिल को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।
संसद में आगे की राह पर नजर
एफसीआरए संशोधन बिल 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था। इसमें विदेशी योगदान प्राप्त करने वाली संस्थाओं का एफसीआरए रजिस्ट्रेशन खत्म होने की स्थिति में उनकी संपत्तियों के प्रबंधन और निगरानी के लिए नई व्यवस्था का प्रस्ताव है।
सोमवार की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में एफसीआरए बिल और प्रस्तावित परिसीमन बिल एजेंडे में शामिल नहीं थे। ऐसे में सरकार के पास विपक्ष के साथ सहमति बनाकर बिल को जेपीसी के पास भेजने का विकल्प मौजूद है।
हालांकि, विपक्षी दलों के अलग-अलग रुख के चलते बिल की आगे की तस्वीर अभी साफ नहीं है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार इसे जेपीसी को भेजती है या संसद में इसे लेकर नया राजनीतिक टकराव देखने को मिलता है।
