Dr. R. Rajesh Kumar

उत्तराखंड के शहरों की बदलेगी तस्वीर, अर्बन चैलेंज फंड से मिलेगा विकास को बड़ा सहारा

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देहरादून। सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार (Dr. R. Rajesh Kumar) ने कहा कि अर्बन चैलेंज फंड उत्तराखंड के शहरी विकास के लिए परिवर्तनकारी योजना साबित होगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार सभी नगर निकायों को इस योजना का अधिकतम लाभ दिलाने के लिए तेजी से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि यह योजना शहरों को आत्मनिर्भर, आधुनिक, स्वच्छ और निवेश अनुकूल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

राज्य सचिवालय में सोमवार को सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार (Dr. R. Rajesh Kumar) की अध्यक्षता में अर्बन चैलेंज फंड (UCF) को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में अपर सचिव आवास विनोद गिरी समेत आवास एवं शहरी विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान नगर निकायों को प्रतिस्पर्धात्मक आधार पर परियोजनाएं तैयार कर केंद्र सरकार को भेजने के निर्देश दिए गए।

₹1 लाख करोड़ की योजना, उत्तराखंड को मिलेगा लाभ

भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा संचालित इस योजना के तहत देशभर में ₹1 लाख करोड़ की केंद्रीय सहायता दी जाएगी। यह योजना वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक लागू रहेगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि उत्तराखंड के नगर निकाय समयबद्ध तरीके से उच्च गुणवत्ता वाले प्रस्ताव तैयार करें, ताकि राज्य के शहरों को आधुनिक सुविधाएं मिल सकें।

पर्वतीय राज्य होने से मिलेगा अतिरिक्त फायदा

उत्तराखंड को इस योजना में विशेष लाभ मिलने जा रहा है। पर्वतीय राज्य होने के कारण यहां के सभी 108 नगर निकाय क्रेडिट रीपेमेंट गारंटी योजना के दायरे में आएंगे। इससे छोटी नगर पालिकाएं और नगर पंचायतें भी बैंक ऋण लेकर बड़े विकास कार्य करा सकेंगी।

तीन क्षेत्रों में मांगे गए प्रस्ताव

योजना के तहत नगर निकायों से तीन प्रमुख क्षेत्रों में परियोजनाएं मांगी गई हैं। इनमें जल एवं स्वच्छता, पुराने शहर क्षेत्रों और बाजारों का पुनर्विकास तथा शहरों को पर्यटन, शिक्षा, उद्योग और व्यापार के केंद्र के रूप में विकसित करने वाली योजनाएं शामिल हैं।

इन शहरों को मिल सकता है फायदा

राज्य सरकार ने ऋषिकेश, देहरादून, हरिद्वार, हल्द्वानी, काशीपुर, रुड़की, श्रीनगर, रामनगर और रुद्रपुर जैसे शहरों में औद्योगिक, तीर्थाटन, पर्यटन और शैक्षिक ढांचे से जुड़े प्रस्ताव तैयार करने की संभावना जताई है।

50 फीसदी राशि बाजार से जुटानी होगी

योजना के तहत कुल परियोजना लागत का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा बैंक ऋण, बॉन्ड या पीपीपी मॉडल से जुटाना होगा। केंद्र सरकार 25 प्रतिशत सहायता देगी, जबकि शेष 25 प्रतिशत राज्य सरकार या नगर निकाय वहन करेंगे।

प्रदर्शन के आधार पर मिलेगी किस्तें

केंद्रीय सहायता तीन चरणों में जारी होगी। पहली किस्त 30 प्रतिशत, दूसरी 50 प्रतिशत और अंतिम 20 प्रतिशत दी जाएगी। आगे की किस्तों के लिए परियोजना की प्रगति, जियो टैगिंग और स्वतंत्र सत्यापन जरूरी होगा।

मुख्यमंत्री ने दिए तेजी से कार्रवाई के निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि सभी नगर निकाय जल्द प्राथमिक परियोजनाएं चिन्हित करें, कॉन्सेप्ट नोट तैयार करें और डीपीआर बनाकर समय पर केंद्र सरकार को भेजें। उन्होंने कहा कि राज्य के शहरों को स्वच्छ, सुगम, आधुनिक और निवेश अनुकूल बनाना सरकार की प्राथमिकता है।

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