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इंडस्ट्रीज को ऑक्सीजन सप्लाई पर दिल्ली HC सख्त, कहा- लोग ही नहीं बचेंगे तो क्या होगा?

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नई दिल्ली। केंद्र की तरफ से कहा गया कि अगर किसी शख्स की प्लस ऑक्स 95 प्रतिशत है और एहतियात के तौर पर उसे ऑक्सीजन दिया जा रहा है तो यह ऑक्सीजन की बर्बादी है। केंद्र ने बताया कि आज शाम पांच बजे स्वास्थ्य सचिव राज्यों के अधिकारियों के संग मीटिंग करेंगे और ऑक्सीजन के सही इस्तेमाल के बारे में जानकारी देंगे। देश के कई राज्यों ऑक्सीजन की किल्लत का मामला सामने आया है।

  • दिल्ली हाईकोर्ट ने जाहिर की नाराजगी
  • ऑक्सीजन की किल्लत पर कोर्ट सख्त
  • दिल्ली में दवाइयों की कमी पर भी कोर्ट नाराज

कोरोना संकट के बीच कई राज्यों में ऑक्सीजन की किल्लत के मामले सामने आए हैं। दिल्ली के भी कई शहरों में ऑक्सीजन की किल्लत है। इस संबंध में एक मामले पर सुनवाई के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि जल्द ही और ऑक्सीजन मुहैया कराए जाएगा।

केंद्र के मुताबिक ऑक्सीजन के औद्योगिक इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है। घरेलू इस्तेमाल के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर की बिक्री के चलते अस्पतालों में ऑक्सीजन नहीं मिल पा रहा है। कुछ राज्यों में ऑक्सीजन के वाजिब इस्तेमाल पर काम हो रहा है।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

इंडस्ट्रीज को ऑक्सीजन दी जा रही है,पेट्रोलियम या कुछ बनाने के लिए,अगर लोग ही नहीं बचगे तो फ़िर इंडस्ट्रीज के बनाए प्रोडक्ट इस्तेमाल कौन करेगा? देश में हर रोज लाखों लोग करोना से संक्रमित हो रहे हैं। मान लीजिए 2 करोड़ से ऊपर लोग संक्रमित हो गए तो सोचिए कि कितने लोगों की मौत होगी। ऐसे में क्या इंडस्ट्रीज को ऑक्सीजन मिलनी चाहिए या कोरोना के मरीजों को?

केंद्र की तरफ से कहा गया कि अगर किसी शख्स की पल्स ऑक्स 95 प्रतिशत है और एहतियात के तौर पर उसे ऑक्सीजन दिया जा रहा है तो यह ऑक्सीजन की बर्बादी है। केंद्र ने बताया कि आज शाम पांच बजे स्वास्थ्य सचिव राज्यों के अधिकारियों के संग मीटिंग करेंगे और ऑक्सीजन के सही इस्तेमाल के बारे में जानकारी देंगे।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाईकोर्ट को बताया कि 162 टीएसए प्लांट लगाए गए हैं। 202 करोड़ की लागत का भुगतान केंद्र ने उठाया है. अस्पतालों में सेंट्रलाइज्ड पाइपलाइन की व्यवस्था की जानी थी। दिसंबर के बाद से प्लांट लगाने के लिए काम किया जा रहा था लेकिन जनवरी, फरवरी में कोरोना के मामले कम होने के बाद काम भी धीरे हो गया।

दिल्ली के लिए आठ टीएसए प्लांट आवंटित किए गए हैं। अबतक 6 साइट ही तैयार किए गए हैं। दो प्लांट के लिए साइट की तैयारी तक नहीं हुई है. अप्रैल के अंत तक बाबा साहब अंबेडकर अस्पातल के लिए मशीनरी दे दी जाएगी। बुराड़ी अस्पताल प्लांट भी शुरू हो गया है।

इस पर कोर्ट ने कहा कि आपके कहने के मतलब है कि 6 प्लांट को साइट की मंजूरी मिल गई है. इनमें से कितने चालू हैं? इस पर स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से कहा गया कि केवल एक प्लांट ही सक्रिय है। 2/3 को सक्रिय किया जा रहा है। एक प्लांट सक्रिय है और दो के लिए अभी साइट तक तय नहीं हुई है। राजा हरिश्चंद्र हॉस्पिटल कैंपस नरेला, वीवीएमसी और सफदरजंग अस्पताल- केंद्रीय अस्पताल के लिए साइट अनफिट पाई गई थी। नई साइट की तलाश की जा रही है।

इसके बाद कोर्ट ने पूछा कि कौन सी इंडस्ट्री है जो साइड प्रोडक्ट के तौर पर ऑक्सीजन का उत्पादन कर सकती हैं? क्या आपने उनसे ऑक्सीजन बनाने के लिए कहा? इस पर स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से कहा गया कि स्टील इंडस्ट्री ऐसा कर सकती है. स्टील सचिव  हाई पावर कमेटी की मीटिंग का हिस्सा हैं।

केंद्र के स्वास्थ्य विभाग ने कोर्ट को कहा कि एम्स के डायरेक्टर समेत कुछ एक्सपर्ट डॉक्टर्स के मुताबिक कोरोना के 100 मरीजों में से 80 फ़ीसदी को ऑक्सीजन की जरूरत नहीं होती है। 17 मोडरेट कैटेगरी में आते है जो नॉन ICU बेड पर होते है,केवल 3 फ़ीसदी को ही ऑक्सीजन की जरूरत होती है। दिल्ली को फिलहाल 200 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की जरूरत है जबकि दिल्ली को 328 मीट्रिक टन ऑक्सीजन एलोकेट की गई है।

दिल्ली में दवाइयों की कमी

दिल्ली सरकार ने कहा कि पिछले 10 दिनों से दिल्ली में दवाइयों की कमी है,ये किसी से छिपा नहीं है। डॉक्टर लोगों को दवाई लिख रहे है और मरीज के तीमारदार उनको लेने के लिए एक जगह से दूसरी जगह भाग रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि अगर डॉक्टर ने कोई दवाई लिखी है और वो मरीज को नहीं मिल पा रही है,तो ये हमारा काम है कि वो समस्या क्यों है और कैसे दूर होगी।

दिल्ली सरकार की तरफ से कल दोपहर एक बजे तक हलफनामा दायर करने की बात कही गई है। वहीं केंद्र की तरफ से हलफनामा दायर किया जा चुका है। केंद्र ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से भी वेंटिलेटर की जरूरत के संबंध में जानकारी उपलब्ध कराने के लिए कहा है। जीएनटीसीडी की मांग के मुताबिक 763 वेंटिलेटर्स मुहैया कराए गए हैं।

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