organic production

जैविक उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किसानों को दिया गया प्रशिक्षण

1126 0

लखनऊ। केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान परंपरागत कृषि विकास योजना के अंतर्गत जैविक उत्पादन (organic production) को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है। इसके लिए लगभग 200 हेक्टेयर खेत में 10 जैविक किसान उत्पादक समूह के 211 किसानों के माध्यम से किसानों को जैविक उत्पादन के लिए आवश्यक विभिन्न प्रकार के इनपुट दिए गए। जिसमें वर्मी कंपोस्ट, बायोडायनेमिक एवं नाडेप खाद तथा बायो-इनहासर को बनाने का प्रशिक्षण किसानों के खेत में ही दिया गया।

किसानों की जमीन का पीजीएस के माध्यम से प्रमाणीकरण कराने का कार्य किया जा रहा है। जिससे उन्हें देश के विभिन्न भागों में प्रमाणित जैविक उत्पादों को बेचने में सुविधा मिलेगी। इसके अतिरिक्त किसानों को फसल तैयार होने पर उनके उत्पाद को ग्रेडिंग, पैकिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग की ट्रेनिंग भी दी जाएगी।

अपने ही खेत में जैविक उत्पादन (organic production)  के लिए आवश्यक सामग्री का उत्पादन करने के लिए 10 जैविक उत्पादन समूहों के लिए ट्रेनिंग प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की गई है। यह जैविक उत्पादक समूह बाराबंकी, बांदा और हमीरपुर जिलों में चुने गए हैं और वहीं जाकर उन्हें जैविक इनपुट्स को बनाने की ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वे इस कार्य में आत्मनिर्भर बन सकें। इससे उत्पादन की लागत में कमी आएगी और किसानों का मुनाफा भी बढ़ेगा|

इसी श्रृंखला में एक ट्रेनिंग संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा शैली किरतपुर गांव (बाराबंकी) में की गई जहां 21 रजिस्टर्ड फार्मर किसानों को प्रशिक्षण दिया गया। जरूरी जैविक उत्पादन के लिए आवश्यक वस्तुएं जैसे नीम की खली, स्प्रेयर, स्टिकी इंसेक्ट ट्रैप, नीम का तेल, वर्मी कंपोस्ट बेड और केंचुए प्रदान किए गए।

कैप्टन जोया अग्रवाल के नेतृत्व में भारत रचेगा इतिहास

संस्थान ने एक विशेष प्रकार के जैविक इनपुट सीआईएसएच-बायो-इनहासर का विकास किया है जिसे छोटे और सीमांत किसानों के बीच में वितरित किया गया ताकि वे मिट्टी का स्वास्थ्य सुधार सकें और जैविक उत्पादन में अच्छी उपज प्राप्त हो। एक विशेष प्रकार का फॉर्मूलेशन है जिसमें परंपरागत रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले पंचगव्य, वर्मीवाश अमृतवाणी एवं काऊ पेट पिट के लाभकारी बैक्टीरिया का समावेश किया गया है।

संस्थान के निदेशक डॉ शैलेंद्र राजन ने ट्रेनिंग के उद्घाटन के दौरान बताया कि व्यावसायिक और सफल जैविक उत्पादन के लिए हमें अपनी सोच में परिवर्तन करना पड़ेगा और बागवानी फसलों में जैविक उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने इस बात पर भी विशेष जोर दिया कि फसल का सही चुनाव और अच्छी मात्रा में उत्पादन करके ही मार्केटिंग में सफलता प्राप्त की जा सकती है। अच्छी मार्केटिंग के द्वारा जैविक उत्पादों से प्राप्त होने वाली आय में जोखिम को कम किया जा सकता है। डॉ. राम अवध राम ने परंपरागत कृषि विकास योजना के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के जैविक इनपुट्स के उत्पादन को प्रदर्शित किया। डॉ. आशीष यादव ने इस ट्रेनिंग प्रोग्राम का संयोजन किया व किसानों को जैविक उत्पादन के विशेष तकनीकी एवं सावधानियों से अवगत कराया।

किरतपुर गांव में स्थापित किए गए इस ट्रेनिंग सेंटर पर उपलब्ध विभिन्न प्रकार के यन्त्र एवं अन्य सुविधाओं का प्रयोग करके किसान अपने उपयोग के लिए जैविक इनपुट्स का निशुल्क उत्पादन कर सकते हैं। वैज्ञानिकों द्वारा दिए गए मार्गदर्शन से जैविक उत्पादन तकनीकी एवं फसल की कटाई के बाद ग्रेडिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग में भी सहायता मिलेगी।

Related Post

CM Dhami

मुख्यमंत्री ने हिमांशु नेगी के परिजनों से घर जाकर की भेंट

Posted by - August 21, 2024 0
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (CM Dhami) ने बुधवार को भराड़ीसैण निवासी हिमांशु नेगी के घर पर जाकर उनके परिवारजनों…
CM Dhami

उत्तराखंड के नौ निकायों को मिला अटल निर्मल पुरस्कार

Posted by - December 19, 2022 0
देहरादून। मुख्यमंत्री (CM Dhami) ने सोमवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में स्वच्छ सर्वेक्षण-2022 में बेहतर प्रदर्शन करने…
CM Dhami

तेलंगाना में गरजे धामी, बोले- देश विरोधी और पाकिस्तान की भाषा बोल रहे कांग्रेसी

Posted by - May 6, 2024 0
देहरादून/हैदराबाद। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (CM Dhami) ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी देश को जोड़ने तो कांग्रेस के लोग देश…