CM Yogi

Cabinet: संपत्ति की रजिस्ट्री से पहले खतौनी और स्वामित्व दस्तावेजों की जांच अनिवार्य

4 0

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में संपत्ति की रजिस्ट्री प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इसके तहत रजिस्ट्री से पहले खतौनी (Khatauni) और स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों का परीक्षण अनिवार्य किया जाएगा, ताकि फर्जी और विवादित जमीन की रजिस्ट्री को रोका जा सके।

निर्णय की जानकारी देते हुए स्टाम्प एवं पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल ने बताया कि वर्तमान समय में कई मामलों में यह देखा गया है कि संपत्ति के वास्तविक स्वामी के अलावा अन्य व्यक्ति द्वारा संपत्ति का विक्रय कर दिया जाता है। इसके अलावा निषेधित या प्रतिबंधित संपत्ति का विक्रय, अपने अधिकार से अधिक संपत्ति का विक्रय, कुर्क संपत्ति का विक्रय तथा केंद्र या राज्य सरकार के स्वामित्व वाली भूमि के विक्रय विलेख का भी पंजीकरण करा लिया जाता है। ऐसे मामलों के कारण बाद में विवाद उत्पन्न होते हैं और लोगों को लंबे समय तक मुकदमेबाजी और अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

वर्तमान में रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 के अंतर्गत किसी भी विलेख के पंजीकरण से इनकार करने के संबंध में उप-निबंधक को धारा 35 के तहत बहुत सीमित अधिकार प्राप्त हैं। इसी कारण कई बार संदिग्ध मामलों में भी रजिस्ट्री हो जाती है। इन समस्याओं को देखते हुए उत्तर प्रदेश में रजिस्ट्रेशन अधिनियम और नियमावली में संशोधन करने का निर्णय लिया गया है।

प्रस्तावित संशोधन के तहत अधिनियम में धारा 22 और धारा 35 के बाद नई धारा 22-A, 22-B और 35-A जोड़ी जाएंगी। धारा 22-A के तहत कुछ श्रेणियों के दस्तावेजों के पंजीकरण पर रोक लगाई जा सकेगी। धारा 22-B के तहत पंजीकरण से पहले अचल संपत्ति की पहचान सुनिश्चित करने के प्रावधान किए गए हैं। वहीं धारा 35-A(1) के अनुसार यदि धारा 17(1) के अंतर्गत आने वाली अचल संपत्ति के पंजीकरण के लिए प्रस्तुत लिखतों के साथ स्वामित्व, अधिकार, पहचान, विधिपूर्ण कब्जा या अंतरण से संबंधित आवश्यक दस्तावेज संलग्न नहीं होंगे, जिन्हें राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना के माध्यम से निर्धारित करेगी, तो पंजीकरण अधिकारी उस दस्तावेज को पंजीकृत करने से इनकार कर सकेगा।

इस व्यवस्था के लागू होने से फर्जी और विवादित संपत्तियों की रजिस्ट्री पर प्रभावी रोक लगेगी और आम लोगों को अनावश्यक कोर्ट केस तथा अन्य परेशानियों से राहत मिलेगी। उल्लेखनीय है कि अन्य राज्यों में भी इसी प्रकार के संशोधन कर ऐसे मामलों पर नियंत्रण का प्रयास किया गया है। यह प्रस्ताव भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची की समवर्ती सूची की प्रविष्टि-6 के अंतर्गत लाया गया है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब इससे संबंधित विधेयक को विधानमंडल में प्रस्तुत कर उसकी स्वीकृति प्राप्त की जाएगी।

Related Post

ओवैसी आप ‘महाराज योगी’ के तेज से ही नष्ट हो जाओगे, उन्हें छू के तो दिखाओ- रवि किशन का पलटवार

Posted by - July 6, 2021 0
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से सांसद और भोजपुरी अभिनेता रविकिशन ने AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी पर निशाना साधा है। रवि…
UP Budget

Budget 2024: उत्तर प्रदेश को उद्योग प्रदेश बनाने के लिए योगी सरकार ने खोला खजाना

Posted by - February 5, 2024 0
लखनऊ। ‘उत्सव, उद्योग और उम्मीद, यही है नये यूपी की तस्वीर।’ यूपी विधानसभा में बजट (Budget) प्रस्तुत किये जाने के…