राष्ट्रीय विज्ञान दिवस

भविष्य में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आनुवंशिक हस्तक्षेप अति आवश्यक

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लखनऊ। सीएसआईआर-राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान ने शुक्रवार को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया । इस वर्ष राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की थीम ‘ज्ञान क्षेत्र में महिलाएं’ है।

वैज्ञानिकों के सामने वर्ष 2050 तक खाद्य उत्पादन दोगुना करने की  है चुनौती

इस अवसर पर डॉ. लीना त्रिपाठी प्रधान वैज्ञानिक इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ ट्रॉपिकल एग्रीकल्चर केन्या समारोह की मुख्य अतिथि थीं, जिन्होंने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर फसल सुधार में आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी का अनुप्रयोग केले पर शोधकार्य विषय पर व्याख्यान दिया। इस अवसर पर श्रोता के रूप में संस्थान के वैज्ञानिक शोधकर्ता और छात्र उपस्थित थे। डॉ. त्रिपाठी ने संस्थान को उसकी उपलब्धियों के लिए बधाई देते हुये अपने व्याख्यान में बताया कि तेजी से बढती जनसंख्या को देखते हुए सभी के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना विश्व के लिए एक बड़ी चुनौती है। हमारे सामने वर्ष 2050 तक खाद्य उत्पादन दोगुना करने की चुनौती है।

जलवायु परिवर्तन, बीमारियों एवं अन्य जैविक हमलों के कारण खाद्य उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहे हैं जिनका तत्काल समाधान ढूंढे जाने की आवश्यकता

वहीं दूसरी ओर जलवायु परिवर्तन, बीमारियों एवं अन्य जैविक हमलों के कारण खाद्य उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहे हैं जिनका तत्काल समाधान ढूंढे जाने की आवश्यकता है। उन्होंने केले के पौधे का उदाहरण देते हुए बताया कि केले के फल पौष्टिक होने के कारण भोजन के रूप में काफी प्रचलित हैं। लेकिन कीटों एवं फफूंद जनित बीमारियों के कारण उत्पादन क्षमता एवं वास्तविक उत्पादन में काफी अंतर आ जाता है। बहुत बड़े स्तर पर फसल की बर्बादी होती है। ऐसे में त्वरित समाधान के लिए ऐसे पौधों में प्रतिरोधक क्षमता विकसित करना ही सर्वश्रेष्ठ लागत प्रभावी उपाय है। उन्होंने इस दिशा में आनुवंशिक अभियांत्रिकी एवं आणुविक जैविकी के द्वारा फसल विकास के क्षेत्र में किये गये कार्यों के बारे में बताया।

निदेशक प्रो. एस के बारिक ने अपने स्वागत सम्बोधन में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के बारे चर्चा की

इससे पूर्व संस्थान के निदेशक प्रो. एस के बारिक ने अपने स्वागत सम्बोधन में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के बारे चर्चा करते हुए कहा कि आज ही के दिन प्रोफेसर सर सीवी रमन ,चंद्रशेखर वेंकटरमन ने सन् 1928 में कोलकाता में एक उत्कृष्ट वैज्ञानिक खोज की थी,जो रमन प्रभाव के रूप में प्रसिद्ध है। इस कार्य के लिए उनको 1930 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उनकी इस उपलब्धि की याद में वर्ष 1986 से प्रतिवर्ष देश भर में 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिवस का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों को विज्ञान के प्रति आकर्षित करनाए विज्ञान के क्षेत्र में नए प्रयोगों के लिए प्रेरित करना तथा विज्ञान एवं वैज्ञानिक उपलब्धियों के प्रति सजग बनाना है। उन्होंने इस वर्ष की विज्ञान दिवस की थीम पर चर्चा करते हुए विज्ञान क्षेत्र में अपने देश की कुछ महान महिला वैज्ञानिकों के बारे में भी जानकारी दी।

संस्थान की विभिन्न प्रयोगशालाएं, वनस्पति संग्रहालय, पुस्तकालय, वानस्पतिक उद्यान आदि आम जनता के लिए खुले रहे

इस अवसर पर संस्थान की विभिन्न प्रयोगशालाएं, वनस्पति संग्रहालय, पुस्तकालय, वानस्पतिक उद्यान आदि आम जनता के लिए खुले रहे जिसका लाभ उठाते हुए लखनऊ एवं आस-पास के जिलों से लगभग 600 छात्रों एवं शिक्षकों ने संस्थान का भ्रमण किया । इस अवसर पर छात्र.वैज्ञानिक संवाद का आयोजन भी किया गया । इसके अंतर्गत डॉ विवेक श्रीवास्तव एवं डॉ. विनय साहू द्वारा छात्रों की वैज्ञानिक जिज्ञासा पर संवाद किया गया। जिन्होंने विद्यार्थियों को संस्थान की गतिविधियों, उपलब्धियों एवं कार्यक्रमों से अवगत कराया ताकि उनके अन्दर वैज्ञानिक रूचि जाग सके एवं व एक वैज्ञानिक की दृष्टि से अपने आस पास की चीजों के बारे में जाने एवं समझें तथा मन में उठ रहे प्रश्नों के उत्तर तलाशने की कोशिश करें।

कार्यक्रम के अंत में संस्थान के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद शिर्के ने मुख्य अतिथि को ज्ञानवर्धक व्याख्यान देने के धन्वाद ज्ञापित किया।

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