हरा सकते हैं कोरोना वायरस को

सांस लेने का तरीका बदलकर आप हरा सकते हैं कोरोना वायरस को

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नई दिल्ली। वर्तमान समय में कोरोना वायरस से बचने के सबसे बड़े हथियारों में फिजिकल डिस्टैंसिंग, मास्क लगाना और लगातार हाथ धोना शामिल हैं। इससे बचने के लिए अभी तक हमारे पास कोई और उपचार मौजूद नहीं था, लेकिन अब नोबेल पुरस्कार जीतने वाले फार्माकोलॉजिस्ट लुईस जे इग्नारो ने बड़ा दावा किया है।

सही सांस लेने से मतलब है कि आप नाक से सांस लें और मुंह से छोड़ें

लुईस जे इग्नारो ने बताया कि सही तरीके से सांस लेने पर कोविड-19 को हराने में मदद मिल सकती है। जी हां, सही सांस लेने से मतलब है कि आप नाक से सांस लें और मुंह से छोड़ें। जिन लोगों का सांस लेने का चक्र गड़बड़ है, उनको कोरोना जल्दी होने के आसार होते हैं।

अगर कोई व्यक्ति अपनी नाक से सांस लेता है और अपने मुंह से बाहर निकालता है तो यह उसके शरीर के लिए अधिक फायदेमंद होगा

द कन्वर्सेशन में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति अपनी नाक से सांस लेता है और अपने मुंह से बाहर निकालता है तो यह उसके शरीर के लिए अधिक फायदेमंद होगा। साल 1998 में फिजियोलॉजी और मेडिसिन में नोबेल पुरस्कार पाने वाले लुईस जे इग्नारो द्वारा लिखित अध्ययन में कहा गया है कि सांस लेने का यह तरीका अधिक फायदेमंद है, क्योंकि नेजल कैविटी कुछ नाइट्रिक ऑक्साइड का उत्पादन करती है। ये मोलेक्यूल फेफड़ों के जरिए रक्त प्रवाह को बढ़ाकर रक्त में ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ाता है।

जब कोई अपनी नाक से सांस ले रहा होता है तो नाइट्रिक ऑक्साइड सीधे उनके फेफड़ों में पहुंच जाती है

जब कोई अपनी नाक से सांस ले रहा होता है तो नाइट्रिक ऑक्साइड सीधे उनके फेफड़ों में पहुंच जाती है। इससे फेफड़ों में कोरोना वायरस की प्रतिकृति अवरुद्ध हो जाती है। इसके अलावा ब्लड में ऑक्सीजन की भरपूर मात्रा से व्यक्ति तरोजाता महसूस कर सकता है। मानव शरीर लगातार नाइट्रिक ऑक्साइड का उत्पादन करता है, जो हमारे शरीर की नसों, धमनियों खासकर फेफड़ों में एंडोथेलियम के निर्माण में मदद करती है।

सही तरीके से सांस लेने पर शरीर के अन्य अंगों में रक्त का प्रवाह बढ़ता है

उनका कहना है कि एडोथेलियम धमनियों की मांसपेशियों को चिकना करने में भी मदद करती है, जो हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को रोकने में मदद करता है। सही तरीके से सांस लेने पर शरीर के अन्य अंगों में रक्त का प्रवाह बढ़ता है, इसके अलावा नाइट्रिक ऑक्साइड सामान्य धमनियों में रक्त के थक्कों को रोकने में भी मदद करती है।

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