उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Maurya) ने आज मीडिया बंधुओं से वार्ता करते हुए समाजवादी पार्टी पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रदेश की 25 करोड़ जनता के हितों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी बात रखने का अवसर से रोकना निन्दीनीय है। यह लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है और इससे स्पष्ट होता है कि समाजवादी पार्टी का उद्देश्य जनहित नहीं, बल्कि सदन का बहुमूल्य समय नष्ट करना है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता सब कुछ देख रही है। प्रदेश के विकास, कानून व्यवस्था, किसानों, युवाओं, महिलाओं तथा गरीबों के हितों से जुड़े विषयों पर चर्चा करने के बजाय विपक्ष लगातार व्यवधान उत्पन्न कर रहा है। उन्होंने कहा कि जिन दलों का जनता के सरोकारों से कोई लेना-देना नहीं रह गया है, वे केवल राजनीतिक स्वार्थ के लिए सदन की कार्यवाही बाधित कर रहे हैं।
श्री मौर्य ने कहा कि समाजवादी पार्टी के नेताओं को श्रीराम मंदिर निर्माण अथवा चढ़ावे जैसे विषयों पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि उनमें वास्तव में साहस है तो उन्हें काशी विश्वनाथ धाम के समीप स्थित ज्ञानवापी प्रकरण तथा भगवान श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े विषयों पर बात करें। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर समाजवादी पार्टी हमेशा मौनधारण कर लेती है और केवल राजनीतिक लाभ-हानि को ध्यान में रखकर हंगामा करती रहती है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जनता अब सपा की राजनीति को भली-भांति समझ चुकी है। विधानसभा के भीतर जनहित के मुद्दों पर चर्चा से बचना और केवल हंगामा करना लोकतंत्र के प्रति उनकी नकारात्मक सोच को दर्शाता है। उत्तर प्रदेश की जनता ऐसे आचरण को कभी स्वीकार नहीं करेगी।
श्री मौर्य ने विश्वास व्यक्त किया कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता समाजवादी पार्टी को उसके इस रवैये का करारा जवाब देगी। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विकास, सुशासन और जनकल्याण के संकल्प के साथ कार्य कर रही है, जबकि विपक्ष केवल भ्रम फैलाने और सदन की कार्यवाही बाधित करने की राजनीति कर रहा है।
अंत में उपमुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार प्रदेश के प्रत्येक नागरिक के हितों के लिए प्रतिबद्ध है और लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखते हुए विकास की गति को और तेज करने के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी।
