भाजपा के जिस पूर्व सीएम ने की सरकारी भूमि हस्तांतरण की आलोचना वही रहा जमीन कब्जाने में आगे

569 0

जम्मू कश्मीर के दिग्गज भाजपा नेता एवं पूर्व डिप्टी सीएम कविंदर गुप्ता का नाम राज्य के भीतर जमीन कब्जाने वाली सूची में आया है। अजीब बात ये कि उन्होंने राज्य की जमीन को निजी व्यक्तियों के हाथ में देने के रोशनी अधिनियम (अब रद्द) को गलत बताते हुए इसे भूमि जिहाद बताया था। वकील शेख शकील ने आरटीआई के तहत जो जानकारी हासिल की उसमें के मुताबिक 2010 से 2016 के बीच जम्मू जिले के घैंक गांव की एक जमीन पर कब्जा था।

कविंदर के साथ उस जमीन पर निर्दलीय पार्षद सुभाष शर्मा और शिव रतन गुप्ता का भी नाम है, दोनो ने ही सरकारी जमीन पर कब्जे की बात से इंकार कर दिया है। कविंदर गुप्ता ने माता-पिता की कसम खाते हुए कहा- मुझे नहीं पता कि राजस्व अधिकारियों ने कब्जा की गई जमीन में मेरा नाम कैसे जोड़ दिया।

शर्मा निर्दलीय पार्षद हैं। वह जम्मू नगर निगम में इंद्रा कॉलोनी, जानीपुर का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि शिव रतन गुप्ता इंद्रा कॉलोनी के रहने वाले हैं। हालांकि, गुप्ता और शर्मा ने गांव में सरकारी जमीन पर कब्जा करने से इन्कार किया। कविंदर गुप्ता ने कहा, “मैं अपने माता-पिता की कसम खाता हूं कि मुझे नहीं पता कि राजस्व अधिकारियों ने 23 कनाल और नौ मरला राज्य भूमि से जुड़ी गिरदावरी में मेरे नाम पर कब और कैसे प्रवेश किया और इसे कैसे और कब रद्द कर दिया गया।”

साल 2010 में जम्मू कश्मीर मे नेशनल कॉन्फ्रेंस-कांग्रेस गठबंधन सरकार थी और कविंदर गुप्ता जम्मू नगर निगम के मेयर थे। उसी दौरान उनके नाम खसरा गिरदावरी (राजस्व विभाग का दस्तावेज जो भूमि और फसल विवरण निर्दिष्ट करता है) में दर्ज किया गया था। हालांकि, इसे नौ फरवरी, 2017 को भलवाल तहसीलदार द्वारा जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के 2011 के आदेश के बाद रद्द कर दिया गया था, जिसमें सरकार को निजी व्यक्तियों के पक्ष में राज्य की भूमि के सभी म्यूटेशन और गिरदावरी को रद्द करने का निर्देश दिया गया था।

खट्टर सरकार का दावा- ऑक्‍सीजन की कमी से नहीं हुई कोई मौत, विपक्ष का काम सिर्फ शोर मचाना

अधिवक्ता शेख शकील के माध्यम से सेवानिवृत्त प्रोफेसर एस के भल्ला द्वारा दायर एक जनहित याचिका में यह निर्देश आया था। गुप्ता तब जम्मू-कश्मीर विधान सभा के अध्यक्ष थे। बता दें कि नवंबर 2020 में डीडीसी चुनावों से पहले जम्मू-कश्मीर सरकार ने ऐसे लोगों की लिस्ट जारी की थी, जिनमें विपक्षी नेता और सेवानिवृत्त नौकरशाह थे। इन्होंने द ऑक्यूपेंट्स एक्ट, 2001 (रोशनी एक्ट भी कहा जाता है) के तहत राज्य की भूमि पर कब्जा कर लिया था।

Related Post

पैंडोरा मामले में आया इमरान खान का नाम, विपक्ष ने मांगा इस्तीफा

Posted by - October 4, 2021 0
इस्लामाबाद। पाकिस्तान में पैंडोरा पेपर्स लीक मामले में अब प्रधानमंत्री इमरान खान की मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं। विपक्ष और पाकिस्तान…
SS Sandhu

सरकारी भूमि से कब्जे हटाने के लिए एक सप्ताह के भीतर लागू होगी नई नीति: मुख्य सचिव

Posted by - May 13, 2023 0
नैनीताल। प्रदेश के मुख्य सचिव (SS Sandhu) सरकारी भूमि से अतिक्रमण को नियंत्रित करने और सरकारी भूमि पर कब्जों को…
CM Bhajan Lal

कांग्रेस भ्रष्टाचार की जननी पार्टी है: भजनलाल शर्मा

Posted by - October 24, 2024 0
झुंझुनू। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (CM Bhajanlal) ने गुरुवार काे झुंझुनू विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी…
NHPC power house tunnel closed due to landslide

भूस्खलन से एनएचपीसी पावर हाउस की टनल का मुहाना बंद, 19 मजदूर फंसे

Posted by - August 31, 2025 0
पिथौरागढ़ (उत्तराखंड) – जिले के धारचूला क्षेत्र में भूस्खलन (Landslide) के चलते बड़ा हादसा हो गया। ऐलागाड़ स्थित NHPC पावर…