Abohar mayor election controversy: BJP leaders meet Governor
अबोहर। पंजाब के अबोहर नगर निगम (Abohar Municipal Corporation) के मेयर पद के चुनाव (Mayor Election Controvercy) को लेकर खड़ा हुआ सियासी विवाद अब सीधे राजभवन (गवर्नर हाउस) पहुंच गया है। शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों के नेतृत्व में पार्टी के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात की। भाजपा नेताओं ने राज्यपाल को एक औपचारिक मांग पत्र सौंपा, जिसमें अबोहर मेयर चुनाव के दौरान प्रशासनिक तंत्र के कथित दुरुपयोग और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के हनन की शिकायत करते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। इस दौरान राजभवन में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ और अश्वनी शर्मा सहित भाजपा के कई अन्य वरिष्ठ नेता भी विशेष रूप से मौजूद रहे।
स्पष्ट बहुमत के बावजूद भाजपा की हार और ‘आप’ का दावा
अबोहर नगर निगम में शुक्रवार को हुआ मेयर पद का चुनाव उस समय पूरी तरह विवादों में घिर गया, जब सदन में स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद भाजपा उम्मीदवार को पराजित घोषित कर दिया गया। नगर निगम के दलीय समीकरण पर नजर डालें तो कुल 50 सदस्यीय सदन में चुनाव से पहले भाजपा के पास 28 पार्षदों का मजबूत आंकड़ा था, जबकि सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) के पास 20, कांग्रेस के पास 1 और 1 निर्दलीय पार्षद था। भाजपा नेताओं का तकनीकी रूप से तर्क था कि यदि स्थानीय विधायक के पदेन मतदान अधिकार को भी जोड़ लिया जाए, तो उनके पास कुल 29 मतों का स्पष्ट और अकाट्य बहुमत था। इसके विपरीत, जब चुनाव के नतीजे आए तो चुनाव अधिकारी ने आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार गणेश सबलानिया को विजेता घोषित कर दिया। इस अप्रत्याशित परिणाम पर आम आदमी पार्टी के हल्का इंचार्ज अरुण नारंग ने अपना पक्ष रखते हुए दावा किया कि मतदान के दौरान ‘आप’ उम्मीदवार के पक्ष में कुल 27 पार्षदों ने हाथ उठाकर (Show of Hands) अपना खुला समर्थन दिया था, और इसी प्रत्यक्ष मतदान प्रणाली के आधार पर चुनाव अधिकारी ने वैधानिक रूप से गणेश सबलानिया को विजयी घोषित किया था।
सुनील जाखड़ का धरना और प्रशासन के साथ 3 घंटे का मंथन
जैसे ही आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार की जीत की घोषणा हुई, नगर निगम परिसर एक राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो गया। भाजपा पार्षदों और कार्यकर्ताओं ने इसे पूरी तरह असांविधानिक और लोकतंत्र की हत्या बताते हुए मौके पर ही उग्र विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता सुनील जाखड़ तुरंत अबोहर नगर निगम परिसर पहुंचे और उन्होंने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर बेहद गंभीर आपत्तियां उठाईं। जाखड़ ने सीधे आरोप लगाया कि प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव बनाकर बहुमत वाली भाजपा को जानबूझकर हराया गया है। इसके बाद, गतिरोध को सुलझाने के लिए सुनील जाखड़ और जिला उपायुक्त (DC) के बीच बंद कमरे में करीब तीन घंटे तक मैराथन बैठक चली। इस उच्चस्तरीय वार्ता में भाजपा नेताओं ने चुनाव के दौरान हुई एक-एक कथित अनियमितता, वीडियो फुटेज और नियमों के उल्लंघन को प्रशासनिक अधिकारियों के सामने विस्तार से रखा।
देर रात रद्द हुआ चुनाव, अब दोबारा होगी वोटिंग
इस तीन घंटे चले लंबे कानूनी और प्रशासनिक विचार-विमर्श के बाद, शुक्रवार देर रात करीब 9:30 बजे जिला प्रशासन ने बैकफुट पर आते हुए एक बड़ा फैसला सुनाया। प्रशासन ने शुक्रवार को संपन्न हुई संपूर्ण मेयर चुनाव प्रक्रिया में धांधली के गंभीर आरोपों और भाजपा के कड़े विधिक विरोध को स्वीकार करते हुए इस चुनाव को पूरी तरह से रद्द (Null and Void) घोषित कर दिया। प्रशासन के इस फैसले के बाद भाजपा खेमे में जश्न का माहौल बन गया और सुनील जाखड़ ने इसे अबोहर के जागरूक नागरिकों व भाजपा पार्षदों की नैतिक व लोकतांत्रिक जीत बताया। जिला प्रशासन के आधिकारिक आदेश के अनुसार, अबोहर नगर निगम के मेयर पद के लिए बहुत जल्द एक नई तारीख का एलान किया जाएगा, जिसके तहत पूरी सुरक्षा और पूरी तरह निष्पक्षता के साथ दोबारा मतदान कराया जाएगा। शनिवार को राज्यपाल से मिलकर भाजपा नेताओं ने यही मांग दोहराई है कि आगामी चुनाव किसी स्वतंत्र केंद्रीय पर्यवेक्षक की देखरेख में ही कराया जाए।
