उत्तर प्रदेश के इटावा निवासी मौलाना जरजिश अंसारी (Jarjish Ansari) के एक बयान को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। झारखंड में 23 जून को आयोजित एक तकरीर के दौरान उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को मुस्लिम बताते हुए भगवद गीता के एक श्लोक की ऐसी व्याख्या की, जिसे लेकर हिंदू संगठनों और संत समाज ने कड़ी आपत्ति जताई है। बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद ब्रज क्षेत्र में विरोध तेज हो गया है।
संत समाज ने जताई कड़ी नाराजगी
श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले के पक्षकार महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि यह बयान करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों की आस्था को ठेस पहुंचाने वाला है। उनके मुताबिक, मौलाना ने न केवल भगवान श्रीकृष्ण के बारे में गलत टिप्पणी की, बल्कि भगवद गीता के श्लोक का भी गलत अर्थ प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा कि इस्लाम का इतिहास करीब 1400 वर्ष पुराना है, जबकि भगवान श्रीकृष्ण का अवतार हजारों वर्ष पहले हुआ था। ऐसे में बिना जानकारी के धार्मिक ग्रंथों पर टिप्पणी करना उचित नहीं है। उन्होंने मौलाना से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।
‘ऐसे लोगों को पाकिस्तान भेज देना चाहिए’
श्रीकृष्ण जन्म संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी ने भी बयान की निंदा करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण सनातन संस्कृति के केंद्र हैं और उनके बारे में इस तरह की टिप्पणी स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि जो लोग जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को आहत करते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
साध्वी इंदुलेखा ने भी इसी तरह की मांग करते हुए कहा कि आस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कदम उठाए जाने चाहिए। वहीं अनमोल दास महाराज ने भी बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए प्रशासन से कार्रवाई की मांग की।
भाजपा ने भी उठाए सवाल
भाजपा नेता मनीष शुक्ला ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण करोड़ों लोगों की श्रद्धा के प्रतीक हैं और उनके बारे में इस तरह की टिप्पणी बेहद आपत्तिजनक है। उन्होंने आशंका जताई कि यह बयान किसी सुनियोजित साजिश का हिस्सा भी हो सकता है, जिसकी जांच होनी चाहिए।
उन्होंने झारखंड में इस मामले में मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में सख्ती जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई भी धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ करने की हिम्मत न कर सके।
वीडियो वायरल होने के बाद बढ़ा विरोध
वीडियो सामने आने के बाद मथुरा, वृंदावन और ब्रज क्षेत्र के कई हिंदू संगठनों ने भी विरोध दर्ज कराया है। प्रदर्शन की चेतावनी दी गई है और प्रशासन से मांग की जा रही है कि पूरे मामले की जांच कर उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।
फिलहाल, मौलाना जरजिश अंसारी की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
