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मुख्यमंत्री ने मातृशक्ति का किया आह्वान- बच्चों को रोने और नाराज होने दें, लेकिन स्मार्टफोन कतई न दें

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उत्तर प्रदेश में पारंपरिक खेती के दौर को पीछे छोड़ते हुए अब युवा किसान आधुनिक और उच्च लाभ वाली फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है बाराबंकी के युवा किसान नीरज पटेल ने। नीरज ने ‘राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना’ का लाभ उठाकर जरबेरा फूलों की खेती को अपनी पहचान बनाया है। आज वह न केवल खुद आत्मनिर्भर हैं, बल्कि अन्य ग्रामीणों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा कर रहे हैं।

उद्यान विभाग की सलाह और 50% सब्सिडी का साथ

पढ़ाई पूरी करने के बाद नीरज ने पुश्तैनी खेती को नए तरीके से करने की ठानी। उद्यान विभाग के एक कार्यक्रम में उन्हें जरबेरा की खेती और पॉलीहाउस तकनीक के बारे में पता चला। योगी सरकार की मदद से साल 2018 में उन्हें 29.50 लाख रुपये का ऋण मिला और योजना के नियमानुसार 50% की सब्सिडी भी प्राप्त हुई। इससे करीब 75 लाख रुपये की लागत वाला पॉलीहाउस प्रोजेक्ट उनके लिए बेहद आसान हो गया।

इज़रायली तकनीक और ड्रिप सिंचाई से ‘स्मार्ट’ फार्मिंग

नीरज ने अपने एक एकड़ के खेत में पॉलीहाउस स्थापित किया है, जिसमें जरबेरा के करीब 25 हजार पौधे लहलहा रहे हैं। खास बात यह है कि ये पौधे एक बार लगने के बाद लगभग 6 साल तक लगातार फूल देते हैं। नीरज ने इजरायली पद्धति पर आधारित ड्रिप इरिगेशन सिस्टम अपनाया है, जिससे न केवल पानी की बचत होती है बल्कि फूलों की गुणवत्ता भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की रहती है। नीरज की इस पहल से गांव के 5 अन्य लोगों को भी नियमित रोजगार मिला है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।

बाजार में मांग और सालाना 10 लाख की बचत

शादी-ब्याह और सजावटी आयोजनों में जरबेरा के फूलों की भारी मांग रहती है। नीरज के मुताबिक, वे हर साल सभी खर्चे निकालने के बाद 8 से 10 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं। फूलों की बिक्री के लिए उन्हें कहीं भटकना नहीं पड़ता, क्योंकि गुणवत्ता अच्छी होने के कारण खरीदार खुद उन तक पहुंचते हैं। नीरज अब आसपास के अन्य किसानों के लिए एक रोल मॉडल बन चुके हैं और उन्हें पारंपरिक फसलों के जाल से निकलकर आधुनिक बागवानी अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

योगी सरकार की योजनाओं का असर

यह कहानी उत्तर प्रदेश सरकार के उन प्रयासों की पुष्टि करती है, जहां ‘नेशनल हॉर्टिकल्चर मिशन’ के जरिए किसानों को उद्यमी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। सब्सिडी और तकनीकी सहयोग ने उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में स्टार्टअप कल्चर की नींव रख दी है, जिससे खेती अब युवाओं के लिए पहली पसंद बनती जा रही है।

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