18 अक्टूबर, 2021 को राजॠषि श्रद्धेय पंडित नारायण दत्त तिवारी को याद करने के मायने…

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“चरैवेति-चरैवेति-चरैवेति” यह मंत्र था- बप्पा दादाजी (Pandit Narayan Dutt Tiwari) का। देश की शीर्ष-अदालतों में हिन्दी एवम् अन्य भारतीय भाषाओं की प्रतिष्ठा हेतु ‘हिन्दी से न्याय ‘ इस देशव्यापी अभियान का वर्ष 2004 में केन्द्र बना तब का उत्तरांचल और अब का उत्तराखण्ड।

प्रेरक और प्रेरणा पुरुष थे -नाना ( नानाजी देशमुख) एवं पण्डित नारायण दत्त तिवारी। सपना जगाया देश के वरिष्ठतम एवं प्रख्यात सम्पादक अशोक पाण्डेय ने।

अशोक भैया उस समय उत्तराखण्ड में दैनिक-जागरण के सम्पादक थे, नैनीताल हाईकोर्ट में हिन्दी में कामकाज शुरू कराने हेतु न्यायिक भाषायी-स्वतन्त्रता का अभियान शुरू हो, इसके लिए कृत-प्रतिज्ञ श्रद्धेय तिवारी जी ने एक रास्ता तैयार किया, अतीव-आनन्द का विषय है कि आज यह अभियान अपने अंतिम-पड़ाव पर है, मामला केन्द्र-सरकार के पाले में है, 16 वीं लोकसभा में मामला संसद के पटल पर आ चुका है।

इसलिए भारत की सरकार मुद्दे से अनजान नहीं है। कांग्रेस के राष्ट्रीय-नेता हरीश रावत अभियान को अपना समर्थन प्रदान कर चुके हैं।

 

हम उम्मीद कर सकते है कि अगले बरस नैनीताल हाईकोर्ट हिन्दी में समस्त कामकाज निपटाने वाला देश का पहला व एकमात्र राज्य बन जायगा।

 

श्रद्धेय पण्डित नारायण दत्त तिवारी जहां भी होंगे, उत्तराखण्ड की नयी-सरकार को शुभकामनाएं एवं शुभाशीष प्रदान कर रहे होंगे, उनके इस अनुष्ठान की जय हो-विजय हो, आइये, आज के दिन हम परमप्रभु से यह प्रार्थना करें।

 

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