हिंदी से न्याय आंदोलन के पुरोधा चंद्रशेखर उपाध्याय को मातृशोक, जन्मभूमि में ही पंचतत्व में विलीन

670 0

लुधियाना/देहारादून। दलितों के उत्थान एवं उन्हें बराबरी का दर्जा दिलवाने के लिए आजीवन संघर्षरत एवं प्रयासरत रहीं सुप्रसिद्ध समाजसेविका श्रीमती पुष्पलता उपाध्याय (Pushpalata Upadhyay)  ने 11 जून की देर-रात्रि पंजाब के लुधियाना शहर में अन्तिम सांस ली ।

पंजाब के अमृतसर में जन्मी श्रीमती उपाध्याय को नियति अन्तिम समय में उनकी जन्मभूमि में ही ले आयी, जन्म के समय उनके पिता पण्डित ब्रजमोहन तिवारी अमृतसर में रेलवे के बड़े ओहदे पर तैनात थे । वह प्रख्यात न्यायविद् एवम् ‘हिन्दी से न्याय ‘ (Hइस देशव्यापी अभियान के नेतृत्व-पुरुष चन्द्रशेखर पण्डित भुवनेश्वर दयाल उपाध्याय (CS Upadhyay) की मां है।

वह संघ के प्रचारक एवम्  भारतीय-जनसंघ के सबसे कम आयु के राष्ट्रीय-मंत्री रहे पण्डित के.सी. उपाध्याय को ब्याही थीं, विवाह से पूर्व राष्ट्र सेविका समिति की कार्यकर्ती के दायित्व का निर्वहनभी उन्होंने किया, विवाह के पश्चात भारतीय जनसंघ में राजमाता विजया राजे सिंधिया एवम् हींगोरानी के साथ जन-आन्दोलनों  में सक्रिय रहीं, बाद में वह तत्कालीन संघ प्रमुख गुरु गोलवरकर के शुभाशीष से दलितों को उनका हक दिलाने के लिए लड़ती रहीं ।

वह भारतीय-जनसंघ के सबसे बड़े परिवार में ब्याही थीं, परिवार में संघ एवम् भारतीय-जनसंघ के राष्ट्रीय नेताओं के अलावा प्रख्यात सोशलिस्ट डाक्टर राम मनोहर लोहिया, राजनारायण चौधरी चरण सिंह समेत  अनेक बड़ी राजनीति हस्तियों का लगातार आना-जाना रहता था, अपने जीवनकाल में उन्होंने सभी के लिए भोजन पकाया।

रामपुर तिराहे का बलिदानी-स्मारक मेरे लिए एक मंदिर है : चंद्रशेखर उपाध्याय

पूर्व प्रधानमंत्री इन्दिरा गाँधी उनके संघर्ष से बहुत  प्रभावित थीं, उन्होंने 1975 में उन्हें कांग्रेस में आने का निमंत्रण दिया था, उस समय उनके पति मीसा-बन्दी के रूप में जेल में बन्द थे, पूरा घर सील था, उनके निकट  रिश्तेदार आगरा से कांग्रेस के विधायक थे, उन्होंने इन्दिरा जी को कहा था,’ मैं आपकी नेतृत्व-क्षमता से चमत्कृत हूँ, लेकिन मैं आपके आपातकाल लागू करने के फैसले से सहमत नहीं हूँ,’ इन्दिरा जी ने इस पर उनकी प्रशंसा की थी, उन्होंने आपातकाल के कारण अल्पायु में अपने पति को खोया था ।

आज दोपहर तीन बजे लुधियाना के सिविल-लाइन्स स्थित शमशान-घाट  पर उनके पुत्र चन्द्रशेखर ने उन्हें मुखागिन दी बड़ी संख्या में अश्रुपूरित लोगों ने उन्हें अन्तिम विदाई दी, बड़ी संख्या में मौजूद दलितों ने अपनी नेता को अन्तिम प्रणाम किया ।

Related Post

ई-कामर्स कंपनियां

ई-कामर्स कंपनियां 20 अप्रैल से जरूरी सामानों की ही कर पायेंगी आपूर्ति : गृह मंत्रालय

Posted by - April 19, 2020 0
नई दिल्ली। गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है ई- कामर्स कंपनियों को 20 अप्रैल के बाद भी गैर जरूरी सामान…
CM Dhami

मुख्यमंत्री धामी बोले- उत्तराखंड का समग्र विकास करेगी सरकार, सभी विधायकों से मांगे 10-10 प्रस्ताव

Posted by - March 22, 2024 0
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (CM Dhami) ने राज्य के सभी क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए सभी विधायकों से…
CM Yogi

पूरे रास्ते जयश्री राम की गूंज, बजे गीत- यूपी में फिर से हम भगवा लहराएंगे

Posted by - April 16, 2024 0
सहारनपुर : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi) के रोड शो में उत्साहित सहारनपुर ने उनके सामने बोला- अबकी…