Sanskriti Utsav

गांव की चौपाल से राजधानी तक सजेगा संस्कृति उत्सव का मंच, मिलेगा सम्मान और पहचान

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बरेली । उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को गांव गली गलियारों तक तेज नई धार देने के लिए संस्कृति विभाग ने उत्तर प्रदेश पर्व हमारी संस्कृति-हमारी पहचान के तहत संस्कृति उत्सव 2025-26 (Sanskriti Utsav) का एलान कर दिया है। शास्त्रीय-उपशास्त्रीय संगीत, लोक गायन, लोक नाट्य, नृत्य, वादन से लेकर काव्य-पाठ तक-प्रदेश के हर अंचल से प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें मंच, सम्मान और पुरस्कार देने की व्यवस्था की गई है। जो कलाकार अब तक पहचान के अभाव में छोटे शहरों और गांवों में नेपथ्य में थे, उन्हें मुख्यधारा में लाया जाएगा।

संस्कृति उत्सव (Sanskriti Utsav) की प्रतियोगिताएं चार चरणों में होंगी। कार्यक्रम में शास्त्रीय गायन (ख्याल, ध्रुपद), उपशास्त्रीय (ठुमरी, दादरा, चैती, होरी), लोक गायन (कजरी, बिरहा, आल्हा, निर्गुण, कव्वाली), लोक नाट्य (नौटंकी, रामलीला, स्वांग, नुक्कड़ नाटक), सुगम संगीत (गीत, ग़ज़ल, भजन, देशभक्ति) और काव्य-पाठ/काव्य गोष्ठी जैसी विधाओं में दक्ष कलाकारों को मंच मिलेगा। वादन में बांसुरी, शहनाई, हारमोनियम, सितार, सारंगी, तबला, पखावज, मृदंगम, घटम समेत लोक व जनजातीय वाद्य यंत्रों को भी शामिल किया गया है।

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य, ऑफलाइन ऑन-द-स्पॉट विकल्प भी

प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। इसके लिए विशेष पोर्टल तैयार होगा, जिसमें प्रतिभागी का नाम, पता, मोबाइल, जन्मतिथि, विधा, तहसील-जिला-मंडल, आधार संख्या आदि डाटा एक साथ दर्ज कराया जाएगा ताकि प्रस्तुति के बाद ई-प्रमाणपत्र देना आसान हो। पोर्टल तक पहुंच न रखने वालों और देर से आने वालों के लिए ऑफलाइन ऑन-द-स्पॉट रजिस्ट्रेशन का विकल्प भी रहेगा।

कंट्रोल रूम बनेगा सांस्कृतिक वार रूम, रोज जारी होगा बुलेटिन

महोत्सव (Sanskriti Utsav) के सुचारु संचालन के लिए संस्कृति विभाग द्वारा कंट्रोल रूम स्थापित किया जाएगा। यहां से प्रतिभागियों की समस्याओं का त्वरित समाधान, कॉल/मैसेज के जरिए स्थल-दिनांक-समय की सूचना और रोज सभी स्थलों का डेटा जुटाकर बुलेटिन मीडिया, सोशल मीडिया और प्रशासनिक समूहों में प्रसारित किया जाएगा। शासकीय-अर्द्धशासकीय विभाग, शैक्षणिक संस्थान, स्वशासी निकाय, स्वैच्छिक संस्थाएं, नेहरू युवा केंद्र, एनसीसी, व्यापारिक प्रतिष्ठान और सामाजिक कार्यकर्ताओं का सहयोग लेकर सार्वभौमिक सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश हैं। किन्नर समाज और दिव्यांगजन की पूर्ण भागीदारी पर भी विशेष जोर दिया गया है।

नियम सख्त: एक प्रतिभागी-एक विधा, मर्यादित प्रस्तुतियां ही मान्य

प्रतिभागी का उत्तर प्रदेश का निवासी होना अनिवार्य है (आधार कार्ड मानक)। एक प्रतिभागी केवल एक ही विधा में भाग ले सकेगा। प्रस्तुतियां पारंपरिक और मर्यादित होंगी; किसी राजनीतिक दल, धर्म, संप्रदाय, जाति या व्यक्ति की भावनाएं आहत करने वाली सामग्री प्रतिबंधित रहेगी। अश्लील नृत्य/गायन अयोग्य माने जाएंगे और प्रस्तुति तुरंत रोकी जा सकती है। निर्णायक मंडल का निर्णय अंतिम व सर्वमान्य होगा। विजेताओं को मेडल, प्रमाणपत्र, स्मृति-चिह्न और निर्धारित पुरस्कार दिए जाएंगे। लखनऊ में उत्तर प्रदेश दिवस (24-26 जनवरी 2026) के अवसर पर विजेताओं को प्रस्तुति का अवसर मिलेगा। चयनित दलों के लिए आने-जाने का किराया, रहने-भोजन और निर्धारित मानदेय की व्यवस्था भी तय की गई है।

चार चरणों में होगा चयन, गांव से लखनऊ तक पहुंचेगी प्रतिभा

10 से 15 जनवरी 2026: गांव, पंचायत, ब्लाक व तहसील स्तर की प्रतियोगिताएं कराकर फिर जिला स्तर पर चयनित कलाकारों की प्रतियोगिता।
17 से 19 जनवरी 2026: मंडलीय मुख्यालय में जनपद स्तर के चयनित कलाकारों की प्रतियोगिता।
22 जनवरी 2026: मंडल स्तर के चयनित कलाकारों की प्रतियोगिता लखनऊ में।
24 से 26 जनवरी 2026: उत्तर प्रदेश पर्व के अवसर पर लखनऊ में अंतिम रूप से चयनित प्रतिभागियों की प्रस्तुतियां, सम्मान व पुरस्कार।

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