बार-बार होते सिरदर्द को न करें अनदेखा, हो सकती है ये बड़ी बीमारी

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माइग्रेन में बहुत तेज दर्द होता है और इसके साथ कई बार मिचली, उल्टी और प्रकाश की सेंसिटिविटी भी होती है। यह कई घंटों से लेकर तीन दिन तक रह सकता है। माइग्रेन युवाओं से लेकर अधेड़ उम्र वालों में सामान्य है।

पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में यह ज्यादा देखने को मिलता है। यह वंशानुगत होने के साथ-साथ जीवनशैली कारकों के परिणाम स्वरूप भी हो सकता है। सामान्य तौर पर यह सिर के आधे हिस्से को प्रभावित करता है, जिसके चलते इसे आधासीसी या अधकपारी भी कहा जाता है, लेकिन यह अक्सर पूरे सिर को भी प्रभावित कर सकता है।

माइग्रेन व अन्य सिरदर्द में अंतर:

माइग्रेन का सिरदर्द (Headache) गंभीर प्राथमिक सिरदर्द होता है जो आमतौर पर एक खास समय की अवधि में होता है, जबकि अन्य सिरदर्द विभिन्न कारणों से हो सकते हैं, जैसे मेनिन्जाइटिस, ट्यूमर और ब्रेन हेमरेज। वे कुछ न्यूरोलाजिकल समस्याओं जैसे दृश्य हानि, स्मृतिलोप, असंतुलन या अंगों की कमजोरी के साथ तीव्र या पुराने हो सकते हैं। इसके अन्य कारणों का पता लगाने के लिए ब्रेन स्कैन जैसी जांच की आवश्यकता होती है।

उपचार:

माइग्रेन का समय पर इलाज न किए जाने पर यह गंभीर समस्या बन जाता है। इसलिए यदि समय से न्यूरोलाजिस्ट को दिखाया जाए और इसका मूल्यांकन किया जाता रहे एवं उपयुक्त दवाओं का सेवन किया जाए तो लक्षणों की गंभीरता को कम करने और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद मिल सकती है। अब ऐसी प्रभावी और सुरक्षित दवाएं उपलब्ध हैं जो शुरुआत में ही माइग्रेन के दर्द को रोक सकती हैं। इसके अलावा दर्द की आवृत्ति को नियंत्रित करने के लिए तीन से छह महीने की अवधि में विभिन्न प्रकार की दवाएं दी जाती हैं, जिसे माइग्रेन प्रोफायलैक्सिस कहा जाता है। एपिसोडिक और क्रोनिक माइग्रेन के इलाज के लिए विशिष्ट दवाओं का उपयोग किया जाता है। माइग्रेन के उपचार में भी नई प्रगति हुई है, जैसे कि सिर की त्वचा के विभिन्न बिंदुओं पर इंजेक्शन का उपयोग माइग्रेन की आवृत्ति को कम करने में मदद करता है।

माइग्रेन का कोई स्थायी इलाज नहीं है और यह आमतौर पर एक निश्चित उम्र के बाद अपने आप दूर भी हो जाता है। माइग्रेन से परेशान लोग स्वयं से तरह-तरह की दर्द निवारक दवाओं का सेवन करते हैं जो सेहत के लिए ठीक नहीं है। कारण, दर्द निवारक दवाओं का अधिक सेवन किडनी समेत शरीर के अन्य अंगों को प्रभावित करता है। इसलिए चिकित्सकों द्वारा माइग्रेन के लिए बार-बार दर्द निवारक दवाएं लेने की सलाह नहीं दी जाती है, क्योंकि इससे समय के साथ सिरदर्द की हालत बिगड़ सकती है। माइग्रेन के इलाज का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है जीवनशैली में बदलाव। माइग्रेन मुक्त जीवन जीने के लिए नियमित व्यायाम, योग, ध्यान, वजन नियंत्रित रखना, प्रतिदिन समय पर भोजन, प्रतिदिन एक निर्धारित समय पर नींद लेना, पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और इंटरनेट मीडिया से ब्रेक लेना फायदेमंद रहता है। इसके साथ ही सकारात्मक सोच व खुश रहना भी अनिवार्य है।

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