वर्ल्ड रिकॉर्ड: कश्मीरी युवा आदिल ने 8 दिन में साइकिल से पहुंचा कन्याकुमारी!

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समाचार एजेंसी से बात करते हुए आदिल ने कहा, मैं एक साल के लिए साइकिल से कश्मीर से कन्याकुमारी जाने की योजना बना रहा था। मेरे एक दोस्त ने मुझे एक प्रायोजक से मिलवाया जिसने मुझे तैयार करने के लिए कहा और विश्व रिकॉर्ड बनाने में हर संभव मदद का आश्वासन दिया। मेरे कोच राजेश कौशिक ने मुझे इसके लिए प्रशिक्षित किया। महीनों के प्रशिक्षण के बाद, मैंने पिछले साल नवंबर में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए आवेदन किया और फरवरी के अंत में मेरा आवेदन स्वीकार कर लिया गया।

विश्व कीर्तिमान स्थापित करने के अपने सपने का पूरा करने के लिए आदिल अमृतसर गए थे, जहां उन्होंने 4-5 महीनों महीने कठिन प्रशिक्षण हासिल किया था। सायक्लिंग डिपार्टमेंट के एचओडी का कहना है कि आदिल ने साइकिल चलाने की अपनी ट्रेनिंग अमृतसर के गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी में ली। उनके कोच राजेश थे।

बताया गया है कि उन्होंने तमाम स्तर पर ट्रेनिंग ली थी। जेएनडीयू (विश्वविद्यालय) में 10,000 से 20000 किलोमीटर धैर्य के साथ प्रशिक्षण किया। इससे उन्हें कश्मीर से कन्याकुमारी तक के चैलेंज को लेने में मदद मिली। वह फिक्स्ड स्प्रिंग फिनिश राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में शीर्ष 10 में शामिल थे। कोरोना महामारी की शुरुआत में साइकिल के पार्ट्स की व्यवस्था करना काफी कठिन था क्योंकि आयातित पार्ट्स पर प्रतिबंध लगा हुआ था, लेकिन प्रायोजकों के समर्थन से सभी की इंतजाम किया गया।

श्रीनगर से अपनी यात्रा को आगे बढ़ाते हुए आदिल ने कई राज्यों के शहरों से गुजरते हुए यात्रा की। इनमें सनत नगर एनएच 44, काजीगुंड, न्यू टनल बनिहाल, नाशरी टनल, लाखापुर, पठानकोट, जालंधर, लुधियाना, दिल्ली, आगरा, ग्वालियर, झांसी, नागपुर, हैदराबाद, गुट्टी, बंग्लोर, मुदुरई और अंत में कन्याकुमारी शामिल हैं।

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आदिल ने कहा कि मैं विशेष रूप से मेरे लिए नई बनिहाल-काजीगुंड सुरंग खोलने के लिए यूटी प्रशासन को धन्यवाद देना चाहता हूं। यात्रा के दौरान मुझे कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा लेकिन मैंने रिकॉर्ड तोड़ने की ठान रखी थी। मध्य कश्मीर के बडगाम जिले के नरबल के रहने वाले 23 वर्षीय कश्मीरी युवक आदिल तेली ने कश्मीर से कन्याकुमारी तक की 3,600 किलोमीटर की दूरी साइकिल से 8 दिन, 1 घंटे और 37 मिनट में तय कर विश्व रिकॉर्ड बनाया। आदिल ने 22 मार्च को सुबह करीब साढ़े सात बजे लाल चौक के घंटाघर से अपनी यात्रा शुरू की और 30 मार्च को सुबह करीब नौ बजे कन्याकुमारी पहुंचे।

Divyansh Singh

मिट्टी का तन, मस्ती का मन; छड़ भर जीवन, मेरा परिचय।

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