कलावती

‘खुले में शौचालय अभियान’ चलने वाली कलावती नारी शक्ति पुरस्कार से हुई सम्मानित

1178 0

नई दिल्ली। आज से 32 साल पहले देश में विकास की सीढ़ी शायद उतनी ही पीछे थी जितनी की काफी साल पहले थी। लेकिन इतनी अविकसित देश होने के बाद भी अगर कोई स्वच्छता पर विशेष ध्यान रखते हुए लोगों को खुले में शौच न करने की सीख दे, तो शायद वह कोई महान ही हो सकता है। तो बता दें कि उस स्वच्छता वीरांगना का नाम कलावती है, जो आज राजमिस्त्री का काम करती हैं। अपने काम के कारण ही वो स्वच्छता वीरांगना के नाम से जानी जाती हैं।

कलावती को आत्म निर्भर बनने की प्रेरणा उनके पति जयराज सिंह से मिली। पति भी राजमिस्त्री थे। उनके निधन के बाद कलावती ने अपना पूरा जीवन खुले में शौचालय अभियान को दे दिया। रविवार को जब राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें दिल्ली में नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया तो फिर से उनके संघर्ष की कहानी लोगों के सामने आ गई। आज से करीब 42 साल पहले कलावती सीतापुर से अपने पति के साथ कानपुर आई थीं।

जेके मंदिर के पीछे राजापुरवा में रहते हुए वह भी अपने पति के साथ भवन निर्माण में मजदूरी करने लगी। इसी दौरान उन्होंने पति का हाथ बंटाने के लिए राजमिस्त्री के रूप में काम करना शुरू किया। कुछ समय बाद वह श्रमिकों के कल्याण के लिए गठित संस्था श्रमिक भारती से जुड़ गईं। इसके बाद कलावती ने पीछे नहीं देखा। वह अपने साथ और भी महिलाओं को जोड़कर पूरा कुनबा तैयार कर लिया।

खुले में बिकने वाली मिठाइयों पर भी एक्सपायरी डेट लिखना अनिवार्य

कलावती यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान से भी पहले से ही श्रमिक भारती के जरिए चला रही थीं। मोदी की मुहिम ने उन्हें और ताकत दी। जिसका परिणाम आज सभी के सामने है। सबसे पहले उन्होने करीब तीन लाख की लागत से एक सामुदायिक शौचालय का निर्माण किया था। अब तक वह 40 हजार से अधिक शौचालयों का निर्माण कर चुकी है।

कलावती ने जेके मंदिर के समीप स्थित राजापुरवा बस्ती से शौचालय निर्माण अभियान की शुरुआत किया। इसके साथ ही राखी मंडी, जूही, समेत कई जगह सामुदायिक और एकल शौचालय बनवाकर लोगों को खुले में शौच से मुक्ति दिलाई। शहरी बस्तियों के बाद उन्होंने गांवों में भी इस मुहिम को चलाया।

पति की मौत के बाद वह वर्ष 2015 से अपनी बेटी और दामाद के साथ शिवराजपुर स्थित कुंवरपुर गांव में रह रही हैं। श्रमिक भारती के अमिताभ ने बताया कि कलावती में अपने काम के प्रति लगन थी, जिसकी वजह से वह इस मुकाम पर पहुंची।

Related Post

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद

लोगों से ही बनता है राष्ट्र,भारत के लोग चलाते हैं गणतंत्र : राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद

Posted by - January 25, 2020 0
नई दिल्ली। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा कि विधानमंडल,…
CM Dhami

सीएम धामी ने प्रदेश में भर्ती प्रक्रिया तेज करने के दिए निर्देश

Posted by - November 5, 2022 0
देहारादून। मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी (CM Dhami) ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि प्रदेश में भर्ती प्रक्रियाओं में तेजी लाई…
CM Dhami

जलापूर्ति की कार्य योजना आगामी 30 वर्षों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए बनाई जाए: मुख्यमंत्री

Posted by - April 3, 2025 0
देहरादून। आगामी 30 साल की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए राज्य में जलापूर्ति के लिए कार्ययोजना बनाई जाए। वर्षा…
rajnath singh

युद्ध इतिहासों को सार्वजनिक करने की राजनाथ सिंह ने दी स्वीकृति

Posted by - June 13, 2021 0
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने रक्षा मंत्रालय द्वारा युद्ध और अभियानों से जुड़े इतिहास को आर्काइव करने, उन्हें…
दूसरे दिन 100 से अधिक शोध पत्रों का किया प्रस्तुतीकरण

दूसरे दिन 100 से अधिक शोध पत्रों का किया प्रस्तुतीकरण

Posted by - March 18, 2021 0
प्रो. अनिल शुक्ला पूर्व कुलपति, एमजेपी रूहेलखण्ड विश्वविद्यालय बरेली ने कहा कि शारीरिक शिक्षा और खेल नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति…