'निर्मल' बजट

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के ‘निर्मल’ बजट में हर भारतीय की चिंता

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सियाराम पांडेय ‘शांत’

बजट भाषण छोटा है या बड़ा, यह मायने नहीं रखता है। मायने यह रखता है कि वह किसे पसंद आया और किसे नहीं? पसंदगी और नापसंदगी की वजह क्या है? केंद्रीय वित्तमंत्री ने अपने कार्यकाल का दूसरा बजट पेश करते हुए कई रिकॉर्ड तोड़े हैं। यह और बात है कि इन रिकॉर्डों के लिए प्रतिपक्ष ने उन्हें बधाई तो नहीं दी। अलबत्ते उनकी आलोचना जरूर की है। बजट में सब कुछ अच्छा ही नहीं होता है। बजट एक योजना है जिससे देश को साल भर सहजता से चलाने की रणनीति बनाई जाती है। धनार्जन के साथ ही उसकी सुरक्षा और उसके लोक कल्याणकारी कार्यों में नियोजन की रूपरेखा बनाई जाती है। इसमें जनता की राय भी ली जाती है और अर्थ क्षेत्र के विद्यानों की भी। इसलिए एक झटके में किसी बजट को नकारना व्यवस्था को नकारने जैसा है। बजट में सबके लिए कुछ न कुछ होता है। जब आदमी सबको खुश करना चाहता है तो वह अति महत्वाकांक्षी लोगों की जमात के निशाने पर आ जाता है। बजट से किसी खास सेक्टर को संतुष्ट नहीं किया जा सकता। निर्मला सीतारमण ने भी देश के हर वर्ग—हर क्षेत्र को साधने की कोशिश की है। देश के आम आदमी के चेहरे पर मुस्कान लाने की कोशिश की है। आर्थिक मंदी के इस दौर में इससे अधिक करना कठिन भी है लेकिन अपने बजट से विपक्ष के चेहरे की मुस्कान भी उन्होंने छीन ली है और इसका असर विपक्ष की प्रतिक्रियाओं में सहज ही देखा जा सकता है।

वैसे आजादी के बाद से लेकर अभी तक जितने भी बजट पेश हुए हैं, उससे विपक्ष कभी खुश नजर नहीं आया

वैसे आजादी के बाद से लेकर अभी तक जितने भी बजट पेश हुए हैं, उससे विपक्ष कभी खुश नजर नहीं आया। साल दर साल बजट की आलोचना की धार और अधिक तेज ही हुई है। कभी उसे लोकलुभावन,भटका हुआ, दिशाहीन और जनविरोधी करार दिया गया तो कभी चुनावी लाभ लेने की कोशिश के रूप में इसे निरूपित किया गया। केंद्र सरकार का मौजूदा बजट भी आलोचनाओं की मार से बचा नहीं है। राहुल गांधी को लगता है कि बेरोजगारी से निपटने का बजट में कोई ठोस प्रावधान और विचार नहीं है। सरकार सिर्फ बातें ही कर रही है। कांग्रेस को लगता है कि यह सबसे अधिक कमी वाला सबसे लंबा भाषण है। यह सिर्फ बचकाना सुर्खियां बटोरने की कोशिश है। माकपा नेता सीताराम येचुरी का ध्यान बजट पर नहीं है। उनका मानना है कि जब तक मोदी सरकार के मंत्री और भाजपा नेता भारतीय समाज को नष्ट करने के लिए काम करेंगे, तब तक देश में कोई भी आर्थिक पुनरुत्थान नहीं हो सकता। यह तो विपक्ष का पक्ष है लेकिन इस बजट में निर्मला सीतारमण ने भारतीय करदाताओं को बड़ी राहत दी है।

पांच लाख तक की वार्षिक आय को करमुक्त कर दिया, टैक्स स्लैब में भी व्यापक बदलाव किया

पांच लाख तक की वार्षिक आय को करमुक्त कर दिया है।यही नहीं उन्होंने टैक्स स्लैब में भी व्यापक बदलाव किया है। इसका लाभ हर आम और खास को मिलना तय है। उन्होंने कर सुधार को प्रक्रिया और तेज करने तथा उसे आसान बनाने की भी बात कही है। उन्होंने अनुमान जताया है कि 2020-21 में विकास दर 10 फीसदी रहेगी। आगामी वित्त वर्ष में सरकार की कुल कमाई 22.46 लाख करोड़ रुपये हो सकती है जबकि कुल खर्च 30.42 लाख करोड़ रुपये हो सकते हैं। चालू वित्त वर्ष 2019-20 के संशोधित अनुमानित खर्च 26.99 लाख करोड़ और कमाई 19.32 लाख करोड़ रुपये तक होने की उन्होंने बात कही है। उन्होंने यह भी कहा है कि वित्त वर्ष 2021 में उधारी 5.36 लाख करोड़ रह सकती है जबकि वित्त वर्ष 2019-20 में सरकार की शुद्ध बाजार उधारी 4.99 लाख करोड़ रहेगी। उन्होंने देश को यह बताने और जताने का भी प्रयास किया है कि कर संग्रह में उछाल आने में समय लगेगा, क्योंकि हाल में कॉर्पोरेट टैक्स की कटौती के चलते अल्पकाल में कर संग्रह घट सकता है। लेकिन इसके बाद भी अपनी सकारात्मक सोच का उन्होंने इजहार किया है कि अर्थव्यवस्था को भारी लाभ होगा। इसे उनका साफगोई नहीं तो और क्या कहा जाएगा?

बजट में वित्तवर्ष 2021 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 3.5 प्रतिशत रखा गया

बजट में वित्तवर्ष 2021 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 3.5 प्रतिशत रखा गया है। चालू वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटा जीडीपी का 3.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है। उनका मानना है कि सरकार से मिलने वाली राहत और छूट को छोड़ने वाले आयकरदाताओं को कर की दरों में उल्लेखनीय राहत मिलेगी। एनबीएफसी और आवास वित्त कंपनियों के पास कर्ज देने के लिए धन की कमी न हो,इसके लिए सरकार की ओर से लोन गारंटी स्कीम शुरू करने का वादा कर उन्होंने मरहम लगाने का भी काम किया है। एनबीएफसी द्वारा लघु और मध्यम इकाइयों को बिल आधारित कर्ज देने के लिए नियम— कायदे में संशोधन करने और सरकार द्वारा 15वें वित्त आयोग की अंतरिम रिपोर्ट की सिफारिशों को मान लेने की बात कहक उन्हें छोटे और मंझोले उद्योगों का भी सहारा बनने का काम किया है। लेखापरीक्षा के लिए कुल कारोबार की उच्चतम सीमा 5 करोड़ करने का प्रस्ताव, स्टार्टअप प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए टैक्स में रियायत, लाभ की 100 प्रतिशत कटौती के लिए कुल कारोबार की सीमा 25 करोड़ से बढ़ाकर 100 करोड़ करने और विदेशी सरकारों व अन्य विदेशी निवेश की सॉवरेन धन निधि के लिए टैक्स रियायत की घोषणा कर उन्होंने भारत को औद्योगिक विकास के क्षितिज तक पहुंचने का प्रयास किया है।

केंद्रीय बजट में नवगठित संघ राज्यों के लिए 2020-21 में 30,757 करोड़ रुपये के आवंटन का प्रस्ताव बेहद सराहनीय

विद्युत क्षेत्र में निवेश के लिए नई घरेलू कंपनियों को 15 प्रतिशत रियायती कॉर्पोरेट टैक्स देने और निवेशकों को राहत देने के लिए लाभांश वितरण टैक्स को हटाने का प्रस्ताव कर निवेशको को लुभाने की कोशिश इस बजट में सहज ही देखी जा सकती है। एलआईसी के एक बड़े हिस्से को बेचने की घोषणा अवश्य ही चिंताजनक है लेकिन गिरावट वाले आठ औद्योगिक उपक्रमों की दुर्दशा तो यही बताती है कि प्रबंधकीय उपेक्षा के चलते ही देश की नवरत्न कही जाने वाली कंपनियां घाटे में आ गईं। अब तक बैंक के डूबने पर खाताधारक के लिए 1 लाख रुपये तक की ही गारंटी थी, अब इसे बढ़ाकर 5 लाख कर दिया गया है। आम उपभोक्ता के लिए यह बड़ी रियायत है। केंद्रीय बजट में नवगठित संघ राज्यों के लिए 2020-21 में 30,757 करोड़ रुपये के आवंटन का प्रस्ताव बेहद सराहनीय है। लद्दाख संघ राज्य क्षेत्र के लिए 59589 करोड़ रुपये का प्रस्ताव यह बताता है कि सरकार इस क्षेत्र के विकास को लेकर कितनी गंभीर है।

11 करोड़ किसानों के लिए फसल बीमा योजना,खेती, मत्स्य पालन पर जोर, कृषि को प्रतिस्पर्धात्मक बनाने की घोषणा देती है तसल्ली

इस बजट में उन्होंने बुजुर्गों और किसानों का भी विशेष ध्यान रखा है। 11 करोड़ किसानों के लिए फसल बीमा योजना,खेती, मत्स्य पालन पर जोर, कृषि को प्रतिस्पर्धात्मक बनाने की घोषणा तसल्ली देती है। जल संकट से जूझ रहे देश के 100 जिलों में जरूरी उपाय करने,पीएम कुसुम योजना के तहत 20 लाख किसानों को सोलर पंप देने,महिलाओं के धन लक्ष्मी योजना शुरू करने,दूध, मांस और मछली को बचाने के लिए किसानों के हित में रेल चलाने, कृषि विमान सेवा शुरू करने की उनकी घोषणा यह बताती है कि किसानों के सम्यक विकास और उनके आर्थिक उन्नयन को लेकर सरकार कितनी गंभीर है? किसानों के लिए रेल और विमान चलाने का विचार किसी सरकार में पहली बार आया है। किसानों को केसीसी स्कीम के दायरे में लाने,2025 तक दूध प्रसंस्करण 108 मिलियन टन करने,2020-21 के लिए 15 लाख करोड़ कृषि लोन का लक्ष्य तय करना सरकार की कृषक हितकारी सोच को बयां करता है। वर्षा सिंचित क्षेत्रों में एकीकृत कृषि प्रणाली के विस्तार,नाबार्ड की वित्तपोषण स्कीम का पुनर्विस्तार, 2022-23 तक मत्स्य उत्पादन बढ़ाकर 200 लाख टन करने का प्रस्ताव,2025 तक दूध प्रसंस्करण क्षमता दोगुना कर 108 लाख टन करने का लक्ष्य,कृषि एवं संबद्ध क्रियाकलापों सिचाई और ग्रामीण विकास के लिए तीन लाख करोड़ रुपये का आवंटन किसानों के लिए कितना हितकारी साबित होगा, इसकी कल्पना सहज ही की जा सकती है। पर्यटन क्षेत्र के विकास के लिए 2500 करोड़ रुपये और संस्कृति मंत्रालय के लिए 3150 करोड़ की व्यवस्था कर उन्होंने देश की नब्ज को मजबूती प्रदान की है।

को-ऑपरेटिव सोसायटीज को अब 30 प्रतिशत की जगह 22 प्रतिशत देना होगा टैक्स 

को-ऑपरेटिव सोसायटीज को अब 30 प्रतिशत की जगह 22 प्रतिशत टैक्स देना होगा। महिलाओं से जुड़ी योजनाओं के लिए 28,600 करोड़ रुपए,6 लाख से ज्यादा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को 10 करोड़ घरों की महिलाओं तक पहुंचने के लिए स्मार्टफोन देना यह बताता है कि महिला होने के नाते वे महिलाओं की पीड़ा को बखूबी समझती है। शिक्षा क्षेत्र के लिए 99,300 करोड़ रुपए का प्रस्ताव कर जल्द ही नयी शिक्षा नीति घोषित करने की बात कह उन्होंने इस क्षेत्र की धड़कनें बढ़ा दी हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 69,000 करोड़ रुपए और रक्षा क्षेत्र के लिए भारी भरकम राशि का प्रस्ताव कर उन्होंने यह साबित कर दिया है कि उनकी सरकार देश के विकास को लेकर तो गंभीर है ही लेकिन वह देश की सुरक्षा और संरक्षा से भी कोई समझौता नहीं करने जा रही है। 1860 में पहला टैक्स कानून बना था। आजाद भारत में टैक्स कानून 1961 में बना था लेकिन सबसे बड़ा टैक्स सुधार इसी बार नजर आया है। भले ही इसके साथ कुछ शर्तें जुड़ी हों और यह देश हित में है लेकिन इसका देश के विकास पर दूरगामी असर होना तय है।

मोदी सरकार के बजट को सातवीं बार भी शेयर बाजार ने किया खारिज

यह और बात है कि मोदी सरकार के बजट को सातवीं बार भी शेयर बाजार ने खारिज किया है। वह जिस तरह गिरा है, उससे बहुत अच्छे संदेश नहीं जाते। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 17 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा है। उन्होंने 2 घंटे 41 मिनट तक बजट पेश किया है। अगर वे दो पन्ने और पढ़तीं जो स्वास्थ्य कारणों से वे नहीं पढ़ पाईं तो यह समय और बढ़ता। 73 साल में पेश 91 बजट भाषणों में यह सबसे लंबा बजट भाषण बताया जा रहा है। जसवंत सिंह ने 2003 में इससे पहले 2 घंटे 13 मिनट तक बजट भाषण दिया था। वित्तमंत्री ने नई कर व्यवस्था में 70 तरह के डिडक्शन खत्म किए हैं। करदाता छूट चाहें तो पुरानी व्यवस्था का विकल्प ले सकते हैं, यह गुंजाइश भी उन्होंने छोड़ रखी है। मतलब नई व्यवस्था किसी भी लिहाज से करदाताओं पर बोझ नहीं है। कुछ लोगों की नाराजगी को अगर नजरंदाज करें तो यह बजट देश के हर आम और खास लोगों का है। बजट में सारी चीजें बयां नहीं की जा सकतीं। बजट निर्माण की अपनी मजबूरियां होती हैं लेकिन इतना जरूर है कि इसमें सभी का ध्यान रखा गया है और यह अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।

 

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