Haridwar Kumbh

कोविड-19 के बढ़ते खतरे के चलते 250 विदेशी संतों की संन्यास दीक्षा पर लगा ब्रेक

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हरिद्वार। कोविड-19 के बढ़ते खतरे के चलते हरिद्वार महाकुंभ (Haridwar Kumbh 2021) में विदेशी संतों के संन्यास दीक्षा पर ब्रेक लग गया है। अमेरिका और रूस समेत दुनियाभर से 250 विदेशियों ने संन्यास दीक्षा संस्कार के लिए श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा को सहमति प्रस्ताव भेजे हैं। जूना अखाड़ा ने प्रस्तावों को फिलहाल टाल दिया है। जूना अखाड़ा पांच अप्रैल को नागा संन्यासियों को दीक्षा देगा। इसमें देशभर से तीन हजार नागाओं को दीक्षा दी जाएगी।

अखाड़ा स्तर पर इसकी तैयारियां शुरू हो गई हैं। श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा संन्यासियों का सबसे बड़ा अखाड़ा है। दुनियाभर के संत और अनुयायी अखाड़ा से जुड़े हैं। हर कुंभ में देश और विदेश से आने वाले संतों को संन्यास की दीक्षा दी जाती है। हरिद्वार कुंभ में कोविड का साया मंडरा रहा है। देश-दुनिया में कोरोना के केस बढ़ने से अखाड़ा ने संन्यास दीक्षा समारोह को सीमित कर दिया है। सुरक्षा के लिहाज से विदेशी संतों के हरिद्वार आने से मना कर दिया है।

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जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक एवं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरिगिरि के मुताबिक रूस, अमेरिका, ब्रिटेन, इंग्लैंड, जर्मनी, पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका समेत कई देशों से 250 लोगों ने हरिद्वार कुंभ में संन्यास की दीक्षा के लिए सहमति आवेदन किए हैं। अखाड़ा की कार्यकारिणी ने फिलहाल विदेशियों के प्रस्ताव को टाल दिया है और विदेशियों को आने पर मनाही कर दी है।

श्रीमहंत हरिगिरि के मुताबिक नागा संन्यासियों के संन्यास की दीक्षा का पांच अप्रैल को मुहूर्त निकाला गया है। समारोह में तीन हजार नागाओं को संन्यास की दीक्षा दी जाएगी। इसके लिए देशभर में फैली अखाड़ा की शाखाओं के माध्यम से पंजीकरण कराया जा रहा है। पांच अप्रैल को जूना अखाड़ा की प्राचीन शाखा दुख हरण हनुमान मंदिर मायापुरी हरिद्वार स्थित घाट पर संस्कार की दीक्षा होगी।

सुबह आठ बजे से आयोजन होगा। सबसे पहले जनेऊ-मुंडन संस्कार होगा। विधि विधान से सनातनी बनाया जाएगा। इसके बाद पिंडदान कराया जाएगा। दीक्षा के बाद संत घर-परिवार की मोहमाया त्यागकर सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार करेंगे। 25 अप्रैल को भी संन्यास दीक्षा संस्कार होगा। जो संत पांच अप्रैल को होने वाले संस्कार में शामिल नहीं हो पाएंगे वो 25 अप्रैल में आएंगे।

संन्यास की दीक्षा लेने के बाद नागा संत अपनी साधना में लीन हो जाएंगे। संतों को अखाड़ा की शाखाओं में विभाजित कर दिया जाएगा। नागा संत कुंभ को छोड़कर अन्य मेलों में नहीं दिखते हैं। एक शहर में बारह साल बाद कुंभ होता है। नागा कुंभ अवधि में आते हैं और बाकी समय अखाड़ा की शाखा क्षेत्र में साधना करते हैं।

श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा की यूरोप और एशिया के कई देशों में संपत्ति है। सबसे अधिक पांच लाख हेक्टेयर भूमि नेपाल में है। अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक श्रीमहंत हरिगिरि बताते हैं, विदेशी अनुयायियों ने ही जमीनें दान में दी हैं। रूस समेत कई देशों के अनुयायियों ने वहां मंदिर बनाने की सहमति मांगी है। विदेशी हरिद्वार महाकुंभ में शामिल होना चाहते हैं, हालांकि कोविड के चलते अखाड़ा की कार्यकारिणी की ओर से अभी उनको आने की सहमति नहीं दी है।

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