नई दिल्ली: जंतर-मंतर आंदोलन में कथित पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने दिल्ली पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। शुक्रवार को वह संसद मार्ग थाने पहुंचे और मामले की जांच की जानकारी मांगी। इस दौरान पैलेट गन से घायल होने का दावा करने वाले साहिल लोहबच भी उनके साथ थे।
राहुल गांधी ने पुलिस अधिकारियों से मुलाकात कर पूछा कि मामले में अब तक क्या जांच हुई और शिकायतों पर क्या कार्रवाई की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।
पुलिस से बातचीत, फिर धरना
राहुल गांधी ने दिल्ली पुलिस की ज्वाइंट सीपी नुपुर प्रसाद से मुलाकात की। अधिकारियों से बातचीत के बाद वह थाने के बाहर आकर धरने पर बैठ गए। उनके साथ कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता भी पहुंच गए।
मौके पर पुलिस की तैनाती बढ़ा दी गई और थाने के बाहर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं।
Delhi: Lok Sabha LoP Rahul Gandhi at the DCP Office at Parliament Street Police Station.
He is here with Sahil Lochav, who suffered pellet gun injuries during the Jantar Mantar students’ protest last month. Rahul Gandhi is insisting that an FIR be registered on Lochav’s… pic.twitter.com/9ZCRtYCvUG
— ANI (@ANI) August 21, 2026
क्या है पैलेट गन विवाद?
CJP के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई थी। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों पर कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल का आरोप लगा।
कांग्रेस इसी मामले में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठा रही है। राहुल गांधी का कहना है कि पीड़ितों की शिकायत पर कार्रवाई होनी चाहिए और जांच की स्थिति सार्वजनिक की जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट की कमेटी करेगी जांच
इस पूरे घटनाक्रम पर सुप्रीम कोर्ट ने पांच सदस्यीय हाई पावर्ड एन्क्वायरी कमेटी गठित की है। कमेटी पुलिस की कथित ज्यादती, पैलेट गन के इस्तेमाल और प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर हुई हिंसा, दोनों पक्षों की जांच करेगी।
कमेटी की अध्यक्षता पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी करेंगे। इसमें न्यायपालिका और जांच एजेंसियों से जुड़े अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं।
अब किसके जवाब का इंतजार?
राहुल गांधी के धरने के बाद पैलेट गन विवाद ने फिर राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। कांग्रेस इसे छात्रों और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों से जोड़कर उठा रही है, जबकि पूरे मामले की जांच अभी जारी है।
अब पुलिस की कार्रवाई और सुप्रीम कोर्ट की कमेटी की रिपोर्ट से ही यह साफ होगा कि आंदोलन के दौरान वास्तव में क्या हुआ था और कथित बल प्रयोग की जिम्मेदारी किसकी बनती है।
