दिवाली 2020: जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि-विधान और महत्व

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लाइफस्टाइल डेस्क.   दशहरा खत्म हो चुका है, अब लोगो को बेसब्री से दिवाली का इन्तेजार है. दिवाली हिंदुओं का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है. यह पूरे देश में बड़े घूम-धाम से मनाई जाती है. यह त्यौहार अन्धकार पर रौशनी का और असत्य पर सत्य का प्रतीक माना जाता है. इसे दीपावली के नाम से भी जाना जाता है. इस साल 14 नवंबर शनिवार को दिवाली का त्योहार मनाया जाएगा. हिंदी पंचाग के अनुसार, दिवाली का त्योहार हर वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है. धनतेरस के दिन से दिवाली का त्योहार शुरु हो जाता है. इस​ दिन घरों की साफ सफाई की जाती है और दीपक या रोशनी से लोग अपने घरों को सजाते है.

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दिवाली का शुभ मुहूर्त

14 नवंबर को चतुर्दशी तिथि पड़ रही है जो दोपहर 1:16 तक रहेगी. इसके बाद अमावस तिथि का आरंभ हो जाएगा जो 15 नवंबर की सुबह 10:00 बजे तक रहेगी. हालांकि, 15 तारीख को केवल स्नान दान की अमावस्या की जाएगी. गौरतलब है कि लक्ष्मी पूजा संध्याकाल या रात्रि में दिवाली में की जाती है.दिवाली में मां लक्ष्मी के साथ-साथ श्री यंत्र की पूजा की जाती है. ज्योतिष विशेषज्ञों की मानें तो इस दीपावली गुरु धनु राशि में रहेगी ऐसे में श्री यंत्र की पूजा रात भर कच्चे दूध से करना लाभदायक हो सकता है.इधर, शनि अपनी मकर राशि में विराजमान रहेगी. इस दिन अमावस्या का योग भी है. ऐसे में तंत्र-यंत्र की पूजा करना इस दिन लाभदायक होगा.

लक्ष्मी पूजन का मुहूर्त

ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि लक्ष्मी पूजन प्रदोषयुक्त अमावस्या को स्थिर लग्न और स्थिर नवांश में किया जाना श्रेष्ठ माना गया है। प्रदोष काल शाम 5:33 से रात 8:12 तक रहेगा। लक्ष्मी पूजन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त शाम 5:49 से 6:02 बजे तक रहेगा। इस मुहूर्त में प्रदोषकाल स्थिर वृष लग्न और कुंभ का स्थिर नवांश भी रहेगा।

दिवाली का महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम जब लंका विजय कर पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ वनवास पूरा कर अयोध्या वापस आए थे। तब अयोध्या का हर घर और चौराहा दीपों की रोशनी से जगमग था। हर अयोध्यावासी ने भगवान राम के वनवास से नगर आगमन पर अपने घर को दीपों से सजाया था। तब से हर वर्ष कार्तिक मास की अमावस्या को दिवाली मनाई जाती है।

दिवाली पर इन्हें भी पूजें

दिवाली पर केवल महालक्ष्मी की ही नहीं बल्कि साथ ही साथ भगवान विष्णु की पूजा अर्चना भी श्रद्धा पूर्वकर की जानी चाहिए, तब ही मां प्रसन्न होती है. इसके अलावा इस दिन यमराज, चित्रगुप्त, कुबेर, भैरव, हनुमानजी, कुल देवता व पितरों का भी श्रद्धा पूर्वक पूजना चाहिए.

 

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