बाबू सिंह कुशवाहा

आज भी इंसान को इंसान कहलाने के लिए करना पड़ता है संघर्ष : बाबू सिंह कुशवाहा

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लखनऊ। जन अधिकार पार्टी ने रायबरेली रोड़ स्थित एक रिजार्ट में अपने पहले राष्ट्रीय अधिवेशन का आयोजन किया। मुख्य अतिथि पूर्व कैबिनेट मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा का हजारों कार्यकर्ताओं ने पुष्प वर्षा से स्वागत किया। दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन का आरम्भ दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। सम्मेलन में राष्ट्रीय मुद्दों पर परिचर्चा के साथ-साथ पार्टी की निर्वाचन प्रक्रिया भी चलती रही। कार्यक्रम का संचालन वी एन कुशवाहा ने किया।

बहुजनों के हक अधिकार की लडाई लडता रहूंगा

पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा ने राष्ट्रीय मुद्दों पर बोलते हुए कहा कि पिछड़ों, दलितों और वंचितों को हक दिलवाने के लिए कांशीराम के साथ संघर्ष शुरू किया था जो बसपा के बाद आज भी जन अधिकार पार्टी के रूप में चल रहा है। अपने बारे में बताते हुए उन्होंने एनएचआरएम घोटाले और लखनऊ में हुई सीएमओ की हत्याओं का जिक्र किया और कहा कि आजादी के बाद मैं पहला ऐसा व्यक्ति था जिसे अंडर ट्रायल चार साल तक जेल में रखा गया।

बाबू सिंह ने कहा कि जेल कभी मेरा रास्ता रोक नहीं सकता और बहुजनों के संघर्षों के लिए मैंने जीवन प्रस्तुत कर दिया है। उन्होंने कहा कि भले ही बीएसपी रास्ते से भटक गई हो लेकिन जन अधिकार पार्टी सदैव बहुजनों के लिए संघर्ष करती रहेगी। पूर्व मंत्री ने कहा कि समाज में हमारे समाज के लोग जो धरातल पर रह कर निचले तबके का काम करते थे उनको उनके कामों से हाथ धोना पड़ा है जिसके लिए हम संघर्ष करने को तैयार है।

जन अधिकार पार्टी का दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन शुरू

उद्घाटन सत्र में जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय सैनी ने पूरे देश से आए हुए कार्यकर्ताओं का स्वागत करते हुए पार्टी की विचारधारा से सबको अवगत करवाया। बहुजन समाज के संघर्षों को याद करते हुए विजय नारायण वर्मा ने कहा कि बहुजन समाज पार्टी आज अपने विचारों से भटक चुकी है, लेकिन हम सब को मिल कर पिछड़ों, दलितों और वंचितों के हक की लडाई लडनी हैं। दलित समाज के इतिहास की चर्चा करते हुए अनिल मौर्य ने कहा कि आज यदि हम सब एक साथ मिल कर अपनी आवाज बुलंद नहीं करेंगे तो हमारा इतिहास हमें कभी माफ नहीं करेगा।

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जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन के पहले दिन विभिन्न सत्रों का आयोजन किया गया और साथ ही निर्वाचन की प्रक्रिया भी चलती रही। महिला, युवा सशक्तिकरण, किसानों की समस्या, कानून व्यवस्था, समान शिक्षा प्रद्धति, स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छ पेयजल, बेरोजगारी, आरक्षण, विभिन्न समाज के लोगों की समस्याएं आदि पर प्रस्ताव पारित किए गए।

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