देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (CM Dhami) ने कहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति प्रदेश की आत्मा और पहचान है। लोकभाषाओं, लोककलाओं, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। सरकार का प्रयास है कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ा जाए।
मुख्यमंत्री ने बुधवार को सोशल बलूनी स्कूल, हरिद्वार बाईपास, देहरादून में लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी के जन्मदिवस के अवसर पर आयोजित ‘नरेंद्र सिंह नेगी संस्कृति सम्मान समारोह’ में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने नरेंद्र सिंह नेगी के गीतों के अंग्रेजी अनुवाद पर आधारित पुस्तक “Mountain Melodies of Narendra Singh Negi” का विमोचन किया। कार्यक्रम में अरुणाचल प्रदेश के अभिनेता, रंगकर्मी एवं नाटककार ताई तुगुंग को ‘नरेंद्र सिंह नेगी संस्कृति सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया।
नेगी के गीतों में उत्तराखंड का जनजीवन और संवेदनाएं
मुख्यमंत्री धामी ने नरेंद्र सिंह नेगी को जन्मदिवस की शुभकामनाएं देते हुए उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की। उन्होंने कहा कि नरेंद्र सिंह नेगी उत्तराखंड की लोक संस्कृति के ऐसे पुरोधा हैं, जिन्होंने अपने गीतों और संगीत के माध्यम से उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई है।
उन्होंने कहा कि नेगी के गीतों में उत्तराखंड का जनजीवन, प्रकृति, संघर्ष, सामाजिक सरोकार और मानवीय संवेदनाएं प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त होती हैं। उनके गीतों ने पहाड़ की बोली, संस्कृति और जीवनशैली को व्यापक मंच प्रदान किया है।
ताई तुगुंग को संस्कृति सम्मान
मुख्यमंत्री ने ताई तुगुंग को ‘नरेंद्र सिंह नेगी संस्कृति सम्मान-2026’ मिलने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि तुगुंग ने न्यीशी भाषा, अरुणाचली हिंदी, रंगमंच, नाटक और सिनेमा के माध्यम से अरुणाचल प्रदेश की लोक संस्कृति एवं परंपराओं को व्यापक पहचान दिलाई है।
मुख्यमंत्री ने उनके चर्चित नाटक ‘लप्या’ और फिल्म ‘संगी माई’ का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी रचनात्मक यात्रा हिमालयी राज्यों की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को सामने लाने का महत्वपूर्ण प्रयास है।
अंग्रेजी अनुवाद से वैश्विक स्तर पर पहुंचेगी लोकसंस्कृति
मुख्यमंत्री ने Mountain Melodies of Narendra Singh Negi के विमोचन को उत्तराखंड की लोकभाषा और लोकसंस्कृति के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी अनुवाद के माध्यम से नरेंद्र सिंह नेगी की रचनाओं को देश-दुनिया के व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पुस्तक आने वाली पीढ़ियों को नरेंद्र सिंह नेगी के व्यक्तित्व, कृतित्व और दशकों लंबी संगीत यात्रा से परिचित कराने के साथ उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक परिप्रेक्ष्य में स्थापित करने में सहायक होगी।
लोक कलाकारों को रोजगार और मंच देने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति अत्यंत समृद्ध और विविध है। जागर, बेड़ा, मांगल, खुदेड़ और छोपाटी जैसे पारंपरिक गीत तथा ढोल, दमाऊ, हुड़का, मशक, तुर्री और भंकोरा जैसे लोक वाद्य प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान के आधार हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के अनेक युवा आधुनिक संगीत के साथ लोकगीतों को नए कलेवर में प्रस्तुत कर रहे हैं। इससे लोक संगीत को नई पीढ़ी के बीच लोकप्रिय बनाने के साथ कलाकारों को नए अवसर भी मिल रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि लोक कलाकारों को सम्मान और अवसर उपलब्ध कराने के लिए सूचीबद्धकरण की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। अब तक 275 सांस्कृतिक दलों और 226 एकल कलाकारों को सूचीबद्ध किया जा चुका है। इससे उन्हें अपनी प्रतिभा के प्रदर्शन के साथ रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं।
वृद्ध कलाकारों और साहित्यकारों की पेंशन बढ़ाकर ₹6 हजार
धामी ने कहा कि ढोल-दमाऊ जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों और उनसे जुड़े कलाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए पात्र कलाकारों को प्रतिवर्ष निशुल्क वाद्ययंत्र एवं वेशभूषा उपलब्ध कराई जा रही है।
उन्होंने बताया कि लोककला और साहित्य के क्षेत्र में जीवन समर्पित करने वाले वृद्ध एवं आर्थिक रूप से कमजोर कलाकारों, साहित्यकारों और लेखकों की मासिक पेंशन ₹3 हजार से बढ़ाकर ₹6 हजार की गई है। वर्तमान में 180 कलाकार इसका लाभ ले रहे हैं।
गुरु-शिष्य परंपरा के संरक्षण के लिए प्रशिक्षण
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोककलाओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए गुरु-शिष्य परंपरा को मजबूत किया जा रहा है। इसके तहत लोक कलाकारों के माध्यम से छह माह की प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं, ताकि युवा लोककलाओं और पारंपरिक विधाओं को सीखकर उन्हें आगे बढ़ा सकें।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में ‘दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मान’ शुरू किया गया है, जिसके तहत ₹5 लाख की सम्मान राशि प्रदान की जाती है। वहीं ‘उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान’ के माध्यम से अब तक हिंदी सहित विभिन्न भाषाओं के 57 साहित्यकारों को सम्मानित किया जा चुका है।
सरकार ने ‘साहित्य भूषण पुरस्कार’ की भी शुरुआत की है, जिसकी सम्मान राशि ₹5.51 लाख निर्धारित की गई है। वर्ष 2022 से अब तक 102 लेखकों की पुस्तकों के प्रकाशन के लिए आर्थिक अनुदान भी दिया जा चुका है।
उत्तराखंड में विकसित होंगे दो ‘साहित्य ग्राम’
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार उत्तराखंड को केवल पर्यटन के लिहाज से ही नहीं, बल्कि साहित्य और संस्कृति के राष्ट्रीय केंद्र के रूप में भी स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है।
इसी उद्देश्य से प्रदेश में दो ‘साहित्य ग्राम’ विकसित करने की योजना पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। इन साहित्य ग्रामों में साहित्यकारों के लिए आवास, पुस्तकालय, अध्ययन केंद्र और संगोष्ठियों जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है।
उन्होंने कहा कि देहरादून में विकसित किए जा रहे हिमालय सांस्कृतिक केंद्र, आर्ट गैलरी और संग्रहालय जैसी पहलें भी प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और प्रदर्शित करने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ‘विकल्प रहित संकल्प’ के मूलमंत्र के साथ उत्तराखंड की लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए निरंतर काम कर रही है। समाज, कलाकारों और साहित्यकारों के सामूहिक सहयोग से प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को और अधिक समृद्ध एवं सशक्त बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम में नरेंद्र सिंह नेगी, साहित्यकार, कलाकार, संस्कृति प्रेमी, विभिन्न सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
