ब्रेस्ट कैंसर

रिसर्च: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से ब्रेस्ट कैंसर की स्क्रीनिंग हुई आसान

849 0

नई दिल्ली। ब्रेस्ट कैंसर भारत में होने वाले सभी तरह के कैंसर में सबसे आम है। इसे पहचानने में डॉक्टर भी चूक जाते हैं, लेकिन अब इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग से पहचाना जा सकेगा।

गूगल के साथ एक ऐसा कंप्यूटर एलगॉरिदम तैयार किया है जो ऐसे ब्रेस्ट कैंसर को भी पहचान लेगा

इसका दावा ब्रिटेन और अमेरिका के वैज्ञानिकों ने किया है। वैज्ञानिकों ने बताया कि गूगल के साथ एक ऐसा कंप्यूटर एलगॉरिदम तैयार किया है जो ऐसे ब्रेस्ट कैंसर को भी पहचान लेगा। जिसको अभी तक चिकित्सक या रेडियोलॉजिस्ट नहीं पहचान पाते हैं। ये शोध हाल ही नेचर जर्नल में प्रकाशित हुआ है। खास बात यह है कि ब्रेस्ट कैंसर की स्क्रीनिंग के बाद गलत रिपोर्टिंग के मामले भी न के बराबर हो जाएंगे। शिकागो के नॉर्थ वेस्टर्न यूनिवर्सिटी के एनेस्थेसियोलॉजी विभाग के डॉ. मोजियार एतेमादी का कहना है कि ये बड़ी उपलब्धि है, जिससे कैंसर की पहचान समय से हो सकेगी।

अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चे तेल में लगी आग, पेट्रोल-डीजल लगातार दूसरे दिन महंगा 

मशीन लर्निंग डिवाइस को ब्रेस्ट कैंसर की पहचान के लिए होने वाली मैमोग्राफी जांच की स्कैनिंग को समझने के हिसाब से प्रशिक्षित किया गया है। इसमें देखा गया कि पहले 10 में से एक ब्रेस्ट कैंसर के ट्यूमर की पहचान चिकित्सक नहीं कर पाते थे। मशीन से ये आंकड़ा 37 मामलों में से एक हो गया है।

एआई से जांच के बाद घट गए मामले

वैज्ञानिकों ने ब्रिटेन के नेशनल हेल्थ सर्विस से जुड़े तीन अस्पतालों में 25,856 और अमेरिका के नॉर्थ वेस्टर्न मेडिसिन में 3,097 महिलाओं समेत करीब एक लाख मैमोग्राम डाटा पर अध्ययन किया है। इसमें ब्रेस्ट कैंसर की सटीक पहचान हुई है। डॉक्टर 9.4 फीसदी ब्रेस्ट कैंसर के ट्यूमर को नहीं पहचान पाए, लेकिन एआई से जांच के बाद ये आंकड़ा 2.7 फीसदी हो गया है। इसी तरह कैंसर की गलत पहचान के मामले 5.7 फीसदी थे जो घटकर 1.2 फीसदी रह गया है।

एआई चिकित्सा क्षेत्र में फैसले लेने में अहम भूमिका निभाएगा

शोधकर्ताओं ने मशीन के 14 ट्रायल के बाद पाया कि चिकित्सक 86 फीसदी मामले को पहचान लेते हैं, जबकि मशीन ने 87 फीसदी कैंसर के मामलों को पहचान लिया। गूगल हेल्थ के सॉफ्ट इंजीनियर और शोध के सह लेखक स्कॉट मैकिनी कहते हैं कि कंप्यूटर इस मामले में सबसे बेहतर हैं। उम्मीद है कि भविष्य में ये तकनीक रेडियॉलाजिस्ट के लिए मददगार बनेगी जिससे वे स्तन कैंसर के ट्यूमर को पकड़ सकेंगे और गलत रिपोर्टिंग के मामले भी कम होंगे। एआई चिकित्सा क्षेत्र में फैसले लेने में अहम भूमिका निभाएगा और डॉक्टरों और अन्य स्टाफ का भार भी कम करेगा।

Related Post

‘जेड’ सुरक्षा घेरे में रहेंगे चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर, ममता सरकार का फैसला

Posted by - February 19, 2020 0
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की ममता सरकार ने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को जेड श्रेणी की सुरक्षा मुहैया कराएगी। सरकारी…

त्योहार के मौके पर योगी सरकार ने सरकारी अफसरों की छुट्टी पर लगाई रोक

Posted by - October 31, 2020 0
राष्ट्रीय डेस्क.   उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आने वाले त्योहार के मौके पर सरकारी अफसरों की छुट्टी…
CM Vishnudev Sai

सीएम विष्णुदेव साय ने ज्वालामुखी शक्तिपीठ में की पूजा-अर्चना

Posted by - March 1, 2024 0
रायपुर/सिंगरौली। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय (CM Vishnudev Sai) ने आज मध्यप्रदेश के सिंगरौली प्रवास के दौरान शक्ति नगर स्थित ज्वालामुखी शक्तिपीठ…

UP: ड्यूटी रूम में सोता रहा ऑन ड्यूटी कर्मचारी, इलाज के अभाव में तड़पकर मरीज की मौत

Posted by - August 30, 2021 0
यूपी के बांदा जिला अस्पताल में एक मरीज की तड़पकर सिर्फ इसलिए मौत हो गई क्योंकि वार्ड में भर्ती मरीजों…

चुनाव लड़ने की चाह रखने वालों के लिए गाय पालना हो अनिवार्य- शिवराज के मंत्री का बयान, विवाद शुरू

Posted by - August 17, 2021 0
मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह सरकार के मंत्री हरदीप सिंह डंग के एक बयान को लेकर विवाद शुरू हो गया है। मंत्री…